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पहली बार होगी डिजिटल जनगणना

पहली बार होगी डिजिटल जनगणना

by हिंदी विवेक
in समाचार..
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भारत की पहली डिजिटल जनगणना देश के इतिहास में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी। यह न केवल प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाएगी बल्कि नागरिकों की भागीदारी और डेटा की विश्वसनीयता को भी सुदृढ़ करेगी।

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में जनगणना केवल जनसंख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह देश की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक छवि प्रस्तुत करने का सबसे बड़ा माध्यम है। प्रत्येक 10 वर्ष में आयोजित होने वाली जनगणना देश की नीतियों, योजनाओं और संसाधनों के वितरण की आधारशिला होती है। अब भारत अपनी पहली डिजिटल जनगणना की ओर बढ़ रहा है, जो पारम्परिक कागजी प्रक्रिया से हटकर तकनीक आधारित प्रणाली को अपनाने का महत्वपूर्ण कदम है। यह परिवर्तन न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगा बल्कि डेटा की गुणवत्ता और पारदर्शिता को भी सुदृढ़ करेगा।ai डिजिटल जनगणना 01 अप्रैल 2026 से शुरू होगी। जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 है। जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश जैसे बर्फीले क्षेत्रों में संदर्भ तिथि 1 अक्टूम्बर, 2026 रहेगी। संदर्भ तिथि से तात्पर्य है कि इस समय से पूर्व जन्मे व्यक्ति ही जनगणना में शामिल किए जाएंगे। भारत की पिछली जनगणना 2011 में संदर्भ तिथि मार्च 2011 के पहले दिन 00:00 बजे तथा जम्मू एवं कश्मीर, उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश के बर्फ से ढके क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि अक्टूम्बर, 2010 के पहले दिन 00.00 बजे थी।

जनगणना दो चरणों में पूर्ण होगी। पहला चरण हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेंसस का है जिसमें आवासीय स्वरूप, दीवार, फर्श, छत, शौचालय एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी होगी। दूसरा चरण जनसंख्या की गणना का है जिसमें व्यक्तिगत जानकारी, जैसे- आयु, शिक्षा, रोजगार एवं जाति शामिल है।

डिजिटल जनगणना की आवश्यकता
पिछली जनगणनाओं में गणनाकर्मी घर-घर जाकर कागजी फॉर्म भरते थे। इस प्रक्रिया में समय अधिक लगता था और डेटा को संकलित करने, सुरक्षित रखने तथा विश्लेषण करने में भी कठिनाई होती थी। कभी-कभी मानवीय त्रुटियां, डेटा की पुनरावृत्ति या देरी जैसी समस्याएं सामने आती थीं। डिजिटल जनगणना इन चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करती है। टैबलेट, मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से डेटा सीधे डिजिटल रूप में दर्ज किया जाएगा, जिससे जानकारी तुरंत केंद्रीय सर्वर तक पहुंच सकेगी।

डिजिटल जनगणना के अंतर्गत गणनाकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे टैबलेट या स्मार्टफोन आधारित एप्लिकेशन का सही उपयोग कर सकें। नागरिकों को भी स्वयं-गणना की सुविधा प्रदान की जाएगी, जिससे वे निर्धारित पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। यह सुविधा विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों और तकनीक से परिचित लोगों के लिए उपयोगी होगी।

इस प्रक्रिया में जीआईएस तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे प्रत्येक घर का सटीक भौगोलिक स्थान दर्ज हो सकेगा। इससे नक्शों के आधार पर जनसंख्या का विश्लेषण और योजना निर्माण अधिक सटीक ढंग से किया जा सकेगा। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से डेटा की त्वरित जांच सम्भव होगी, जिससे गलत या अधूरी प्रविष्टियों को तुरंत सुधारा जा सकेगा।

डिजिटल जनगणना के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं। पहला, यह समय और संसाधनों की बचत करेगी। कागज, छपाई और परिवहन पर होने वाला खर्च कम होगा। दूसरा, डेटा की शुद्धता बढ़ेगी क्योंकि त्रुटियों की सम्भावना कम होगी। तीसरा, आंकड़ों का विश्लेषण तेजी से किया जा सकेगा, जिससे सरकार को नीतियां बनाने में कम समय लगेगा।

इसके अतिरिक्त डिजिटल डेटा को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा सकेगा। उदाहरण के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास से सम्बंधित योजनाओं में जनगणना के आंकड़ों का सीधा उपयोग किया जा सकेगा। इससे लक्षित लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित होगी।

चुनौतियां और सावधानियां
हालांकि डिजिटल जनगणना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। देश के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या हो सकती है। इसके लिए ऑफलाइन डेटा संग्रह की सुविधा रखी जाएगी, जिसे बाद में अपलोड किया जा सकेगा।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी होगी। मजबूत साइबर सुरक्षा उपाय, एन्क्रिप्शन और सुरक्षित सर्वर का उपयोग अनिवार्य होगा ताकि किसी भी प्रकार की डेटा चोरी या दुरुपयोग को रोका जा सके।

डिजिटल जनगणना प्रशासनिक प्रणाली को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाएगी। इससे केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बेहतर होगा। नीति-निर्माण में सटीक आंकड़ों का उपयोग होगा, जिससे योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ेगी। सामाजिक दृष्टि से भी यह परिवर्तन महत्वपूर्ण है। डिजिटल प्रक्रिया से नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी। स्वयं-गणना की सुविधा से लोगों में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। यह डिजिटल साक्षरता को भी प्रोत्साहित करेगा और देश को डिजिटल भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाएगा।
-अमित त्यागी

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