श्रीगुरुजी के विचारों के आधार पर हमें देश का आर्थिक विकास करना है. सरकार और निवेशकों को एकत्र आकर 21वीं सदी में वैभवशाली भारत का निर्माण करना है. इसके साथ ही मूल्य आधारित जीवनशैली के आधार पर व्यक्ति निर्माण का कार्य कर प्रगति और विकास का संतुलन यदि स्थापित करना है तो चरित्रवान नागरिकों का निर्माण भी उतना ही महत्वपूर्ण है, यह वक्तव्य केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने साप्ताहिक विवेक द्वारा प्रकाशित ‘कालजयी श्रीगुरुजी’ विशेषांक के विमोचन समारोह के दौरान दिया.

कल दि. 2 जुलाई को वडाला स्थित निको हॉल में यह कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ. इसके पूर्व नितिन गडकरी के हाथों विशेषांक का विमोचन किया गया. उनके साथ मंच पर रा. स्व. संघ परेल विभाग के संघचालक रविन्द्र सिंघवी, हिन्दुस्थान प्रकाशन संस्था के अध्यक्ष पद्मश्री रमेश पतंगे, विवेक पुस्तक प्रकाशन विभाग के सम्पादक रविंद्र गोले एवं विशेषांक के मुख्य प्रायोजक केतन वेल्हाळ और प्रताप नरसिंह मूर्ति सहित अन्य मान्यवर उपस्थित थे.

सभा को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने आगे कहा कि वर्तमान समय तक राजनीति करनेवाले अनेक नेता होते हैं, परंतु भविष्य का निर्माण कैसे हो, इसके लिए जो लोग चिंतन कर दूरगामी कार्य करते हैं, उन्हीं में से एक रा. स्व. संघ के द्वितीय प.पू. सरसंघचालक श्रीगुरुजी अग्रणी थे. उनकी दूरदृष्टि, उनका दृढ़ संकल्प और संघ को दी हुई दिशा वर्तमान आधुनिक समय में भी उतनी ही प्रासंगिक एवं मार्गदर्शक है. आज राष्ट्रीय विचारों को देशव्यापी मान्यता मिली है, उसका सम्पूर्ण श्रेय श्रीगुरुजी की विचारधारा को जाता है.
| एकात्मता केवल राजनीतिक नहीं, सांस्कृतिक होना भी महत्वपूर्ण संघ के विचारों में इंटिग्रेटेड अप्रोच (एकात्मिक दृष्टिकोण) है. इसका अर्थ एक ओर समाज की भौतिक प्रगति और विकास तो होना ही चाहिए, परंतु विकास होते समय व्यक्ति केंद्रित समाज व्यवस्था कैसे निर्माण होगी, इस पर बल दिया जाना चाहिए. आर्थिक सम्पन्नता के साथ समाज का एक-दूसरे पर विश्वास बनाए रखकर एकात्म समाज निर्माण करना भी अति आवश्यक है. इसलिए भारत की एकात्मता केवल राजनीतिक नहीं, सांस्कृतिक होना भी महत्वपूर्ण है. – नितिन गडकरी |
संघ की स्थापना के सम्बन्ध में उन्होंने आगे कहा कि भूतकाल में राष्ट्रीय चेतना के अभाव के कारण हमारा समाज विभाजित हो गया था. अंग्रेजों के इतिहास का मूल्यांकन करने पर यह स्पष्ट होता है कि प्रारम्भ में उनके पास बड़ी सेना और सामर्थ्य नहीं था. दुर्भाग्य से उस समय हमारे देश के सभी राज्य एक छत्री के नीचे एकजुट नहीं हो पाए क्योंकि हमारा समाज जातीयवाद, साम्प्रदायिकता, विषमता एवं विविध प्रकार के सामाजिक दोषों से ग्रसित था. ऐसे परिस्थिति में समाज की रचना मूल्य आधारित जीवनशैली पर हो और इसी मजबूत आधार पर राष्ट्र पुनः खड़ा हो, इस उद्देश्य से संघ की स्थापना हुई.

उन्होंने आगे कहा कि संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार और श्रीगुरुजी ने हमेशा राजनीति को सीमित महत्व दिया क्योंकि उनका मूल मिशन राष्ट्रनीति थी. राष्ट्र निर्माण के इस पवित्र कार्य में कोई भी शार्टकट नहीं हो सकता. इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने व्यक्तिगत जीवन के आचरण से इसे प्रकट करना चाहिए. राष्ट्र और समाज का मूल घटक व्यक्ति है. जब तक व्यक्तियों पर उत्तम संस्कार कर योग्य व्यक्ति निर्माण नहीं करेंगे तब तक सही अर्थों में राष्ट्र निर्माण नहीं हो सकता. डॉ. हेडगेवार के इस सिद्धांत को संघ ने सदैव आगे बढ़ाया.
इस कार्यक्रम के दौरान ही विश्राम बापट द्वारा लिखित ‘संघ शाखेची गोष्ट’ पुस्तक और 101 संघ प्रचारकों के संदर्भ में जानकारी देनेवाली ‘समिधा’ ग्रंथ का विमोचन भी किया गया. कार्यक्रम की प्रस्तावना रविन्द्र गोले ने रखी और बागेश्री पार्नेरकर ने सफल संचालन किया. वंदेमातरम् गायन के उपरांत कार्यक्रम का समापन किया गया.
| पश्चिमीकरण नहीं, आधुनिकीकरण हो वर्तमान युग में पश्चिमीकरण और आधुनिकीकरण इन दो विषयों में अंतर समझना अत्यंत आवश्यक है. हमारे समाज का पश्चिमीकरण नहीं होना चाहिए, परंतु आधुनिकीकरण निश्चित रूप से होना चाहिए. ज्ञान और तकनीक के सकारात्मक परिवर्तन को स्वीकार करना चाहिए. |
– नितिन गडकरी
