सोशल मीडिया के बंद कमरों में बैठकर जो लोग खुद को ‘कोकरोच’, ‘खटमल’ या ‘दीमक’ जैसे गटरछाप अजीबोगरीब और अराजक नामों के पीछे छिपा रहे हैं, उनका मकसद युवाओं का भला करना नहीं, बल्कि उनके भविष्य की बलि चढ़ाना है.
ये शातिर दिमाग देश विरोधी ताकतें युवाओं को रोज़गार, महंगाई और आर्थिक समस्याओं के नाम पर एक खतरनाक टूलकिट में तब्दील कर रहे हैं, लेकिन बड़ी चालाकी से उस कड़वे सच को छुपा ले रहे हैं जिसकी वजह से ये समस्या पैदा हो रही है.
क्योंकि असली समस्या देश की बढ़ती हुई जनसंख्या है जहां सरकार जब तक 2 करोड़ लोगों को घर बनाकर देती है तब तक 10 करोड़ लोग बेघर पैदा हो जाते हैं और ज़ब तक 2 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है तब तक 10 करोड़ बेरोजगार पैदा हो जाते हैं. भारत में पानी दुनिया का सिर्फ 4% है और जनसंख्या दुनिया की लगभग 18% से 20% है, जबकि जमीन दुनिया की महज 2.4% है और उस पर जनसंख्या का यह असीमित बोझ है.
zजहां हमसे तीन गुना बड़ा चीन प्रतिवर्ष अपने कड़े नियमों के कारण बहुत कम बच्चे पैदा कर रहा है, वहीं भारत में हर साल करोड़ों की संख्या में आबादी बढ़ रही है तो क्या कभी इसके लिए जनसंख्या नियंत्रण का कठोर और सख्त कानून बनवाने के लिए कभी यह कॉकरोच और खटमल गैंग आंदोलन करेगा?
बिल्कुल नहीं करेगा क्योंकि ऐसा करते ही उनके आकाओं का तुष्टिकरण और वोट बैंक खतरे में आ जाएगा, जबकि मूल कारण यही है, क्या ये गैंग कभी इसके लिये आंदोलन करेगा कि भारत में दो से ज्यादा बच्चा पैदा करने वालों पर नागरिकता रद्द करने, 20 साल की सजा और 100% प्रॉपर्टी जब्त का कानून बने?

ये ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि इनका मकसद भारत की समस्या सुलझाना नहीं है बल्कि विदेशी शक्तियों के हाथों में भारत की सत्ता को सौंपना है और इस समस्या का दूसरा सबसे बड़ा कारण है भारत में अवैध तरीके से रहने वाले घुसपैठिए जो हमारे देश के युवाओं के हक की शिक्षा, रोजगार, पानी, बिजली और राशन मुफ्त में खा रहे हैं और देश के खिलाफ ही अराजकता फैला रहे हैं.
क्या पूरे देश के अंदर से घुसपैठियों को भगाने के लिए यह गैंग आंदोलन करेगा, कभी नहीं करेगा क्योंकि वह उनके आकाओं का पक्का वोट बैंक है, जबकि अवैध घुसपैठियों के लिए कड़ा ऐलान किया जाना चाहिए कि या तो भारत छोड़कर चले जाओ, नहीं तो कड़ी सजा भुगतो.
अगर सभी घुसपैठिये भाग जाएं तो देश के वास्तविक गरीब युवाओं को वह सुख-सुविधाएं मिलेंगी जो ये घुसपैठिए मुफ्तखोरी में हड़प रहे हैं, लेकिन यहाँ पर उल्टा हो रहा है क्योंकि यह जितने भी गैंग के लोग हैं जब भी इन घुसपैठियों पर सरकार कार्रवाई करती है तो ये अचानक नैतिकता और मानवाधिकार का रोना रोते हैं और जनसंख्या नियंत्रण को एक विशेष वर्ग के खिलाफ बताने का षड्यंत्र करते हैं, जबकि यह किसी मजहब की नहीं बल्कि पूरे देश की और युवाओं के रोजगार की सबसे बड़ी समस्या है.
जो भी गैंग मूल मुद्दों से हटकर सिर्फ महंगाई और बेरोजगारी की बात कर रहा हो, उसका असली मकसद देश के अंदर रहने वाली उस राष्ट्रवादी सरकार पर हमला करना है जो कि इस समय इन मूल समस्याओं पर कानून लाने की बखूबी से तैयारी में है और असम, उत्तर प्रदेश, बंगाल, उत्तराखंड जैसे राज्यों में इसकी मजबूत शुरुआत भी हो गई है और धीरे-धीरे पूरे देश में इसी की तैयारी हो रही है, इसलिए यह विदेशी फंडेड लोग बौखलाए हुए हैं.
रोज नए-नए नाम और मुद्दे ला रहे हैं. ये तथाकथित कॉकरोच पार्टी कुछ नहीं है केवल इन देशद्रोहियों का एक आखिरी छटपटाता हुआ संगठन है. इसलिए देश के युवाओं से हाथ जोड़कर निवेदन है कि इससे पहले ये बीमारी महामारी का रूप ले, पूरी तरह जागरूक और सतर्क होकर सोशल मीडिया पर सक्रिय इन देशविरोधी कीड़ों के हर झूठ और प्रोपेगैंडा को बेनकाब करके इन्हें सही ठिकाने लगा दो.
इस विदेशी टूलकिट के चक्कर में आकर सड़कों पर अराजकता फैलाकर अपने उज्जवल भविष्य को बर्बाद ना करें क्योंकि यह डिजिटल सुरमा तो गायब हो जाएंगे और भुगतना आपको पड़ेगा और ज़ब आपका राष्ट्र सुरक्षित रहेगा तभी आपका भविष्य सुरक्षित रहेगा।
– सिकंदर रावल

