अजीत भारती के लाइव वीडियो पर कोई जाहिल व्यक्ति उनकी बहन के लिए एक भद्दी गाली देता है। अजीत उसकी टिप्पणी पढ़ते हैं, और उसके लिए उसी की कही हुई बात दुहरा देते हैं। कुल इतनी ही बात है, और इसी के लिए अजीत पर वह कठोर धारा लगा दी जाती है जो देश में हर साल सैकड़ों का घर बर्बाद कर रही है। क्या उस असमानता बढ़ाने वाले कानून पर बात नहीं होनी चाहिए?
क्या देश बना दिया आपने? कुछ लोग जब चाहें तब किसी को भद्दी भद्दी गालियां दें, सोशल मिडिया पर पूरी जाति के लिए अभद्र बातें कहें, और पलट कर कोई उत्तर दे दे तो कठोर कार्यवाही? इस देश में देवी देवताओं को गाली दी जा सकती है, पवित्र ग्रंथो को भला बुरा कहा जा सकता है, और किसी ने पलट कर बात भी दुहरा दी तो अपराधी हो गया? क्या मूर्खता है यह?

इस प्रकरण में अजीत के साथ खड़े होना वास्तव में अपने आप के साथ खड़ा होना है। इसको इस तरह भी देखे जाने की जरूरत है कि अजीत सामर्थ्यवान हैं, उन्हें कानून की समझ है, उनके पास लोग हैं। यदि उन्हें इस तरह घसीटा जा सकता है तो सामान्य जन का क्या होगा?
मैं यदि तनिक स्वार्थी हो कर सोचूँ तो अजीत पर वह एक्ट लगाया जाना सामान्य लोगों के लिए लाभदायक ही है। अजीत का रत्ती भर कुछ नहीं बिगड़ेगा यह तो तय है, संभव है यह केस उनका कद और बड़ा ही बना कर जाये। पर इसी बहाने इस काले कानून पर बड़ी चर्चा होगी… अजीत महीनों तक धागे खोलेंगे और इसके दुष्प्रभाव पर तथ्यों के साथ बात होगी। यह एक जरूरी काम ही है…
अजीत पर लगा केस तो ख़ारिज ही होना है। इससे कम से कम यह बात तो फैलेगी ही कि यह काला कानून ख़ारिज भी हो सकता है और इससे बहुत डरने की जरूरत नहीं है। अभी गाँव देहात में इस कानून का भय तो है, बेहतर है कि इसी बहाने यह भय भी दूर होगा। इसलिए भी इस घटना पर लगातार चर्चा होनी चाहिए।
इस केस पर दृष्टि बनाए रखने और चर्चा करते रहने की जरूरत है। अजीत आपको पसंद न हों तब भी…

