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‘राष्ट्र महज जमीन का टुकड़ा या भौगोलिक सीमा का नाम नहीं है, ‘राष्ट्र’ तो एक सशक्त भावना है। इस भावना का ‘राष्ट्र विकास’ से सीधा सम्बंध है। यदि देश में सुशासन होगा तो राष्ट्र भावना प्रबल होगी और इसी राष्ट्रभाव से अपेक्षित विकास होता है। राष्ट्रभाव का जाग्रत मूलमंत्र ही विकास का चिंतन प्रसृत करता है। वही भाव हमारे विकास की गति को तेज करता है। भारत प्राचीन महान सांस्कृतिक धरोहर वाला देश है। समय के अच्छे-बुरे सभी पहलुओं का अनुभव करते हुए उपस्थित कठिनाइयों में से रास्ता खोजते हुए विश्व कल्याण की कामना से आगे बढ़ रहा भारत राष्ट्र है। राष्ट्रभाव हर भारतीय में है। बस राष्ट्रभाव की भावनाओं को जागृत करते की आवश्यकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो एक भारत, श्रेष्ठ भारत का सपना साकार करने का अभियान चलाने के लिए एक ऐसे नायक की तलाश होती है जो विकास के विविध आयामों की कसौटी पर खरा उतर सके। इस कसौटी पर भारत के लोकनायक के रूप में नरेंद्र मोदी उभर रहे हैं।

मा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार अपने तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा कर रही है। इन ३ वर्षों में ज्ञान-शक्ति, ऊर्जा-शक्ति, जल-शक्ति, जन-शक्ति और रक्षा-शक्ति को विकास का पंचतंत्र मानकर कार्य हो रहा है। वे कानून को सर्वोच सत्ता और संविधान को सरकार का धर्मग्रंथ मानकर कार्य करते नजर आ रहे हैं। महिलाओं की समान भागीदारी से उद्यमिता एवं अर्थव्यवस्था को मजबूती करने की पहल कर रहे हैं। हर पेट को रोटी व प्रत्येक युवक को रोजगार मोदी सरकार का सपना है। सरकार के माध्यम से गत ३ वर्षों में हो रहे प्रयास अभिनंदनीय हैं। सभी को रोजगार के साथ बहुमुखी विकास, वैज्ञानिक क्षेत्र एवं प्रौद्योगिक क्षेत्र में परचम लहराने की दिशा में हो रहे सक्षम प्रयास मन में अच्छे दिनों की अभिलाषा जगाते हैं। उद्योग और कृषि क्षेत्र में समन्वय की बात को लेकर मोदी जी के विचार प्रभावित करने वाले हैं। उनका कहना है, ‘‘हम उस प्रकार की अर्थव्यवस्था लाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे अधिकतम क्षेत्रों को लाभ हो। भारत प्रॉडक्शन हो वह इकोनॉमी के लिए जरूरी है। लेकिन साथ-साथ प्रॉडक्शन बाय मासेस भी होना चाहिए। स्मॉल स्केल इण्डस्ट्रीज के माध्यम से प्रॉडक्शन में आम जनता शामिल हो और इसी में लाखों हाथ लगें, लाखों का पेट भरें। लेकिन इसमें समयानुकूल अपग्रेडेशन होना आवश्यक है। इसी दिशा में हमारी सरकार प्रयासरत है।’’

नरेंद्र मोदी सरकार के तीन सालों के प्रयासों में ‘सुशासन और विकास‘ की दिशा में बढ़ते कदम नजर आ रहे हैं। सुशासन जिसमें छोटे-बड़े, सभी जाति-पाति के लोगों की शासन में समान भागीदारी हो। सभी को समान अधिकार हो। सभी निर्भय होकर अपनी बात कह सकें। सभी को शिक्षा रोजगार व प्रगति के समान अवसर मिले। इस ‘सुशासन और विकास’ की व्याख्या में देश और जनता का उत्तम स्वास्थ्य भी अपेक्षित है। नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा संपन्न हो रहे कार्य से भारत की जनता को ‘सुशासन और विकास’ की गति का अहसास हो रहा है। स्वामी विवेकानंद का एक सुविचार है- ‘आप अपने देवी-देवताओं को भूल जाएं और आने वाले समय में सिर्फ एक ही देवी की चिंता हो, वह है- भारत माता।‘ इसी मूलमंत्र को लेकर नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में संपूर्ण सरकार कर्तव्यरत है। राष्ट्र के सामने अनेक विकराल समस्याएं खड़ी हैं। देश छद्म युध्द से परेशन है और उस युध्द का नाम है आतंकवाद, माओवाद, अलगाववाद। ये बुराइयां विकास में रोड़ा अटकाने का प्रयास कर रही हैं। इन विघटनकारी शक्तियों से सख्ती से निपटने के प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। राष्ट्र-विकास की राह में ये विघटनवादी शक्तियां बड़ी रुकावट पैदा कर सकती हैं। भारत के प्रत्येक व्यक्ति की रक्षा के लिए मोदी सरकार प्रतिबद्ध सरकार बने,यह जन-जन की अपेक्षा है। वर्तमान समय में मोदी सरकार राष्ट्र-विकास के प्रति प्रतिबद्ध दिखाई देती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व में देश अपने नए भविष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्र विकास की इस यात्रा में राज्य सरकारें भी अपना भरपूर योगदान दे रही हैं। यह अत्यंत गर्व की बात है। भारत के अंदर पिछले तीन सालों में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचने वाला विकास कार्य संपन्न हो रहा है।

बड़े नोटों के विमुद्रीकरण की प्रक्रिया के सफलतापूर्वक संपन्न होने से आलोचकों का मुंह बंद हो गया है। इस निर्णय का लाभ देश के सभी वर्गों को मिलने जा रहा है। उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में मिली चुनावी सफलता भ्रष्टाचार के विरुद्ध लिए निर्णायक कदम को सफल बनाने के लिए भारतीय जनता एकजुटता के साथ मा.नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है। यह भारत देश की इच्छाशक्ति का प्रभाव है। विकास व्यक्ति के साथ राष्ट्र के लिए भी परमावश्यक है। विकास का चिंतन, मनीषा और प्रयास नरेंद्र मोदी सरकार के ‘चरैवेति-चरैवेति‘ का प्रमाण है। गौरवशाली भारत बनाने का यही मार्ग है। जो संदेह की बजाय विश्वास निर्माण कर रहा है। इसमें संतोष है, अंत्योदय का आभास है, सामूहिकता का महत्व है, समन्वयता की समता है, नैतिकता की नीयत है। अत: इससे स्पष्ट है कि विश्व को आलोकित करने का सामर्थ्य भारत में निर्मित हो रहा है। यह अहसास भारत के साथ विश्व के सभी सामर्थ्यशाली राष्ट्र की चर्चाओं में है।

‘हिंदी विवेक’ मासिक पत्रिका के माध्यम से ‘राष्ट्र विकास विशेषांक’ प्रकाशित करने के पीछे महत्वपूर्ण कारण है, राष्ट्र विकास के प्रति नरेंद्र मोदी सरकार की सोच और प्रतिबद्धता। नए भारत के निर्माण के लिए तमाम आयामों पर प्रयास हो रहे हैं। भारत को गौरवशाली बनाने के इस प्रयास को यह राष्ट्र विकास विशेषांक देश भर में फैले ‘हिदीं विवेक’ के पाठकों तक पहुंचाएगा। हमारा यह प्रयास ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत, विकसित भारत’ की दिशा में अपने कदम बढ़ाने में राम की सहायता करने वाली गिलहरी की तरह सेतु निर्माण में सहायक होगा, यह हमारा विश्वास है।

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