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आत्मनिर्भरता के संकल्प से विश्वगुरु बनेगा भारत

आत्मनिर्भरता के संकल्प से विश्वगुरु बनेगा भारत

by हिंदी विवेक
in देश-विदेश
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आत्मनिर्भर भारत केवल आर्थिक स्वावलम्बन का संकल्प नहीं बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास का जागरण है। जब देश अपने संसाधनों, कौशल और तकनीक पर विश्वास करता है, तभी वह सशक्त राष्ट्र बनता है। जब आत्मनिर्भरता का यह मॉडल समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचेगा, तब समावेशी विकास सम्भव होगा।

कोई भी राष्ट्र शक्तिशाली तब बनता है जब वो अपने ’स्व’ के अधिष्ठान से संचालित होता है। राष्ट्र का जन-जन और उसकी समूची व्यवस्थाएं जब ’स्व’ के आधार पर सुचारू रूप से चलती हैं। हर व्यक्ति, समाज के मन में जब राष्ट्र के वैभव का संकल्प होता है तो उसकी निष्पति ’आत्मनिर्भर राष्ट्र’ के तौर पर होती है। ये आत्मनिर्भरता किसी भी राष्ट्र की वो शक्ति होती है जो राष्ट्र की उन्नति का कारक तो होती ही है, साथ ही सम्पूर्ण विश्व में देश की यश-कीर्ति का व्यापक-दूरगामी प्रभाव छोड़ती है।

ये 21 वीं सदी भारत की है और भारत युगों की गौरवशाली चेतना के साथ नए स्वरूप में फिर से उठ खड़ा हुआ है। शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, तकनीकी, विज्ञान, रक्षा, अधोसंरचना, नवाचार, कम्प्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, डिजिटल सम्प्रभुता, साइबर सुरक्षा, कृषि आदि समस्त क्षेत्रों में नई गति और प्रगति देखने को मिल रही है। ये इसलिए सम्भव हो पा रहा है क्योंकि राष्ट्र में स्वदेशी और नवाचारों को व्यापक प्रसार मिल रहा है।

India Unleashed: Charting A Multi-Decadal Growth Story

केंद्रीय और राज्यों के बजट में भारत को सशक्त करने की दिशा में राशि का आवंटन हो रहा है। नई सम्भावनाओं के क्षेत्र खोजे जा रहे हैं। रक्षा, अनुसंधान के क्षेत्र में सेनाओं को आधुनिक तकनीकों, आयुध सामग्रियों से सुसज्जित किया जा रहा है। इसरो, डीआरडीओ जैसे संस्थान निरंतर नई खोज, नए मिशन और रक्षा सामग्री उत्पादन के क्षेत्र में अग्रगण्य भूमिका में हैं।

भारत नए समय में आवश्यक रक्षा सामग्री के आयात के साथ-साथ अब निर्यात के क्षेत्र में भी आगे है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 23,622 करोड़ तक पहुंच गया है।

आज भारत के हथियारों, तकनीकी की विश्व स्तर पर स्वीकार्यता बढ़ी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय उच्च तकनीकी और हथियारों का दुनिया ने लोहा माना है। नए दौर में ’मिशन सुदर्शन चक्र’ जैसी नीतियां रक्षा क्षेत्र में भारत को सशक्त करने वाली हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के स्त्रोतों और वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।

आत्मनिर्भर भारत अभियान, स्टार्टअप इंडिया सहित उद्यमों और एमएसएमई सेक्टर की प्रगति ने भारत को आर्थिक तौर पर समृद्ध करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 2016 में स्टार्टअप इंडिया की शुरूआत के समय 500 स्टार्टअप थे, पर अब मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या 2 लाख से अधिक पहुंच गई है। इनमें 125 से अधिक यूनिकॉर्न के तौर पर अपनी पहचान बना चुके हैं।

India offers growth and stability amid global tariff risks: RBI Governor -  IndBiz | Economic Diplomacy Division | IndBiz | Economic Diplomacy Division

अंतरिक्ष में निरंतर खोज, उपग्रह प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष मिशन गगनयान, चंद्रयान जैसे मिशन हों। कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा हो, नए सैटेलाइट की लॉन्चिंग हो, खेल के क्षेत्र में भारत का बढ़ता अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व हो। ग्लोबल ट्रेड और ग्लोबल मार्केट में भारत की बढ़ती धाक और साख हो। वैश्विक शक्ति के तौर पर भारत का नया उभार।

साइबर सुरक्षा, डिजिटल मार्केट, डिजिटल बैंकिंग, यूपीआई और भारतीय मुद्रा में कई देशों के साथ लेन-देन के अनुबंधों की नई पहल हो। विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग, प्रवासी भारतीयों का मल्टीनेशनल कम्पनियों में प्रभावी नेतृत्व एक विकसित भारत की दिशा में अनुकूलन का वातावरण निर्मित कर रहा है। ये सब आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मील के पत्थर सिद्ध हो रहे हैं और आगे के समय में इनका दूरगामी वैश्विक प्रभाव होगा।

भारत लगभग समस्त क्षेत्रों में विश्व की महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। दुनिया भर में भारत को लेकर अब नए ढंग का वातावरण निर्मित हो रहा है, व्यापक स्वीकार्यता हो रही है। भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति एक बड़ा आकर्षण दुनिया भर में देखने को मिल रहा है। ये सभी संकेत भारत के मूल स्वरूप को प्रकट कर रहे हैं, परंतु इन सबके केंद्र में है भारत का ‘भारत’ होना अर्थात् ’स्व’ के बोध के साथ अपनी नीतियों का क्रियान्वयन और जनसमूह की सक्रिय भागीदारी का ये सुफल है। इन बातों से स्पष्ट है भारत का आत्मनिर्भर होना।

स्वदेशी को अपनाना राष्ट्र के सर्वांगीण विकास और विश्व समुदाय के समक्ष अपना गौरव स्थापित करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। वास्तव में ’आत्मनिर्भरता’ और ’स्वदेशी’ कोई नारे बस नहीं हैं बल्कि ये भारत के जन-जन का संकल्प है।

इसी संकल्प में ही विकसित भारत की कुंजी है और इसे साकार करने में भारत के प्रत्येक व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि कोई भी बड़ा परिवर्तन केवल सरकारों के भरोसे नहीं होता है बल्कि समाज की शक्ति जब जागृत होती है, ’स्व’ का जयघोष करती है तब सचेत होकर सरकारें उत्कृष्ट नीतियां बनाती हैं, उसका क्रियान्वयन सुनिश्चित करती हैं, परंतु उसे सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी-समाज ही बनाता है।

हालांकि अब स्थितियां बदली हैं। गुलामी और औपनिवेशिक मानसिकता के आवरण से भारत निकल रहा है। भारत अपनी नव चैतन्यता के साथ सम्पूर्ण क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। नवोन्मेषी दृष्टि के साथ बढ़ता हुआ भारत विश्व बंधु के तौर पर दुनिया के समक्ष है।

भारत का बढ़ना वसुधैव कुटुम्बकम् और हर पूजा के बाद ’विश्व का कल्याण हो’ इस जयघोष का चरितार्थ होना है। ये बात सारी दुनिया जानती है कि भारत की शक्ति और सामर्थ्य का बढ़ना विश्व को अपने तरीके से संचालित करना नहीं है अपितु विश्व को भारत के श्रेष्ठ सांस्कृतिक हिंदू चिंतन और जीवन दृष्टि का आदर्श सौंपना है। वो आदर्श है ’परहित सरिस धरम नहिं भाई, परपीड़ा सम नहिं अधमाई’।

स्वदेशी को अपनाते हुए राष्ट्र आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में निरंतर नए आयाम स्थापित कर रहा है, पर वर्तमान वैश्विक परिदृश्यों को देखते हुए रक्षा, शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान-तकनीकी, एआई, इंटरनेट और स्वदेशी हथियार, युद्ध तकनीकी, नवाचार, स्टार्टअप, इंटरनेट युद्ध, देश का अपना वैश्विक व्यापार मॉडल और सांस्कृतिक समन्वय में द्रुत गति से काम किए जाने की महती आवश्यकता है।

इसके साथ ही पब्लिक कम्युनिकेशन के लिए भारत के अपने सूचना और संचार तंत्र विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा। भारत के अपने वैकल्पिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को डेवलप करने और उसकी स्वीकार्यता, साइबर सुरक्षा, बौद्धिक सम्पदा (पेटेंट) जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी गम्भीरतापूर्वक विचार करने की आवश्यकता है।

इन समस्त कार्यों में युवाओं की भूमिका किसी से कम नहीं है। राष्ट्र का युवा जहां भी है जिस भूमिका में है, उसे उन-उन स्थानों से ’स्वदेशी’ को अपनाने और जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

युवा पीढ़ी निरंतर नवाचारों के साथ अनुसंधान करे। हर युवा अपने को भारत के ग्लोबल ब्रांड एम्बेसडर के तौर पर देखे। उस अनुरूप ऐसे प्रामाणिक कार्यों को मूर्तरूप दे, जो न केवल राष्ट्र के जनजीवन को आसान बनाए बल्कि सम्पूर्ण विश्व के समक्ष अपना आदर्श भी प्रकट करे। भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प जब जन-जन तक पहुंचेगा।

एक व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के तौर पर जब हम अपनी महत्वपूर्ण भूमिकाओं को समझेंगे तो निश्चय ही विकसित भारत 2047 का संकल्प भी साकार होगा। साथ ही नया भारत अपनी नई कहानी के साथ समूचे विश्व के श्रेष्ठ नेतृत्वकर्ता के तौर पर भी पुनर्प्रतिष्ठित होगा।

–कृष्णमुरारी त्रिपाठी ‘अटल’

 

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