| ईरान के पास (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य या लाल सागर के पास) से गुजरने वाली केबल्स वैश्विक इंटरनेट के लिए ‘लाइफलाइन’ हैं। यदि ये कटती हैं, तो दुनिया को “डिजिटल ब्लैकआउट” तो नहीं, लेकिन “डिजिटल स्लोडाउन” का सामना करना पड़ेगा। |
ईरान ने धमकी दी है कि वह समुद्र में पड़ी इंटरनेट केबिल काट देगा। अगर ईरान (या कोई भी देश) समुद्र के नीचे बिछी प्रमुख इंटरनेट केबल्स (Undersea Fiber-optic Cables) को काट देता है, तो दुनिया के पास तुरंत वैकल्पिक रास्ते खोजने के लिए कुछ ही विकल्प बचेंगे। यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक का लगभग 95% से 99% इन्हीं केबल्स के जरिए चलता है।
यहाँ संभावित विकल्प और उनके प्रभाव दिए गए हैं:
- सैटेलाइट इंटरनेट (Satellite Internet)
जैसा कि हमने Starlink के बारे में चर्चा की, सैटेलाइट नेटवर्क ही सबसे बड़ा “प्लान-बी” है।
स्टारलिंक और कुइपर (Starlink & Amazon Kuiper): चूँकि ये अंतरिक्ष में होते हैं, इन्हें जमीन या समुद्र की केबल काटने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
सीमाएँ: वर्तमान में सैटेलाइट इंटरनेट पूरी दुनिया का डेटा लोड (हजारों टेराबाइट्स प्रति सेकंड) संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है। यह महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं, सेना और आपातकालीन संचार के लिए तो काम कर सकता है, लेकिन पूरी आबादी के लिए इसे इस्तेमाल करना फिलहाल मुश्किल होगा।
- डेटा री-रूटिंग (Data Re-routing)
इंटरनेट एक जाल (Mesh) की तरह काम करता है। अगर मिडिल ईस्ट (ईरान के पास) की केबल्स कटती हैं, तो इंटरनेट कंपनियां ट्रैफिक को दूसरे रास्तों पर मोड़ देंगी।
पैसिफिक रूट: एशिया से अमेरिका की ओर जाने वाला ट्रैफिक प्रशांत महासागर के रास्ते भेजा जा सकता है।
अटलांटिक रूट: यूरोप और अमेरिका के बीच की केबल्स का इस्तेमाल बढ़ जाएगा।
परिणाम: इससे इंटरनेट पूरी तरह बंद तो नहीं होगा, लेकिन इंटरनेट की स्पीड बहुत कम हो जाएगी और ‘पिंग’ (Latency) बहुत बढ़ जाएगी।
- स्थलीय केबल्स (Terrestrial Cables)
समुद्र के अलावा जमीन के भीतर भी देशों के बीच केबल्स बिछी होती हैं।
सिल्क रोड रूट: चीन से मध्य एशिया और रूस के रास्ते यूरोप तक जाने वाली जमीनी केबल्स का इस्तेमाल वैकल्पिक बैकअप के तौर पर किया जा सकता है। हालांकि, ये समुद्री केबल्स की तुलना में कम क्षमता वाली होती हैं।
स्थानीय कैशिंग (Local Caching & CDNs)
गूगल, फेसबुक और नेटफ्लिक्स जैसी कंपनियों के पास हर बड़े देश में अपने Local Data Centers होते हैं।
अगर ग्लोबल केबल कट जाती है, तो भी देश के भीतर मौजूद डेटा (जो पहले से वहां स्टोर है) एक्सेस किया जा सकेगा। लेकिन नई जानकारी या बाहरी देशों से संपर्क करना असंभव हो जाएगा।
निष्कर्ष
ईरान के पास (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य या लाल सागर के पास) से गुजरने वाली केबल्स वैश्विक इंटरनेट के लिए ‘लाइफलाइन’ हैं। यदि ये कटती हैं, तो दुनिया को “डिजिटल ब्लैकआउट” तो नहीं, लेकिन “डिजिटल स्लोडाउन” का सामना करना पड़ेगा।
अर्थात एलन मस्क के लिए आपदा में अवसर उपलब्ध हो जाएगा। अभी कई देशों ने एलन मस्क की स्टार लिंक सर्विस को स्वीकृति नहीं दी। यदि इंटरनेट केबिल काट दी गई तो स्टार लिंक की मांग बढ़ जायेगी और एलन मस्क को फायदा होगा।
