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राष्ट्रवाक्-2026 में गूँजा राष्ट्र जागरण का सनातनी उद्घोष

राष्ट्रवाक्-2026 में गूँजा राष्ट्र जागरण का सनातनी उद्घोष

“संघ राष्ट्र के परमवैभव के लिए उद्भूत ‘वाक्’ है” - जे. नंदकुमार

by हिंदी विवेक
in सामाजिक
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नई दिल्ली, 7 जून। ‘राष्ट्र जागरण का सनातनी उद्घोष’ ध्येय के साथ सनातन लाइफ स्टाइल फाउंडेशन एवं प्रज्ञा प्रवाह, दिल्ली प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में दिल्ली विश्वविद्यालय के कालकाजी स्थित देशबंधु कॉलेज में ‘राष्ट्रवाक्-2026’ का भव्य आयोजन संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ वन्दे मातरम्, दीप प्रज्ज्वलन तथा अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि एवं प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार ने अपने मुख्य उद्बोधन में कहा कि “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस विराट राष्ट्र के परमवैभव के लिए उद्भूत परा, पश्यन्ती, मध्यमा और वैखरी के समस्त सामर्थ्यों को धारण करने वाला ‘वाक्’ है।” उन्होंने कहा कि संघ ने अपने 100 वर्षों की यात्रा में चरित्र निर्माण और समाज निर्माण का सतत कार्य किया है। आज भी संघ सामाजिक समरसता को सुदृढ़ बनाने तथा समाज में व्याप्त विभेदों को समाप्त करने के लिए ‘पंच परिवर्तन’ जैसे व्यापक कार्यक्रमों का संचालन कर रहा है। उन्होंने राष्ट्रजीवन में सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकात्मता को समय की आवश्यकता बताया।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. के. जी. सुरेश ने की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के जागरण और उत्थान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका अतुलनीय रही है। ‘राष्ट्रवाक्’ पत्रिका के संपादक एवं प्रख्यात भाषाविद्-लेखक कमलेश कमल के स्वागत उद्बोधन के साथ प्रारंभ हुए इस आयोजन में देशभर के शिक्षाविदों, साहित्यकारों, कलाकारों, पत्रकारों और चिंतकों ने सहभागिता की। राष्ट्र, संस्कृति, साहित्य और कला को समर्पित यह आयोजन राष्ट्रीय विमर्श का एक सशक्त मंच बनकर उभरा।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रो. प्रवीण कुमार तिवारी, राजीव रंजन प्रसाद, भगवंत अनमोल, डॉ. दिवाकर राय, राज शर्मा, प्रो. ज्योत्सना तिवारी, आशीष कुमार अंशु, श्रीमती शशिप्रभा तिवारी तथा राहुल चौधरी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर जे. नंदकुमार, प्रो. के. जी. सुरेश एवं अन्य अतिथियों द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में प्रकाशित ‘राष्ट्रवाक्’ पत्रिका के विशेषांक का विमोचन भी किया गया। संघ की ‘राष्ट्रसेवा के 100 वर्षों’ को समर्पित इस विशेषांक को अतिथियों ने राष्ट्रचिंतन और वैचारिक विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण प्रकाशन बताया।
सम्मान सत्र में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों, शिक्षाविदों और कलाकारों को सम्मानित किया गया।

पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए प्रो. के. जी. सुरेश को पंडित विद्यानिवास मिश्र स्मृति सम्मान, अभिनय के क्षेत्र में योगदान के लिए राज शर्मा को देविका रानी स्मृति कला सम्मान, डॉ. दिवाकर राय को उनके चर्चित नाटक ‘नील नायक’ के लिए जयशंकर प्रसाद स्मृति साहित्य सम्मान, भगवंत अनमोल को उनकी चर्चित कृति ‘बावनी इमली’ के लिए वैद्य गुरुदत्त स्मृति साहित्य सम्मान तथा राजीव रंजन प्रसाद एवं श्रीमती रचना नायडू को संयुक्त रूप से उनकी चर्चित पुस्तक ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ के लिए धर्मपाल स्मृति कथेतर साहित्य सम्मान प्रदान किया गया।

‘स्वतंत्रोत्तर हिन्दी साहित्य में भारतबोध’ विषयक चिंतन सत्र में पीयूष द्विवेदी एवं राजीव रंजन प्रसाद ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद रचित भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय अस्मिता और आत्मगौरव से जुड़े साहित्य को लंबे समय तक अपेक्षित महत्व नहीं मिला, किंतु अब भारतबोध और भारतीय दृष्टि पर आधारित साहित्य राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में तेजी से उभर रहा है।

इसके पश्चात आयोजित चिंतन सत्र ‘समकालीन कला में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम वैचारिक एजेंडा’ विषय पर केंद्रित रहा। इस सत्र में प्रो. प्रवीण कुमार तिवारी, श्रीमती शशिप्रभा तिवारी एवं कमलेश कमल ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि कला समाज का दर्पण होने के साथ-साथ समाज को दिशा देने का माध्यम भी है, इसलिए उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए। सत्र का संचालन राहुल चौधरी ने किया।

चिंतन सत्रों के पश्चात राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें सर्वेश तिवारी श्रीमुख, ज्ञान प्रकाश आकुल, प्रियंका राय, दास आरोही आनंद, ओम शर्मा ‘ओम’, नित्यानंद शुक्ल, ज्योतिमा शुक्ल, मोहिनी राय, रजनीश राय, निर्देश प्रजापति, प्रशांत सौरभ, सूर्यप्रकाश तथा अवनीश सहित अनेक कवियों ने राष्ट्र, संस्कृति, समाज और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया।

समापन अवसर पर सनातन लाइफ स्टाइल फाउंडेशन के संस्थापक जलज कुमार अनुपम ने कहा कि “राष्ट्रवाक् केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श का एक उभरता हुआ मंच है। हमारा लक्ष्य इसे एक नेशनल डायलॉग फोरम के रूप में विकसित करना है, जहाँ राष्ट्रहित के विषयों पर गंभीर और सकारात्मक संवाद हो सके।”
कार्यक्रम का संचालन सुश्री नम्रता वर्मा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. प्रवीण कुमार तिवारी ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन और विमर्श समाज में स्वस्थ वैचारिक वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 उल्लेखनीय है कि ‘राष्ट्रवाक्’ एक वैचारिक-सांस्कृतिक पत्रिका है, जिसका ध्येय ‘राष्ट्र जागरण का सनातनी उद्घोष’ है। यह मंच भारतीय दृष्टि, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रकेंद्रित विमर्श को व्यापक समाज तक पहुँचाने के लिए निरंतर सक्रिय है।

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