पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार एक नई हलचल है। विधानसभा चुनावों के समापन के बाद आए अधिकांश एक्जिट पोल के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से कड़ी टक्कर के साथ आगे बताया जा रहा है। ये रुझान बंगाल के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाने के लिए काफी हैं, क्योंकि यह दशकों से चली आ रही वाम-तृणमूल की सियासत में संभावित बदलाव का संकेत देते हैं।
एक्जिट पोल के अनुसार, भाजपा को 180 से 200 सीटों के बीच का आंकड़ा पार करने का अनुमान है, जबकि टीएमसी को 100 से 130 सीटों तक सीमित किये जाने की संभावना जताई जा रही है। वाम-गठबंधन के हाथ मुश्किल से 30-40 सीटें आ रही हैं। यदि ये रुझान 4 मई को आने वाले अंतिम परिणामों में सही साबित होते हैं, तो बंगाल की सत्ता में पहली बार बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा।

भाजपा की इस संभावित बढ़त के पीछे कई कारक हैं। पहला, दीर्घकालिक असंतोष- राज्य में लंबे समय से करीब 30% जनसंख्या मुस्लिम और बाकी हिंदू-अन्य समुदायों के बीच ध्रुवीकरण की आशंका बनी हुई थी। भाजपा ने इस दफा ‘जय श्री राम’ से लेकर ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों’ और ‘परिवारवाद’ के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। दूसरा, नेतृत्व का दमदार चेहरा- प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बंगाल प्रभारी सुकांत मजुमदार के आक्रामक अभियान ने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत किया। तीसरा, पिछड़े और दलित वर्गों का जुड़ाव- भाजपा ने मतुआ, राजबंशी और आदिवासी समुदायों के बीच सामाजिक स्नेह बटोरने में सफलता पाई।
हालाँकि, केवल एक्जिट पोल के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। बंगाल में अक्सर एक्जिट पोल चूकते रहे हैं। 2016 और 2019 में भी एक्जिट पोल ने भाजपा को अधिक सीटें दी थीं, लेकिन टीएमसी ने बाजी मार ली थी। ममता बनर्जी की ‘दीदी’ की छवि, उनक सामाजिक योजनाओं (दीदी का योजना, स्वास्थ्य साथी आदि) और जमीनी स्तर पर टीएमसी की मजबूत पकड़ को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

टीएमसी का तर्क है कि एक्जिट पोल पक्षपातपूर्ण हैं और भाजपा के स्वामित्व वाले मीडिया हाउसों द्वारा करवाए गए हैं। उनका दावा है कि अंतिम परिणामों में टीएमसी 200 से अधिक सीटों के साथ सरकार बनाएगी। दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि जनता ने बदलाव का मूड बना लिया है और पिछले 10 सालों से चली आ रही टीएमसी सरकार से ऊब चुकी है।
इन एक्जिट पोल के सच होते ही बंगाल में सियासी समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा। एक ओर जहाँ भाजपा के जीतने पर केन्द्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ताकत बढ़ेगी और बंगाल में ‘दो-दल’ प्रणाली विकसित होगी, वहीं टीएमसी की सरकार बनी तो वह बिना वाम-समर्थन के अकेले सत्ता में लौटेगी।
निष्कर्षतः, एक्जिट पोल के रुझान उत्साहजनक हैं, लेकिन निर्णायक नहीं। 4 मई का दिन ही तय करेगा कि क्या बंगाल की जनता ने भाजपा की ‘असीम बढ़त’ पर मुहर लगाई या ‘दीदी’ ने एक बार फिर सबको चौंका दिया। फिलहाल, सबकी निगाहें ईवीएम पर टिकी हैं।
– मुकेश गुप्ता
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