| समाजसेवा और राजनीति की आड़ में संदिग्ध स्लीपर सेल की तरह जिहादी गतिविधियों में एआईएमआईएम के नेताओं के शामिल होने का अंदेशा जताया जा रहा है। देश भर में चल रहे लव जिहाद, लैंड जिहाद, कॉर्पोरेट जिहाद, सुनियोजित धर्मांतरण, इस्लामिक इकोसिस्टम, अवैध फंडिंग, आदि की जांच की जानी चाहिए। |
महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में सामने आया धर्मांतरण का मामला अब केवल कम्पनी के भीतर के दबाव या धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रह गया है। यह पूरा प्रकरण एक घातक रूप ले चुका है, जिसमें जिहादी मानसिकता, आतंकी संगठनों से सम्पर्क और राजनीतिक संरक्षण के गम्भीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। इस मामले की मुख्य आरोपी निदा खान की एआईएमआईएम पार्षद के घर से गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धर्मांतरण का यह षड्यंत्र राजनीतिक तुष्टिकरण से कितनी गहराई से जुड़ा हआ है।
पूरा प्रकरण: क्या हुआ था?
निदा खान पर नासिक स्थित टीसीएस कार्यालय में काम करने वाली हिंदू महिलाओं पर हिजाब पहनने और इस्लामी मान्यताओं का पालन करने के लिए दबाव बनाने का आरोप है। वह कथित तौर पर हिंदू महिलाओं को विदेश भेजने की फिराक में थी, जिसके लिए उसके मलेशिया में ‘इमरान’ नामक व्यक्ति से सम्पर्क थे। पुलिस ने उसे 40 दिनों तक फरार रहने के बाद एआईएमआईएम के सभासद मतीन पटेल के आवास से गिरफ्तार किया। निदा इस मामले की आठवीं आरोपी है।
आतंकी कनेक्शन: 136 संगठनों से सम्पर्क
सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब जांच एजेंसियों ने निदा खान के लैपटॉप और मोबाइल की जांच की। उसके डिवाइस से दुनियाभर के 136 कट्टरपंथी और आतंकी संगठनों से जुड़े होने के साक्ष्य मिले हैं। इसके अलावा निदा का जैश-ए-मोहम्मद की आतंकी और दिल्ली बम धमाकों की मास्टरमाइंड रही डॉ. शाहीन सईद से कई बार मिलने का भी खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार निदा के लैपटॉप पर मिले वीडियो देखकर वे भी स्तब्ध रह गए हैं।

राजनीतिक संरक्षण: एआईएमआईएम और तुष्टिकरण की राजनीति
निदा खान के मतीन पटेल के घर से गिरफ्तार किए जाने के बाद यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। महाराष्ट्र के मंत्री एवं शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता संजय शिरसाट ने एआईएमआईएम के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील पर गम्भीर आरोप लगाए हैं। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने साफ शब्दों में कहा है कि आरोपी को कानूनी जांच के दौरान संरक्षण देना देश के कानून को चुनौती देना है। उन्होंने यहां तक कहा कि यह जांच होनी चाहिए कि कहीं ओवैसी स्वयं तो इस जिहादी नेटवर्क का सरगना नहीं है।
एआईएमआईएम का संदिग्ध इतिहास
यह पहला मौका नहीं है जब एआईएमआईएम धर्मांतरण या अराजक तत्वों के बचाव में आगे आई हो। इससे पहले उत्तर प्रदेश के छांगुर प्रकरण में भी इस पार्टी ने लम्बे समय तक आरोपियों का बचाने का प्रयास किया था। चाहे थूक जिहाद का मामला हो या रोजा-इफ्तार के नाम पर गंगा नदी में जूठी हड्डियां फेंकने का मामला, एआईएमआईएम हर बार उन्हीं अराजक तत्वों के साथ खड़ी दिखाई पड़ी है। समाज सेवा की आड़ में इस्लामिक इको सिस्टम द्वारा अवैध फंडिंग के जरिए ऐसी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। निदा खान का मामला भारत में ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ और सुनियोजित धर्मांतरण की एक बड़े षड्यंत्र की पोल खोलकर रख रहा है।

यह मामला बताता है कि कैसे हिंदू बेटियों को लव जिहाद के माध्यम से धर्मांतरित करने का प्रयास किया जा रहा हैं और इन गतिविधियों को मुस्लिम तुष्टिकरण में लिप्त राजनीतिक दलों का संरक्षण प्राप्त है। इस मामले में अब तक जो खुलासे हुए हैं, वे राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यधिक गम्भीर हैं। सरकार और जांच एजेंसियों को चाहिए कि वे इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच करें, फंडिंग के स्रोतों का पता लगाएं, और यह पुख्ता करें कि इस पूरे स्लीपर सेल के पीछे और कौन-कौन सी ताकतें काम कर रही हैं।

कहा जाता है कि एआईएमआईएम के स्थानीय स्तर तक के नेता समाजसेवा की आड़ में जिहादी गतिविधियों में लिप्त है और उनकी स्लीपर सेल जैसी संदिग्ध भूमिका को लेकर आरोप लगते रहे हैं। उनके आक्रामक व प्रभावी इकोसिस्टम से भयभित होकर स्थानीय पुलिस भी उनके विरुद्ध कार्रवाई करने से डरती है। अत: राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को ही हस्तक्षेप करना होगा, तब जाकर स्थानीय स्तर पर स्लीपर सेल का नेटवर्क टूटेगा।
यह पूरा प्रकरण बताता है कि हिंदू बेटियों का धर्मांतरण कराने वाले गिरोहों को ओवैसी जैसे नेताओं का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन प्राप्त है। इसलिए समय आ गया है कि एआईएमआईएम की इन जिहादी गतिविधियों और इसके आतंकी संगठनों से जुड़े नेटवर्क की गहन जांच की जाए। अब यह जांच का विषय है कि कहीं ओवैसी स्वयं इस पूरे स्लीपर सेल नेटवर्क के सरगना तो नहीं हैं?

शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने सही ही कहा है कि एआईएमआईएम जिहादी गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए ‘सेफ हेवन’ का काम कर रही है।
निदा खान का जैश-ए-मोहम्मद की आतंकी और दिल्ली बम धमाकों की मास्टरमाइंड डॉ. शाहीन सईद से सम्पर्क सिद्ध करता है कि यह नेटवर्क स्लीपर सेल की तरह काम कर रहा है।
समाज सेवा की आड़ में इस्लामिक इको सिस्टम द्वारा अवैध फंडिंग से चलने वाली ये गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गम्भीर संकट हैं।
मृत्युंजय दीक्षित
