महर्षि व्यास, महर्षिं वाल्मीकि और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के कार्यों से भारतीय समाज की पहचान मजबूत हुई है। इन तीनों लोगों के विचारों ने समाज के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास को एक नई दिशा दी है। उक्त बातें पद्मश्री रमेश पतंगे ने रामभाऊ म्हाळगी प्रबोधिनी, दादर (पूर्व) स्थित ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संवैधानिक चिंतन’ पुस्तक के विमोचन व के. राजाभाऊ नेने स्मृति पुरस्कार समारोह में कहीं।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार व राष्ट्रीय मुस्लीम मंच के संयोजक विराग पाचपोर व विश्व संवाद केंद्र की संपादक अंजली तागडे को ‘के. राजाभाऊ नेने स्मृति पुरस्कार’ राष्ट्रीय स्व. संघके क्षेत्र प्रचार प्रमुख प्रमोद बापट के हाथों प्रदान किया गया।
उक्त समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में नगरसेवक प्रतीक कर्पे और मुंबई विद्यापीठ आजीवन शिक्षण व विस्तार विभाग के संचालक प्राचार्य डॉ. बळीराम गायकवाड उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन दिलीप करंबेळकर (प्रबंध संपादक, सा. ‘विवेक’) और रवींद्र गोळे (संपादक, ‘विवेक पुस्तक प्रकाशन’) ने किया।

पद्मश्री रमेश पतंगे ने अपने भाषण में संविधान निर्माण कार्य के सम्बंध में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिए गए उदाहरण का उल्लेख किया और बताया कि भारतीय समाज की आवश्यकताओं के अनुसार विविध समय व कालखंड में महान व्यक्तित्यों ने हमारी मार्गदर्शन किया।
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‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की संवैधानिक चिंतन’ पुस्तक सहज और सरल भाषा में लिखी गई है ताकि आंदोलन, विचारधारा आदि को आम पाठक आसानी से मूल उद्धेश्यों को समझ सकें। विदित हो कि संविधान विषय पर यह उनकी दसवीं पुस्तक है। इस दौरान उन्होंने कहा कि संविधान में निहित स्वतंत्रता और अधिकारों के सार को समझने के लिए चिंतन की प्रक्रिया निरंतर जारी रहनी चाहिए।

उक्त पुस्तक का विमोचन राष्ट्रीय स्व. संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख प्रमोद बापट ने किया। प्राचार्य डॉ. बळीराम गायकवाड ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि यह पुस्तक डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की 135वीं जंयती की पूर्व संध्या पर पाठकों के लिए उपलब्ध है।
नगरसेवक प्रतीक कर्पे ने पद्मश्री रमेश पतंगे के उक्त पुस्तक को एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया है जो आज के प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमता के युग में भ्रामक कथनों का जवाब देता है।

कार्यक्रम के प्रस्तावना में रवींद्र गोळे ने कहा कि साप्ताहिक ‘विवेक’ की भूमिका राष्ट्रीय विचारों का प्रसार करना है। इन्होंने स्पष्ट किया कि इसी भूमिका के अनुरुप ‘राजाभाऊ नेने स्मृति पुरस्कार’ उन लोगों को दिया जाता है जो लोग इसमें योगदान देते हैं।
राजाभाऊ नेने ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी समाज में संघ की विचारधारा का प्रसार करने के लिए काम किया है। उक्त पुरस्कार सत्य के संदेश को प्रसारित करने में उनके व्यापक कार्य को उजागर करता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक प्रमोद बापट ने कहा कि यह पुरस्कार समाज में संघ की विचारधारा और सत्य के प्रसार में उनके व्यापक कार्य को दर्शाता है। कार्यक्रम का सूत्रसंचालन बागेश्री पारनेरकर और साप्ताहिक ‘विवेक’ संपादिका अश्विनी मयेकर ने आभार व्यक्त किया।

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