| सार्वजनिक रूप से शराब पीना स्वास्थ्य, समाज और परिवार- तीनों के लिए अत्यंत हानिकारक है। इसके नियंत्रण के लिए कठोर कानूनों के साथ-साथ जनजागरूकता, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी आवश्यक है। तभी एक स्वस्थ, सुरक्षित और सभ्य समाज का निर्माण सम्भव हो सकेगा। |
युवाओं को शराब की लत में जकड़ा हुआ देखता हूं तो धुंधले समाज की तस्वीर दिखाई देती है, अत: युवाओं को स्वयं सम्भलना होगा।
तथाकथित अमीर और आधुनिक लोगों को जब मैं देखता हूं तो ऐसा लगता है कि वे केवल अपने सुख के लिए जीवन जी रहे हैं। अपने ही पेट भरने के लिए ही सोचते हैं, उनके जीवन की डिक्शनरी में ना तो समाज है, ना राष्ट्र है और न ही देश की युवा पीढ़ी का स्वास्थ्य है।
मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं? क्योंकि जब हम ऐसे लोगों की जीवनशैली देखते हैं तो उसमें हमें केवल उनके खुद के परिवार को पालने का दृष्टिकोण ही दिखाई देता है। उनके खुद के बच्चे ही अनाप-शनाप खर्च करते हुए दिखते हैं। नए-नए शौक फरमाते हुए ही दिखते हैं। वे अपने किसी भी कार्यक्रम में खुलेआम शराब की बोटले सजाकर ये दिखावा करते हैं कि वे पैसेवाले हैं, वे ही आधुनिक है। वे अपनी हर चाल में ऐसा दर्शाते हैं कि जैसे ये दुनिया उन्हीं के कारण चल रही है और केवल उन्हीं के लिए बनी है। वे ये दिखाने का प्रयास करते हैं कि जैसे उनसे महत्वपूर्ण इस संसार में कोई नहीं है।
शराब युवा पीढ़ी के लिए जहर है और यदि देश का एक बच्चा भी शराब के कारण जीवन बर्बाद करता है तो परिवार सहित समाज, राज्य और राष्ट्र को हानि होती है। वर्तमान युवा पीढ़ी के जीवन में आनंद का अर्थ बदल गया है। कदाचित् वे मनोरंजन को ही आनंद समझ बैठे हैं और प्लेजर को ही जीवन का लक्ष्य समझ बैठे हैं।
ऐसे युवाओं के पास बुद्धि तो हैं, किंतु विवेक नहीं है। उनके पास ज्ञान तो हैं, पर व्यवहारिक ज्ञान नहीं है। उन्होंने विज्ञान तो पढ़ा है, परंतु वैज्ञानिक टेम्परामेंट नहीं है।
सार्वजनिक रूप से शराब पीना समाज तथा राष्ट्र के लिए बहुत ही घातक है क्योंकि हर मानव की मानसिक स्थिति एक जैसी नहीं होती। जब कुछ युवा सार्वजनिक रूप से शराब का सेवन करते हैं तो वो उन सभी टीनएजर्स एवं युवाओं को निमंत्रण दे रहे होते हैं जो नशा नहीं करते। जिन्हें ये भी पता नहीं होता कि ये नशा उनके स्वास्थ्य के लिए कितना घातक है।
शराब से बहुतों के परिवार उजड़ गए हैं। शराब ने बहुत सी माता-बहनों के सुहाग उजाड़ दिए हैं। शराब ने कितने ही बच्चों को ड्राई नशे की ओर प्रेरित किया है, उनका जीवन बर्बाद हो गया है। कितनी माताओं की इकलौती संतान को काल ने ग्रास के रूप में निगल लिया है। कितने युवाओं के करियर चौपट हो गए हैं। ये आदत खराब है और बहुुत ही घातक है, अत: इसे सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।
नशे की ऐसी बहुत सी आदतें हैं जो जीवन को नकारात्मकता की ओर ले जाती है। युवाओं से आग्रह है कि आप जो भी कार्य करें, उससे पहले उसका समाज तथा राष्ट्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह अवश्य विचार करें।
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साथियों, यदि हमने अपनी ये शराब की सार्वजनिक लत, शादी विवाह में होनेवाली शराब की पार्टी तथा सार्वजनिक तौर पर शराब के सेवन को नहीं रोका तो इसका समाज पर बहुत ही नकारात्मक परिणाम होगा। बच्चे छोटी आयु में ही नशे की लत के कारण अपराधिक दुनिया की दलदल में फंस जाएंगे, जहां से निकलना उनके लिए कठिन हो जाएगा। फिर पारिवारिक और सामाजिक सभी प्रकार की मर्यादाएं ध्वस्त हो जाएगी और इससे राष्ट्र को बहुत हानि होगी। इसलिए सभी लोगों को सबक लेने की इसलिए भी आवश्यकता है क्योंकि हम भारत को विकसित बनाने की दहलीज पर खड़े हैं।
सार्वजनिक रूप से शराब पीने के दुष्परिणाम
शराब का सेवन प्राचीन काल से किसी न किसी रूप में समाज में मौजूद रहा है, किंतु जब यह आदत सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम दिखाई देने लगे तो इसके दुष्परिणाम केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहते बल्कि पूरे समाज, परिवार और आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करते हैं। सार्वजनिक रूप से शराब पीना न केवल अस्वस्थ आदत है बल्कि यह सामाजिक मर्यादाओं, कानून-व्यवस्था और नैतिक मूल्यों के लिए भी गम्भीर चुनौती बन जाता है।

स्वास्थ्य की दृष्टि से शराब अत्यंत हानिकारक है। लगातार शराब सेवन से लीवर सिरोसिस, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर जैसी घातक बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं।
सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने से व्यक्ति प्राय: अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करता है, जिससे दुर्घटनाओं, बेहोशी और जानलेवा स्थितियों का खतरा बढ़ जाता है। नशे की हालत में वाहन चलाना सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण है, जिसमें न केवल शराब पीने वाला व्यक्ति बल्कि निर्दोष राहगीर भी अपनी जान गंवा देते हैं।
सामाजिक दृष्टि से सार्वजनिक रूप से शराब पीना अव्यवस्था और असुरक्षा की भावना को जन्म देता है। नशे में धुत व्यक्ति प्राय: अभद्र भाषा का प्रयोग करता है, झगड़ा करता है या हिंसक व्यवहार अपनाता है। इससे सार्वजनिक स्थानों- जैसे पार्क, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजार और धार्मिक स्थलों की गरिमा नष्ट होती है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे ऐसे वातावरण में स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हैं। इससे समाज में भय, तनाव और अविश्वास का वातावरण बनता है।
परिवार पर भी शराब का दुष्प्रभाव गहरा और दीर्घकालिक होता है। शराबी व्यक्ति अपनी आय का बड़ा हिस्सा नशे पर खर्च करता है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है। घरेलू कलह, हिंसा, बच्चों की पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव और मानसिक तनाव आम समस्याएं बन जाती हैं। बच्चे जब अपने अभिभावकों को सार्वजनिक रूप से शराब पीते हुए देखते हैं तो उनके मन पर गलत संस्कार पड़ते हैं और वे भी भविष्य में इसी राह पर चलने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।
कानूनी और नैतिक दृष्टि से भी सार्वजनिक रूप से शराब पीना अपराध की श्रेणी में आता है। अनेक राज्यों और नगरों में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीना दंडनीय अपराध है। इसके बाद भी यदि लोग कानून का उल्लंघन करते हैं तो यह अनुशासनहीनता और नागरिक जिम्मेदारी की कमी को दर्शाता है। समाज का स्वस्थ विकास तभी सम्भव है जब नागरिक स्वयं अनुशासन का पालन करें। अत:
प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह न केवल स्वयं इस बुरी आदत से दूर रहे बल्कि दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करे।
-नरेंद्र यादव

