राष्ट्रीय खेल दिवस का उद्देश्य केवल खेल नहीं होते, वे प्रोत्साहन और एकता की भावना को समाहित करते हैं। स्थानीय खेल आयोजनों से शुरुआत करना किसी खिलाड़ी की जीवन-यात्रा का अभिन्न अंग होता है।
राष्ट्रीय खेल दिवस हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी स्वर्गीय मेजर ध्यान चंद की जयंती पर मनाया जाता है। यह दिन उनके अदम्य साहस और खेल जगत में उनके असाधारण योगदान को सम्मानित करने के लिए समर्पित माना जाता है। इस खेल दिवस का मुख्य उद्देश्य खेलों के महत्व को समझना भी है। इसके साथ ही यह संदेश भी स्थापित करना है कि खेल केवल खेल-कूद नहीं हैं, वे दिलों, समुदायों और देशों को जोड़ते हैं-वे बाधाओं को पार करते हैं और एक साझा जुनून के माध्यम से लोगों को एक सूत्र में जुट करते हैं। 29 अगस्त, 1905 को जन्मे मेजर ध्यान चंद एक असाधारण हॉकी खिलाड़ी थे, जो हॉकी स्टिक सम्भालने और गेंद पर नियंत्रण रखने में दक्ष थे। उनकी सटीकता और कुशलता ने उन्हें एक महान खिलाड़ी का दर्जा दिलाया।
उनके मार्गदर्शन में भारत ने हॉकी में लगातार तीन ओलम्पिक स्वर्ण पदक जीते और खेल इतिहास में उनका नाम दर्ज हो गया। मेजर ध्यानचंद ने अपनी उपलब्धियों के माध्यम से एक खिलाड़ी के अटूट समर्पण की एक ऐसी विरासत छोड़ी है जो मिसाल कायम करती है। यह महानता की चाह रखने वाले महत्वाकांक्षी व्यक्तियों के लिए एक मार्गदर्शक है और यही कारण है कि राष्ट्रीय खेल दिवस प्रत्येक साल उनके जन्मदिन पर मनाया जाता है। उन्होंने एक एथलीट के रूप में अपनी पहचान से कहीं बढ़कर सफलता प्राप्त किया है। यह महज कैलेंडर पर अंकित एक तारीख नहीं है, इसका गहरा और शाश्वत महत्व है। यह एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है जो खिलाड़ियों को, जो अधिकतर गुमनाम नायक होते हैं, सार्वजनिक पहचान की सुर्खियों में लाता है।
भारत में पहला राष्ट्रीय खेल दिवस वर्ष 2012 में मनाया गया था। आज की निरंतर विकसित होती दुनिया में, यह इस बात का एक अचूक अनुस्मारक बना हुआ है कि पदकों और ट्राफियों के आकर्षण के पीछे दृढ़ संकल्प, लगन और उत्कृष्टता की अटूट खोज से बुना हुआ एक ताना-बाना छिपा है।
आज देश भर के खिलाड़ियों को उनके अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन करने पर भरपूर सम्मान व सम्मानजनक राशि भी प्राप्त होती है। बेहतर प्रदर्शनों का सिलसिला अगर ओलम्पिक को छोड़ दिया जाए तो भी अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों ने विरोधियों की तुलना में विश्व स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है।
हमारे खिलाड़ी केवल क्रिकेट ही नहीं बल्कि अन्य खेलों के हर इंडोर-आउटडोर खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने लगे हैं। परिणाम यह है कि स्टार खिलाड़ी अब केवल क्रिकेटर नहीं हैं बल्कि नीरज चोपड़ा (भाला फेंक), मनु भाकर ( निशानेबाजी),पी वी सिंधु और सायना नेहवाल (बैडमिंटन),मैरी कॉम (मुक्केबाजी) और हॉकी के स्टार खिलाड़ियों की एक फौज है जो विविध प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन करते रहते हैं।
क्रिकेट से बात शुरु की जाए तो पुरुष खिलाड़ियों ने विश्व कप, चैम्पियस ट्रॉफी आदि जीते हैं तो महिला खिलाड़िगण भी कम नहीं रही हैं। उन्होंने कई अवसरों पर अपना दमखम दिखाते हुए बड़ी क्रिकेट प्रतियोगितायें जीती हैं। ताजातरीन उदाहरण भारत और इंग्लैंड के बीच क्रिकेट का काशी कहे जानेवाले लार्ड्स में खेले गए टेस्ट मैच में उन्होंने विरोधियों को हर विभाग में मात देते हुए सर्वश्रेष्ठ जीत प्राप्त किया और क्रिकेट जगत में भारतीय क्रिकेट का परचम लहराया है।
अभी हाल ही में भारतीय खिलाड़ियों ने राष्ट्रमंडल खेलों में 39 पदक (13 स्वर्ण,17 रजत और 9 कांस्य) जीतकर चौथा स्थान प्राप्त किया है। खिलाड़ियों का उनके गृह प्रदेश में जिस प्रकार भव्य स्वागत हुआ वह न्यूज चैनलों के माध्यम से देखने लायक और प्रेरणादायक था।बैडमिंटन, निशानेबाजी, तीरंदाजी, शतरंज और पैरा स्पोर्ट्स के खिलाड़ियों की उपलब्धियां देश भर के युवाओं को प्रेरित करने के लिए पर्याप्त हैं। हमें यह विश्वास करना चाहिए कि आनेवाले एशियाई खेलों में भी खिलाड़ियों का प्रदर्शन उच्च कोटि का होगा।
राष्ट्रीय खेल दिवस के दिन ऐसे प्रतिभाशाली और विजयी खिलाड़ियों का सार्वजनिक सम्मान किया जाना चाहिए और नगर के सभी युवाओं को इस समारोह में भागीदारी करनी चाहिए। राष्ट्रीय खेल दिवस के बारे में जानकारी फैलाना, खेल आयोजनों में भाग लेना और अपने स्थानीय खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करना बहुत अच्छा है, लेकिन उभरते हुए खिलाड़ियों, खेल संगठनों और विभिन्न खेल सम्बंधी पहलों को समर्थन देने के लिए क्राउडफंडिंग एक शक्तिशाली माध्यम है। यह एक सामूहिक प्रयास है जहां व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभावान खिलाड़ियों के लिए उपकरण, प्रशिक्षण और टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए अपने संसाधनों को एकजुट करते हैं।
इसके अलावा क्रिकेट के अलावा अनेक खेलों (फुटबॉल, कबड्डी, हॉकी, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, वॉलीबॉल ) पेशेवर लीग शुरु किए गए हैं। इनमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी हिस्सा लेते हैं जो भारतीय खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धा का पाठ पढ़ाते हैं। जिससे भारतीय खिलाड़ियों को पेशेवर ढंग से अपना खेल दिखाने और निखारने की प्रेरणा मिलती है। राष्ट्रीय खेल दिवस पर व्यक्तियों, विशेषकर ऊर्जावान युवाओं को, निष्क्रिय जीवनशैली छोड़ने और बाहरी गतिविधियों और खेलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
भव्यता और जमीनी स्तर का उत्साह एक साथ मिलकर राष्ट्रीय खेल दिवस पर पूरे देश में एक संक्रामक उत्साह पैदा करते हैं। जीवंत खेल आयोजनों, ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं के साथ भारत में नई जान आ जाती है। ये जीवंत गतिविधियां न केवल सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करती हैं बल्कि विभिन्न खेलों और उनके बहुआयामी लाभों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
परंपरागत रूप से अकादमिक गतिविधियों के लिए जाने जाने वाले स्कूल और कॉलेज, राष्ट्रीय खेल दिवस पर सौहार्द और शारीरिक गतिविधियों के जीवंत केंद्र में परिवर्तित हो जाते हैं। इन संस्थानों में व्याप्त उत्साह, छात्रों को एकजुट करने, टीम वर्क को बढ़ावा देने और महत्वपूर्ण जीवन कौशल विकसित करने में खेलों की क्षमता को रेखांकित करता है। यहां खेल भावना का सामूहिक लोकाचार सर्वोपरि हो उठता है, जो व्यक्तिगत विजय से ऊपर उठकर एकता और साझा आकांक्षाओं की विजय का प्रतीक बन जाता है।
राजीव रोहित
