मोदी सरकार के ये 12 वर्ष केवल राजनीतिक स्थिरता के नहीं बल्कि दूरदृष्टिपूर्ण नीतियों, सशक्त राष्ट्रीय सुरक्षा और निर्णायक विदेश नीति के प्रतीक रहे हैं। वे हर चुनौती को अवसर में बदलते हुए आत्मनिर्भर भारत से विकसित भारत की ओर अग्रसर हैं।
नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लम्बे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधान मंत्री बन गए हैं। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, पंडित नेहरू का निर्वाचित प्रधान मंत्री के रूप में कार्यकाल 4398 दिनों का था। 26 मई 2014 से 10 जून 2026 तक, प्रधान मंत्री मोदी का निरंतर कार्यकाल अब 4399 दिनों का हो गया है, जिससे वे भारत के इतिहास में सबसे लम्बे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधान मंत्री बन गए हैं। उन्होंने इतिहास में पहली बार देश का नेतृत्व करने की ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की है। यह यात्रा केवल राजनीतिक स्थिरता की कहानी नहीं है बल्कि संकल्पों को सिद्धि में बदलने वाली एक परिवर्तनकारी लीडरशिप का प्रमाण है।
दूरदृष्टि और नीति-निर्णय: जन-कल्याण से राष्ट्र-प्रथम तक
मोदी सरकार के 12 वर्षों की पहचान निर्णायक और दूरगामी नीतियां रही हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के मूलमंत्र पर चलते हुए सरकार ने गरीबी उन्मूलन, डिजिटल सशक्तिकरण, आर्थिक सुधारों और बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी परिवर्तन किए। जन धन खाते, आधार और मोबाइल (जेएएम) त्रयी ने शासन में पारदर्शिता और समावेशिता लाई। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक सीधा लाभ पहुंचाया।
डिजिटल इंडिया ने भारत को टेक-सक्षम अर्थव्यवस्था में बदल दिया, जबकि स्टार्टअप इंडिया और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने भारत को वैश्विक स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित किया। जीएसटी जैसा ऐतिहासिक कर सुधार, जो दशकों से अटका था, मोदी की राजनीतिक इच्छाशक्ति के चलते वास्तविकता बना।
राष्ट्रीय सुरक्षा: ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
यदि एक क्षेत्र ऐसा है जहां मोदी का नेतृत्व सबसे अधिक प्रभावशाली रहा तो वह है राष्ट्रीय सुरक्षा। 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक हो, 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक या फिर 2020 में गलवान घाटी के बाद तेज प्रतिक्रिया- हर बार मोदी सरकार ने सशक्त उत्तर दिया। आतंकवाद के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति ने दुनिया के सामने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब सहनशीलता की नीति नहीं अपनाएगा। राफेल सौदा, एकीकृत कमान और सीमा पर सड़कों, सुरंगों और बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास, सुरक्षा चेतना के सूचक हैं।

विदेश नीति: वैश्विक नेतृत्व की ओर
मोदी की विदेश नीति ने भारत की वैश्विक छवि को बदल दिया है। ‘निकटतम प्रतिवेशी प्रथम’ से लेकर ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘वैश्विक दक्षिण की आवाज’ तक, भारत आज दुनिया में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा है। कोविड के दौरान ‘वैश्विक सहयोग’ और ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल ने भारत की मानवीय भूमिका को दिखाया। आई2यू2 (इंडिया-इजराइल-यूएई-यूएसए), क्वाड और शंघाई सहयोग संगठन में सक्रिय भूमिका और जी20 की अध्यक्षता में भारत ने वैश्विक दक्षिण का सशक्त नेतृत्व किया। विशेष रूप से 2023 में नई दिल्ली जी20 शिखर सम्मेलन में अफ्रीकी संघ को स्थाई सदस्यता दिलाना एक बड़ी राजनयिक सफलता थी।
चुनौतियों को समाधान में बदलने का सामर्थ्य
हर शासन के लिए चुनौतियां स्वाभाविक हैं, परंतु मोदी सरकार की सबसे बड़ी शक्ति संकटों को अवसरों में बदलना रही है। 2016 के नोटबंदी के निर्णय ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया और कालाधन के विरुद्ध युद्ध छेड़ा। कोविड-19 महामारी जैसे अभूतपूर्व संकट में, जहां पूरी दुनिया चरमरा गई, मोदी सरकार ने 130 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, मुफ्त टीके और एक सुव्यवस्थित स्वास्थ्य व्यवस्था दी। आत्मनिर्भर भारत अभियान का शुभारम्भ, जो उसी संकट के बीच हुआ, ने देश को आयात पर निर्भरता कम करते हुए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक मजबूत केंद्र बना दिया।

आत्मनिर्भर भारत से विकसित भारत का संकल्प
‘आत्मनिर्भर भारत’ केवल एक नारा नहीं बल्कि एक समग्र आर्थिक दर्शन है। पीएलआई (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) योजनाओं ने विनिर्माण को बढ़ावा दिया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने भारतीय शिक्षा को वैश्विक मानकों पर खड़ा कर दिया। ग्रीन हाइड्रोलॉजी मिशन, सौर ऊर्जा क्रांति और राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति ने भारत को तकनीकी और पर्यावरणीय दोनों मोर्चों पर आत्मनिर्भर बनाया। वर्ष 2026 तक, भारत दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्द ही तीसरी वैश्विक अर्थव्यवस्था बन जाएगा। ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प अब एक स्पष्ट रूपरेखा में बदल चुका है, जिसमें हर क्षेत्र-बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल सार्वजनिक सेवाएं-तेजी से प्रगति पथ पर हैं।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष केवल एक सांख्यिकीय लम्बाई नहीं बल्कि एक गहरी संरचनात्मक बदलाव की कहानी है। उन्होंने भारतीय राजनीति और प्रशासन को एक नई दिशा दी- जहां निर्णय लेने में देरी नहीं, नेतृत्व में दुविधा नहीं और सपनों में अधूरापन नहीं। उनकी दूरदृष्टि, राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अडिग नीति, नवोन्मेषी विदेश नीति और संकटों को सिद्धियों में बदलने की अद्भुत क्षमता ने भारत को न केवल एक मजबूत राष्ट्र बनाया बल्कि उसे वैश्विक मंच पर एक सम्मानित स्थान भी दिलाया।
‘आत्मनिर्भर भारत’ से ‘विकसित भारत’ की ओर यह यात्रा अब एक राष्ट्रीय अभियान बन चुकी है और यह मोदी की ही देन है कि आज भारत आत्मविश्वास से अपने अमृत काल में प्रवेश कर चुका है। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक सामर्थ्य की विजय है।
प्रा. डॉ. रविकांत कोल्हे

