प्रकृति से जुड़कर स्वास्थ्य की सिद्धि की जा सकती है। इन दिनों उपवास करने से जहां शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, वहीं इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं। आइए इस पर एक दृष्टि डालें।
नवरात्र में उपवास का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भी है। यह ऋतु-परिवर्तन का समय होता है, जब हमारा पाचन-तंत्र कमजोर हो जाता है। इन नौ दिनों में हल्का, सात्विक और कम भोजन करके हम शरीर को नई ऋतु के अनुसार ढालते हैं। मां दुर्गा की आराधना के साथ यह उपवास हमारे शरीर, मन और आत्मा-तीनों की शुद्धि का अवसर है। यह आत्म-संयम, संकल्प-शक्ति और आंतरिक पवित्रता का प्रतीक है। लेकिन उपवास करने और उसे सही विधि से तोड़ने की कला कम लोग ही जानते हैं।
हमारे देश में आदिकाल से उपवास का बहुत अधिक महत्व रहा है। धार्मिक ग्रंथों में उपवास को शारीरिक और मानसिक पवित्रता का साधन माना गया है। यह परंपरा जैन धर्मावलंबियों में विशेष रूप से और हिंदुओं में सामान्य रूप से चली आ रही है। उपवास आध्यात्मिक और शारीरिक शुद्धि का अपूर्व उपाय है, किंतु इसका सम्पूर्ण लाभ उसी को मिलता है जो उपवास की सही विधि का ज्ञान रखता हो।

उपवास की सही विधि
उपवास प्रारम्भ करने से पहले प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से आंतों की भली-भांति सफाई कर लेनी चाहिए, अन्यथा गैस की परेशानी हो सकती है।
उपवास की अवधि में एक दिन छोड़कर एनीमा लेने से अधिक सफलता मिलती है।
प्यास लगने पर गुनगुना पानी पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए।
उपवास कम-से-कम 5 दिन और अधिकतम 40 दिन तक किया जा सकता है।
थकावट, उल्टी, दस्त, पेट फूलना, जोड़ों में दर्द, चमड़ी में खुजली जैसे लक्षण सामान्य हैं। यह शरीर से विजातीय द्रव्यों के बाहर निकलने की प्रक्रिया है।
सावधानियां
उपवास के दौरान विजातीय पदार्थों को निकालने में काफी ऊर्जा खर्च होती है, इसलिए पूर्ण विश्राम और मानसिक शांति अनिवार्य है। इस नाजुक अवस्था में औषधियों के प्रयोग से बचें। खुली हवा में रहें और प्रातःकाल कुछ देर धूप का सेवन करें।
विशेष: यदि किसी बीमारी के कारण दवा चल रही हो, तो चिकित्सक के परामर्श से ही उपवास करना चाहिए।
उपवास कैसे तोड़ें
उपवास तोड़ते समय अत्यधिक सावधानी की आवश्यकता होती है। पाचन-शक्ति दुर्बल होने के कारण बहुत हल्का भोजन जैसे पानी या पतला फलों का रस अल्प मात्रा में लें। दूध पूर्ण आहार होने के कारण प्रारम्भ में भारी सिद्ध होगा।
विशेष लाभ
उपवास द्वारा शराब, धूम्रपान, गांजा आदि मादक द्रव्यों की लत से आसानी से मुक्ति मिलती है, क्योंकि उपवास में विदड्रॉल सिम्पटम्स नहीं होते।
उपवास करने से शरीर में कई तरह के बदलाव के साथ-साथ कई प्रमुख स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं।
नवरात्र ऋतु-परिवर्तन का समय होता है। इस समय किया गया उपवास शरीर को डिटॉक्स करने का सबसे प्राकृतिक तरीका है।
पाचन तंत्र को आराम मिलता है
शरीर की सफाई होती है
प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है
वजन नियंत्रण और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है
सूजन और दर्द में कमी आती है – जोड़ों का दर्द, गैस, अम्लता जैसी समस्याएं कम होती हैं।
मानसिक शांति और फोकस बढ़ता है – उपवास + पूजा + ध्यान से दिमाग शांत होता है। तनाव हार्मोन कम होते हैं, नींद अच्छी आती है और एकाग्रता बढ़ती है
त्वचा और बालों में निखार आता है
नवरात्र में तन-मन की शुद्धि करके तथा प्रकृति से जुड़कर स्वास्थ्य की सिद्धि की जा सकती है।
डॉ. देवाराम काकड़

