भारत विरोधी अंतरराष्ट्रीय मीडिया टूलकिट बीबीसी

Continue Readingभारत विरोधी अंतरराष्ट्रीय मीडिया टूलकिट बीबीसी

कहावत है—रस्सी जल गई, लेकिन ऐंठन नहीं गई। विश्व की सबसे बड़ी औपनिवेशिक शक्ति ब्रिटेन के साथ इन दिनों कुछ यही हो रहा है। बिजली और गैस के बिल लगभग दोगुना बढ़ चुके हैं। अर्थव्यवस्था की हालत खराब है। देश को संभालने के लिए भारतीय मूल के एक हिंदू को…

समग्र विकास को लक्षित बजट

Continue Readingसमग्र विकास को लक्षित बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट में आयकर सीमा की वृद्धि तथा स्लैब में परिवर्तन सबसे ज्यादा सुर्खियां पाया है। किंतु बजट को संपूर्णता में समझने के लिए उनके बजट भाषण के आरंभिक अंश का उल्लेख आवश्यक है। बजट भाषण का आरंभ करते हुए उन्होंने कहा कि अमृत काल…

अडाणी बनाम हिंडनबर्ग – विदेशी नैरेटिव का षडयंत्र

Continue Readingअडाणी बनाम हिंडनबर्ग – विदेशी नैरेटिव का षडयंत्र

उद्योगपति गौतम अडाणी की कंपनियों पर एक विदेशी रिसर्च कंपनी द्वारा लगे आरोपों के बाद जिस तरह संसद को विपक्षी दलों द्वारा बाधित किया जा रहा है, उससे आम धारणा बन रही है कि अडाणी पर हमला सुनियोजित है और इसके पीछे बड़ी राजनीतिक और कॉरपोरेट ताकतों का हाथ है।…

राम शिला यात्रा से चीन के एजेंडे को आघात कैसे लगा ?

Continue Readingराम शिला यात्रा से चीन के एजेंडे को आघात कैसे लगा ?

चीन सदैव भारत और नेपाल के रिश्तों में खलल डालने की कोशिश में लगा रहता है वो चीन को अपने करीब लाकर भारत को साइडलाइन करने की मंशा पर लगातार काम करता रहा है लेकिन राम शिला यात्रा ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया है। दरअसल अयोध्या के अंदर…

चीन एक ‘अलग-थलग’ और ‘मित्रविहीन’ भारत चाहता है

Continue Readingचीन एक ‘अलग-थलग’ और ‘मित्रविहीन’ भारत चाहता है

क्या भारत, चीन से निपट सकता है? यह प्रश्न बीते छह दशकों से प्रासंगिक है। क्या इस संकट का समाधान उन नीतियों में छिपा है, जिसका अनुसरण मई 2014 से पहले 13 पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री कर चुके है?— इसके परिणामस्वरूप ही आज भी 38 हजार वर्ग कि.मी. भारतीय भूखंड पर चीनी…

विकसित राष्ट्र की आधारशिला रखने वाला बजट

Continue Readingविकसित राष्ट्र की आधारशिला रखने वाला बजट

भारत का अमृत काल प्रारम्भ हो चुका है और वर्ष 2047 में भारत अपनी स्वाधीनता के 100 वर्ष पूरे कर रहा होगा। उस समय तक भारत को विश्व के मानचित्र पर एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की प्रेरणा देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी ने…

सम्यक विवेचन में समग्र विचार आवश्यक

Continue Readingसम्यक विवेचन में समग्र विचार आवश्यक

अंश पूर्ण नहीं होता। सदा अपूर्ण होता है। अंश के आधार पर पूर्ण का विवेचन नहीं हो सकता। विवेचन में देश काल के प्रभाव का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। सम्यक विवेचन में समग्र विचार आवश्यक होता है। देश काल के प्रभाव में समाज बदलते रहते हैं। मान्यताएं भी…

रमेश पतंगे नामक ‘कल्पवृक्ष’ !

Continue Readingरमेश पतंगे नामक ‘कल्पवृक्ष’ !

हमारी पुराणक कथाओं में कल्पवृक्ष नामक एक दिव्य वृक्ष का वर्णन आता है कि अगर उस वृक्ष के नीचे बैठकर कोई मनुष्य अपनी इच्छा प्रकट करता है तो वह वृक्ष तुरंत उसकी इच्छापूर्ति कर देता है। मगर किसी मनुष्य को हम कल्पवृक्ष की संज्ञा कैसे दे सकते हैं ? यह…

हमारी न्याय व्यवस्था पर बीबीसी का प्रहार

Continue Readingहमारी न्याय व्यवस्था पर बीबीसी का प्रहार

गुजरात दंगे को लेकर यूनाइटेड किंगडम के राष्ट्रीय प्रसारक— बीबीसी की वृत्तचित्र को किस श्रेणी में रखेंगे? क्या इसे पत्रकारिता कहेंगे या फिर भारत के प्रति घृणा? इस घटनाक्रम में भारत सरकार की जो प्रतिक्रिया आई है, उसपर अलग से विस्तृत चर्चा हो सकती है। यह पहली बार नहीं, जब…

मातृभाषा में न्यायालय के निर्णय अच्छी पहल

Continue Readingमातृभाषा में न्यायालय के निर्णय अच्छी पहल

आजादी के बाद हर भारतीय का सपना था कि सरकार के सभी अंगों में मातृभाषा के जरिये संवाद हो। सरकारी रीतियां-नीतियां उसकी भाषा में समझ में आने वाली हों। आकांक्षा रही कि आम जनता को न्याय उसकी भाषा में मिले। सवाल पूछा जाना चाहिए कि आम आदमी के हिस्से में…

जम्मू कश्मीर पहुंचकर बेनकाब हुई भारत जोड़ो यात्रा

Continue Readingजम्मू कश्मीर पहुंचकर बेनकाब हुई भारत जोड़ो यात्रा

यूँ तो कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा आरम्भ से ही विवादों के घेरे में रही किन्तु जम्मू कश्मीर पहुंच कर यह पूरी तरह बेनकाब हो गयी है। जम्मू कश्मीर के घटना क्रम ने यह सिद्ध कर दिया है कि राहुल गांधी की यह बहु प्रचारित यात्रा भारत जोड़ो नहीं भारत…

बाल गोकुलम् के संस्थापक एम.ए कृष्णन

Continue Readingबाल गोकुलम् के संस्थापक एम.ए कृष्णन

भारत की सबसे बड़ी विशेषता उसकी परिवार प्रणाली है। घर से ही बालक के मन पर संस्कार पड़ते हैं; पर इन दिनों संयुक्त परिवार के विखंडन, शहरीकरण तथा भौतिकता की होड़ के कारण लोग इस ओर ध्यान नहीं दे पाते। केरल में बच्चों को धर्म, संस्कृति और देशप्रेम के संस्कार…

End of content

No more pages to load