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ट्रंप यानी अस्थिर माइंडसेट

ट्रंप यानी अस्थिर माइंडसेट

by हिंदी विवेक
in राजनीति
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अमेरिकी राजनीति में डोनाल्ड ट्रम्प का नाम हमेशा से तीखे बयानों, विवादित नीतियों और बदलते रुख के साथ जुड़ा रहा है। हाल ही में भारत और चीन को “हेल होल” यानी “नरक का द्वार” कहने वाली टिप्पणी इसी पैटर्न का एक और उदाहरण है। इस तरह के बयान निश्चित ही एक व्यापक राजनीतिक रणनीति, मानसिकता और सत्ता-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।

सबसे पहले, ट्रम्प की हालिया टिप्पणी को देखें। उन्होंने सोशल मीडिया पर जो पत्र पोस्ट किया है उसमें जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) की आलोचना की है। उनका आरोप यह है कि भारतीय और चीनी प्रवासी अमेरिका में बच्चों को जन्म देकर नागरिकता हासिल करते हैं और फिर पूरे परिवार को बुला लेते हैं। उनका यह दावा वस्तुतः आंशिक रूप से उस व्यवस्था पर आधारित है जिसे “ब्रिटिश सिटीजनशिप” कहा जाता है, जोकि अमेरिकी संविधान के फौर्टीन्थअमेंडमेंट के तहत लागू है।

क्या 1865-1877 के पुनर्निर्माण काल ​​के दौरान अश्वेत अमेरिकियों के जीवन  स्तर में सुधार हुआ? – खंबाय के शब्द, शब्द, शब्द

ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो 1868 में लागू इस संशोधन का मूल उद्देश्य अमेरिका में गुलामी झेल चुके अश्वेत लोगों को नागरिकता देना था, किंतु समय के साथ इसकी व्याख्या व्यापक हो गई और अब अमेरिका में जन्म लेने वाला हर बच्चा नागरिक माना जाता है, चाहे उसके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो। इन दिनों ट्रम्प इसी व्यवस्था को बदलने की कोशिश करते रहे हैं। 20 जनवरी 2025 को शपथ लेने के बाद उन्होंने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर कर इस अधिकार को सीमित करने का प्रयास भी किया, जिसे बाद में अदालतों में चुनौती मिली।

 

ट्रम्प के बयान का दूसरा पहलू कैलिफोर्निया के टेक सेक्टर से जुड़ा है। उन्होंने दावा किया कि वहां भारतीय और चीनी पेशेवरों का “दबदबा” है और इससे स्थानीय लोगों के अवसर कम हो रहे हैं, जबकि इसके पीछे की सच्चाई कुछ ओर है। इस दावे के पीछे की जटिल वास्तविकता यह है कि सिलिकॉन वैली और अन्य टेक हब में भारतीय और चीनी मूल के पेशेवरों की बड़ी संख्या इस वजह से है, क्योंकि वे उच्च शिक्षा, तकनीकी कौशल और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के जरिए इन क्षेत्रों में पहुंचे हैं। कई रिपोर्ट्स एवं स्टडी आज इस संदर्भ में यह दिखाती हैं कि भारतीय मूल के लोग अमेरिका में सबसे अधिक शिक्षित और उच्च आय वाले प्रवासी समूहों में से एक हैं।

ट्रम्प का यह तर्क कि भर्ती प्रक्रिया “निष्पक्ष नहीं” है, एक राजनीतिक बयान ज्यादा लगता है, न कि तथ्यात्मक निष्कर्ष, क्योंकि अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां योग्यता, अनुभव और नवाचार के आधार पर भर्ती करती हैं। अगर किसी समुदाय का प्रतिनिधित्व ज्यादा है तो उसका कारण निश्चित ही अक्सर उनकी शैक्षणिक और पेशेवर उपलब्धियां होती हैं, न कि कोई साजिश या पक्षपात।

American Civil Liberties Union | The ACLU dares to create a more perfect  union — beyond one person, party, or side. Our mission is to realize this  promise of the United States

इसके साथ ही ट्रम्प ने अपने पत्र में American Civil Liberties Union (एसीएलयू) पर भी हमला किया और उसे अवैध प्रवासियों का समर्थन करने वाला संगठन बताया। उन्होंने यहां तक कहा कि इस संगठन पर कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। सीधे तौर पर देखा जाए तो यह बयान अमेरिकी लोकतंत्र के उस मूल सिद्धांत के खिलाफ जाता है, जिसमें नागरिक अधिकार संगठनों को स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति होती है।

अब सवाल यह उठता है कि ट्रम्प बार-बार ऐसे बयान क्यों देते हैं? इसका जवाब उनकी राजनीतिक रणनीति में छिपा है। ट्रम्प की राजनीति “हम बनाम वे” (अस वर्सेस देम) के सिद्धांत पर आधारित है। वे अक्सर प्रवासियों, विदेशी देशों या अल्पसंख्यकों को एक “खतरे” के रूप में प्रस्तुत करते हैं, ताकि अपने समर्थकों को एकजुट कर सकें। यह रणनीति नई नहीं है, इससे पहले वर्ष 2016 के चुनाव अभियान में भी उन्होंने मैक्सिको और मुस्लिम देशों को लेकर इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल किया था।
भारत के संदर्भ में ट्रम्प का रवैया खास तौर पर दिलचस्प इसलिए भी है, क्योंकि एक तरफ वे भारत को एक रणनीतिक साझेदार बताते हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसे बयान देते हैं जो भारत की छवि को नकारात्मक रूप में पेश करते हैं।

India denounces ‘hellhole’ remark shared by Trump

उदाहरण के लिए, अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने भारत के साथ रक्षा और व्यापारिक संबंध मजबूत किए, लेकिन साथ ही भारत को “टैरिफ किंग” कहकर आलोचना भी की। यह दोहरा रवैया इस बात का संकेत है कि ट्रम्प के लिए विदेश नीति कोई स्थायी सिद्धांत नहीं, बल्कि एक “डील” है, जहां हर देश का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाता है कि वह अमेरिका के तत्काल हितों को कितना फायदा पहुंचाता है। अगर भारत किसी मुद्दे पर अमेरिका के साथ खड़ा है, तो वह “दोस्त” है; अगर नहीं, तो वही देश “समस्या” बन जाता है।
यहां ट्रम्प का अदालतों और कानूनी संस्थाओं पर अविश्वास भी उनकी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि इस मुद्दे का फैसला अदालतों या वकीलों नहीं करेंगे, निर्णय देशव्यापी वोटिंग से होना चाहिए। यह लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक खतरनाक संकेत है, क्योंकि अमेरिका जैसे देश में संविधान और न्यायपालिका को सर्वोच्च माना जाता है।

इसके अलावा, ट्रम्प ने प्रवासियों पर वेलफेयर सिस्टम का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है, जबकि कई शोध यह दिखाते हैं कि प्रवासी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वे टैक्स देते हैं, नए व्यवसाय शुरू करते हैं और रोजगार पैदा करते हैं। भारतीय-अमेरिकी समुदाय विशेष रूप से यहाँ डॉक्टर, इंजीनियर और उद्यमी के रूप में जाना जाता है।

वस्‍तुत: आज ट्रम्प द्वारा भारत को “नरक का द्वार” कहने पर हर भारत वासी की प्रतिक्रिया यही है कि यह उनके लिए सिर्फ एक अपमानजनक टिप्पणी तक सीमित न होकर उस व्यापक सोच का हिस्सा है जिसमें वे वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के देशों को समस्याओं के स्रोत के रूप में वे देखते हैं। यह नजरिया तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि भारत-अमेरिका के कूटनीतिक संबंधों को लेकर भी हानिकारक है।

अंततः समझ यही आता है कि ट्रम्प का यह “सनकी और नफरती माइंडसेट” एक व्यक्ति की निजी सोच से ज्यादा, एक राजनीतिक उपकरण है। वे जानते हैं कि ऐसे बयान मीडिया में सुर्खियां बनाते हैं, उनके समर्थकों को उत्साहित करते हैं और विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में डालते हैं।

इस स्‍थ‍िति में भारत जैसे देश के लिए यह समझना जरूरी हो जाता है कि ट्रम्प जैसे नेताओं के बयान अमेरिका की कोई स्थायी नीति नहीं हैं, इसलिए किसी एक बयान के आधार पर संबंधों को परिभाषित करना सही नहीं होगा।

भारत-अमेरिका संबंध एक व्यापक और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं, जोकि किसी एक नेता की सोच से कहीं अधिक गहरी है, किंतु इसके साथ कहना यह भी होगा कि ट्रम्प के इस दृष्टिकोण को उचित स्‍थान पर सख्‍त जवाब जरूर भारत और भारतवासियों द्वारा दिया जाना चाहिए, क्‍योंकि उनका ये बयान भारत-चीन समेत वैश्विक सहयोग और आपसी सम्मान की भावना के खिलाफ भी जाता है।

– डॉ. मयंक चतुर्वेदी

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Tags: #TruthExposed #BigStatement #ShockingNews #MustWatch #RealityCheck #ViralNews #Explained #DeepAnalysis

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