गुजरात के वापी में हिंदी विवेक के प्रतिनिधि के. एस. चौबे का बीते दिनों अचानक निधन हो गया। उनके निधन से हिंदी विवेक परिवार और संघ कार्य से जुड़े कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ और सक्रिय स्वयंसेवक थे। बुजुर्ग अवस्था में भी उनके मन में राष्ट्रधर्म और संघ कार्य के प्रति गहरी निष्ठा और समर्पण बना रहा।
उनकी कार्यनिष्ठा का अंदाज़ इसी से लगाया जा सकता है कि स्वर्गवास से पहले ही उन्होंने हिंदी विवेक के लिए विज्ञापन और सदस्यता शुल्क जमा कर दिया था। वे स्वभाव से अत्यंत अनुशासित और हिसाब-किताब के पक्के व्यक्ति थे। उनका सौम्य और मधुर स्वभाव सभी को आकर्षित करता था। मुंबई में आयोजित होने वाली हिंदी विवेक की प्रतिनिधि बैठकों में वे नियमित रूप से उपस्थित रहते थे और सक्रिय भागीदारी निभाते थे।
परिचय
के. एस. चौबे का पूरा नाम कृष्णदेव सत्यनारायण चौबे था। वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर के निवासी थे। अपने प्रारंभिक जीवन में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और जौनपुर में जिला स्तर पर संघ का दायित्व निभाया। साथ ही उन्होंने विद्यालयों में जाकर विशेष रूप से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्य को आगे बढ़ाने में भी सक्रिय भूमिका निभाई, ताकि अधिक से अधिक छात्र राष्ट्रीय विचारों से जुड़ सकें।

सन 1976 में वे मुंबई के जोगेश्वरी पूर्व स्थित मजाजवाड़ी क्षेत्र में आकर रहने लगे। यहाँ आते ही वे नियमित रूप से संघ की शाखा में जाने लगे। उन्होंने यहाँ शाखा कार्यवाह और मंडल कार्यवाह जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया।
इसके बाद वे कुछ समय के लिए पुणे गए, जहाँ लगभग तीन वर्षों तक रहे और वहाँ भी शाखा की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। बाद में वे रायगढ़ जिले में आए और वहाँ तालुका स्तर पर संघ कार्य के विस्तार में अपना योगदान दिया।
आगे चलकर वे गुजरात के वापी में रहने लगे। वहाँ नगर कार्यवाह के दायित्व से मुक्त होने के बाद उन्होंने हिंदी विवेक के प्रतिनिधि के रूप में सक्रिय होकर कार्य करना शुरू किया और अंत तक जुड़े रहे।
ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दिवंगत आत्मा को शांति और सद्गति प्रदान करें।
हिंदी विवेक परिवार की ओर से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

विनम्र श्रद्धांजलि 👏👏👏👏