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दो शताब्दियों का अनूठा गवाह: हमारा दोस्त जोनाथन

दो शताब्दियों का अनूठा गवाह: हमारा दोस्त जोनाथन

by हिंदी विवेक
in ट्रेंडींग, देश-विदेश
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क्या आप किसी ऐसे अनोखे, जादुई और रहस्यमयी दोस्त से मिलना चाहेंगे जिसने दुनिया के बड़े-बड़े राजा-रानियों का पुराना दौर देखा हो? एक ऐसा दोस्त जिसने इंसानों को पहली बार सड़क पर दौड़ने वाली कार बनाते देखा हो, आसमान में उड़ने वाले हवाई जहाज का आविष्कार होते देखा हो और जिसने इंसानों को पहली बार चांद पर कदम रखते हुए भी सुना हो? आप सब यह सोचकर हैरान हो रहे होंगे और आपके मन में यह उत्सुकता जाग रही होगी कि भला इतना पुराना कोई इंसान आज के डिजिटल समय में जीवित कैसे हो सकता है? आपका ऐसा सोचना और चौंकना बिल्कुल स्वाभाविक है, क्योंकि हम इंसानों की उम्र तो अमूमन 70 से 80 या बहुत ज्यादा से ज्यादा 100 साल तक होती है।

लेकिन आज हम आपको किसी इंसान से नहीं, बल्कि इस धरती के एक ऐसे अद्भुत, विशालकाय और जादुई जीव से मिलाने जा रहे हैं, जो पूरे 194 साल का हो चुका है। जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना, पूरे एक सौ चौरानवे साल! इस अनोखे, प्यारे और दुनिया के सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जीव का नाम है ‘जोनाथन’। आइए, आज हम सब मिलकर जोनाथन के इस जादुई, ऐतिहासिक और रोमांचक सफर की सैर करते हैं और जानते हैं कि उसका यह सफर कितना अनोखा रहा है।

जोनाथन कोई आम कछुआ नहीं है, जिसे हम अपने आस-पास के तालाबों या नदियों में देखते हैं। वह ‘सेशेल्स जायंट कछुआ’ प्रजाति का एक बेहद विशालकाय और भारी-भरकम कछुआ है। वर्तमान समय में जोनाथन हमारे भारत से बहुत दूर, दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित एक छोटे, शांत और बेहद खूबसूरत द्वीप पर रहता है, जिसे ‘सेंट हेलेना द्वीप’ कहा जाता है। यह वही ऐतिहासिक द्वीप है जहाँ इतिहास के प्रसिद्ध फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट को अंग्रेजों ने कैद करके रखा था और जहाँ उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे।

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आज इसी ऐतिहासिक द्वीप पर जोनाथन वहां के शाही गवर्नर के आधिकारिक निवास, जिसे ‘प्लेंटेशन हाउस’ कहा जाता है, के विशाल और हरे-भरे बगीचे में एक राजकीय मेहमान की तरह ठाट-बाद से रहता है। वह न केवल उस बगीचे की, बल्कि पूरे सेंट हेलेना द्वीप की सबसे बड़ी शान और पहचान बना हुआ है। दुनिया भर से लोग इस बूढ़े और प्यारे कछुए दादाजी की एक झलक पाने के लिए तड़पते हैं।

अब आप सब सोच रहे होंगे कि जोनाथन का जन्म कब हुआ था और हमें उसकी सही उम्र का पता कैसे चला? दुनिया भर के रिकॉर्ड रखने वाली मशहूर संस्था ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ के आधिकारिक आंकड़ों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, जोनाथन का जन्म वर्ष 1832 के आसपास हुआ था। जरा अपनी कल्पना के घोड़े दौड़ाइए और सोचिए कि सन् 1832 का समय कितना पुराना और कितना अलग रहा होगा! यह वह दौर था जब हमारे देश भारत में अंग्रेजों का राज पूरी तरह फैल रहा था और दिल्ली के लाल किले में अंतिम मुगल बादशाहों का समय आने वाला था।

यह वह समय था जब दुनिया में न तो बिजली के बल्ब का आविष्कार हुआ था, न हमारे घरों में ठंडी हवा देने वाले पंखे या कूलर थे और न ही रात के अंधेरे को दूर करने के लिए स्ट्रीट लाइटें थीं। तब लोग रात में केवल दीये, मोमबत्ती या मशालों के उजाले में रहा करते थे। उस दौर में टेलीफोन, कंप्यूटर, टेलीविजन, मोबाइल, सोशल मीडिया और इंटरनेट जैसी चीजों की तो इंसानों ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी। जोनाथन ने इन दो पूरी सदियों यानी 19वीं और 20वीं शताब्दी को अपनी आँखों के सामने गुजरते देखा है। वह सचमुच समय के समंदर में तैरता हुआ हमारी धरती का एक जीवित इतिहास है।

इतिहास के पन्नों को पलटने पर पता चलता है कि जोनाथन का जन्म तो हिंद महासागर के खूबसूरत देश सेशेल्स में हुआ था, लेकिन उसे वर्ष 1882 में वहां से जलमार्ग द्वारा अटलांटिक महासागर के सेंट हेलेना द्वीप पर लाया गया था। यह जोनाथन के जीवन का एक बहुत बड़ा मोड़ था। जब उसे इस नए द्वीप पर लाया गया, तब वह कोई छोटा बच्चा या नौजवान कछुआ नहीं था, बल्कि वह पहले से ही पूरी तरह से वयस्क यानी बड़ा हो चुका था।

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कछुओं के वैज्ञानिक और वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि इस विशेष जायंट प्रजाति के कछुओं को पूरी तरह वयस्क और बड़ा होने में कम से कम 50 वर्ष का लंबा समय लगता है। इसी वैज्ञानिक आधार पर इतिहासकारों और डॉक्टरों ने उसकी उम्र का एकदम सटीक अनुमान लगाया कि जब वह 1882 में सेंट हेलेना द्वीप पर आया, तब उसकी उम्र लगभग 50 वर्ष की रही होगी। इस हिसाब से गणना की जाए, तो उसका जन्म वर्ष 1832 बैठता है। आज उस द्वीप पर रहते हुए जोनाथन को 140 से अधिक साल बीत चुके हैं, जो अपने आप में एक अविश्वसनीय रिकॉर्ड है।

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अगर हम इतिहास की किताबों को खोलकर देखें, तो जोनाथन का जीवनकाल हमें पूरी तरह अचंभित और रोमांचित कर देता है। अपने इस बेहद लंबे जीवन में उसने मानव इतिहास के कई बड़े और युगांतरकारी पड़ाव देखे हैं। जब वह युवा था, तब ब्रिटेन में रानी विक्टोरिया का ऐतिहासिक शासनकाल शुरू हुआ था और उसने उनके पूरे दौर को देखा। उसने मानव इतिहास के दो सबसे बड़े, भयानक और विनाशकारी विश्व युद्धों के समय को भी चुपचाप पार किया, जब पूरी दुनिया में उथल-पुथल मची हुई थी। जब इंसान ने विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की की और नील आर्मस्ट्रांग ने वर्ष 1969 में चांद पर पहली बार कदम रखकर इतिहास रचा, तब भी जोनाथन सेंट हेलेना के बगीचे में आराम से हरी-हरी घास चर रहा था।

चांद पर पहला कदम रखने से पहले इस युद्ध में शामिल हुए थे नील आर्मस्ट्रांग -  neil alden armstron american astronaut engineer who was the first person to  walk on the moon

उसने भाप से चलने वाले शुरुआती रेल इंजनों से लेकर आज की सुपरसोनिक बुलेट ट्रेनों, आधुनिक हवाई जहाजों, अंतरिक्ष यानों, सुपर कंप्यूटरों, स्मार्टफोन और आज के कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के डिजिटल युग तक के सफर को न सिर्फ देखा है, बल्कि महसूस किया है। दुनिया बदल गई, इंसान बदल गए, तौर-तरीके बदल गए, लेकिन जोनाथन अपनी धीमी और मस्त चाल से चलता हुआ आज भी वैसे का वैसा ही है।

इतनी लंबी उम्र होने के कारण और जीवन के लगभग दो सौ साल पूरे करने की वजह से जोनाथन के शरीर पर बढ़ती उम्र का प्राकृतिक असर तो जरूर पड़ा है। बढ़ती उम्र के कारण अब उसकी आँखों की रोशनी यानी देखने की क्षमता और किसी चीज को सूंघने की क्षमता काफी कमजोर हो गई है। वह मोतियाबिंद की बीमारी के कारण अब साफ-साफ देख नहीं पाता और सूंघकर अपना खाना नहीं ढूंढ पाता। लेकिन प्रकृति ने उसे एक और वरदान दिया है, उसकी सुनने की क्षमता यानी कान अभी भी बहुत तेज और चौकन्ने हैं।

वह अपने डॉक्टर, अपनी देखभाल करने वाले कर्मचारियों और अपने पसंदीदा इंसानों की आवाज को बहुत दूर से ही और बहुत अच्छी तरह पहचान लेता है। जैसे ही उसका केयरटेकर उसे आवाज देता है, वह अपनी लंबी गर्दन उठाकर उनकी तरफ बढ़ने लगता है। सबसे अच्छी और राहत की बात यह है कि दृष्टि कमजोर होने के बावजूद वह आज भी आंतरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ, तंदुरुस्त और चुस्त है। उसे खाने में तरह-तरह की ताजी हरी सब्जियां, रसीले खीरे, मीठे सेब, लाल गाजर, टमाटर, केले और ताजी हरी घास बेहद पसंद है। उसके बेहतर स्वास्थ्य और लंबी उम्र को बनाए रखने के लिए द्वीप के विशेषज्ञ डॉक्टर उसे नियमित रूप से विटामिन और पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार अपने हाथों से खिलाते हैं।

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जोनाथन की इस अद्भुत, बेमिसाल और ऐतिहासिक जीवन यात्रा को देखते हुए दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित संस्था ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ ने उसे आधिकारिक तौर पर दुनिया के सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जीव यानी ‘ओल्डेस्ट लिविंग लैंड एनिमल’ के रूप में दर्ज किया है। गिनीज बुक ने उसे 194 वर्ष का बुजुर्ग मानते हुए अपने सबसे प्रतिष्ठित ‘आइकन’ सम्मान से नवाजा है। आज जोनाथन केवल एक साधारण कछुआ नहीं रह गया है, बल्कि वह पूरी दुनिया के लिए पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और दीर्घायु का एक बहुत बड़ा वैश्विक प्रतीक बन चुका है। वह सेंट हेलेना द्वीप के सिक्कों और वहां के डाक टिकटों पर भी छपा हुआ है, जिससे पता चलता है कि वहां के लोग उसे कितना प्यार और सम्मान देते हैं।

इस प्रकार जोनाथन की यह कहानी हमें केवल हैरान और रोमांचित ही नहीं करती, बल्कि हमारे जीवन के लिए एक बहुत बड़ा और गहरा संदेश भी देती है। कछुए अपनी बेहद शांत जीवनशैली, अपनी धीमी गति और अटूट धैर्य के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। वे कभी किसी काम में हड़बड़ी या जल्दबाजी नहीं करते, वे बिना किसी तनाव के शांत मन से अपना जीवन जीते हैं। शायद उनके मन की यही शांति, संतोष और धैर्य ही उनकी इतनी लंबी उम्र का सबसे बड़ा राज है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमें भी अपने प्यारे दादाजी समान दोस्त ‘जोनाथन’ से धैर्यवान और शांत बनने की सीख लेनी चाहिए।

हमें समझना चाहिए कि जीवन में सफलता पाने के लिए जल्दबाजी या गुस्सा करने की जरूरत नहीं होती, बल्कि लगातार और सही दिशा में धीमे-धीमे आगे बढ़ते रहना ही सबसे जरूरी है। चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर हम शांत रहकर, मेहनत करते रहें और प्रकृति के करीब रहें, तो हम भी एक स्वस्थ, सुखी और लंबा जीवन जी सकते हैं। तो अगली बार जब भी आप किसी कछुए को देखें या उसके बारे में पढ़ें, तो हमारे इस प्यारे और ऐतिहासिक दोस्त ‘जोनाथन’ को जरूर याद करना और उसकी तरह हमेशा शांत व मस्त रहकर जीवन की राह पर आगे बढ़ते रहना।

– डॉ. दीपक कोहली

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