बच्चों का मन कोरे कागज की तरह होता है जो लिखेंगे वही बालमन पढ़ेगा। बच्चों में नैतिक विकास के लिए...
भारत के सामाजिक परिदृश्य में एक बेचैन कर देने वाला बदलाव तेजी से उभर रहा है और उसकी सबसे मार्मिक...
21वीं सदी को यदि किसी एक प्रतीक में संक्षेपित करना हो तो वह प्रतीक होगा, मनुष्य की हथेली में...
इक्कीसवीं सदी का तीसरा दशक मानव इतिहास में केवल एक समयखंड नहीं, बल्कि एक संक्रमण-क्षण के रूप में उभर रहा...
ऑनलाइन खेलों के भंवरजाल में फंसकर बच्चे कहीं आत्महत्या कर रहे हैं तो कहीं पैसे गंवा रहे हैं। कभी ब्लैकमेलिंग...
वर्तमान दौर में तनाव यानी दबाव प्रत्येक विद्यार्थी जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है। पूर्व में किए गए...
युवाओं का कम आयु में मानसिक रोगी बनना एक चेतावनी है कि हमारी विकास की दौड़ में कहीं न कहीं...
पश्चिम में समुदाय-आधारित जीवन का उभार और भारत की कुटुम्ब व्यवस्था एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं- मनुष्य...
हाल ही में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आया एक मामला यह संकेत देता है कि डिजिटल दुनिया में...
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, "शैक्षणिक परिसरों में सौहार्द एवं समानता...
जाति या वर्ग के नाम पर जो लोग उन्माद फैला रहे हैं। एक-दूसरे को अगर जाने-अनजाने किसी भी रुप में...
विवेकानंद के लिए धर्म कर्मकांड नहीं, बल्कि सेवा था— “दारिद्र नारायण की सेवा ही ईश्वर की सच्ची पूजा है।” आध्यात्मिक...
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