श्राद्ध और पितृपक्ष का वैज्ञानिक महत्व

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इस प्रकार से देखा जाए तो पितृपक्ष और श्राद्ध में हम न केवल अपने पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण कर रहे हैं, बल्कि पूरा खगोलशास्त्र भी समझ ले रहे हैं। श्रद्धा और विज्ञान का यह एक अद्भुत मेल है, जो हमारे ऋषियों द्वारा बनाया गया है। आज समाज के कई वर्ग श्राद्ध के इस वैज्ञानिक पक्ष को न जानने के कारण इसे ठीक से नहीं करते। कुछ लोग तीन दिन में और कुछ लोग चार दिन में ही सारी प्रक्रियाएं पूरी कर डालते हैं। यह न केवल अशास्त्रीय है, बल्कि हमारे पितरों के लिए अपमानजनक भी है। जिन पितरों के कारण हमारा अस्तित्व है, उनके निर्विघ्न परलोक यात्रा की हम व्यवस्था न करें, यह हमारी कृतघ्नता ही कहलाएगी।

भारत बन रहा है दुनिया का मेडीकल टूरिज्म हब

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भारत में न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है बल्कि भारत में चिकित्सा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने में भी केंद्र सरकार ने अतुलनीय कार्य किया है, इसमें चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के साथ ही तकनीकी सुविधाओं का विस्तार भी शामिल है। इसके कारण आज विदेशी नागरिकों के इलाज के लिये भी भारत एक पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। भारत मेडीकल टूरिज्म का हब बनता जा रहा है। मेडीकल सुविधाओं के मामले में भारत आज विश्व के कुछ चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है। विदेशी नागरिक भारत में अब केवल घूमने के मकसद से नहीं आ रहे हैं बल्कि अपना इलाज कराने भी आ रहे हैं। हर साल जटिल बीमारियों का इलाज कराने लाखों विदेशी नागरिक भारत आ रहे हैं। भारत आज दुनिया में तीसरा सबसे बडा, इलाज के लिहाज से, पसंद किया जाने वाला देश बन गया है। दरअसल, विकसित देशों में बीमारियों का इलाज बहुत मंहगा है। भारत में उक्त राशि की तुलना में यह केवल 20 से 30 प्रतिशत तक की राशि के बीच ही हो जाता है। अतः भारत में मेडीकल टूरिज्म बहुत फल फूल रहा है।

हवन पर वैज्ञानिक रिसर्च और लाभ

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फ़्रांस के ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च की। जिसमें उन्हें पता चला की हवन मुख्यतः आम की लकड़ी पर किया जाता है। जब आम की लकड़ी जलती है तो फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नामक गैस उत्पन्न होती है।जो कि खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणुओं को मारती है ।तथा वातावरण को शुद्ध करती है। इस रिसर्च के बाद ही वैज्ञानिकों को इस गैस और इसे बनाने का तरीका पता चला।

युद्ध, और फिर आर्थिक मंदी में आशा की किरण “भारत”

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कोरोना महामारी के कारण प्रभावित वैश्विक माँग–आपूर्ति श्रृंखला अभी पटरी पर लौट ही रही थी कि रुस-यूक्रेन युद्ध ने अनिश्चितताओं को एक बार फिर बढ़ा दिया है। ज्ञातव्य है कि वैश्वीकरण के दौर में प्रत्यक्ष युद्ध दो देश ही लड़ते है लेकिन उसका आर्थिक प्रभाव वैश्विक होता है। अमेरिका सहित नाटो देशों द्वारा रुस पर आर्थिक प्रतिबन्धो की छड़ी लगा दी।

काम करे मशीन शरीर करे जिम

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People on Treadmills
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आधुनिकता के नाम पर हम सुविधाभोगी और परजीवी होते जा रहे हैं। अपने पूर्वजों के विपरीत मेहनत करने की प्रवृत्ति से जी चुराने की वजह से हमारे शरीर में तमाम शारीरिक बीमारियां घर करती जा रही हैं और उनसे छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर हमें जिम ‘ज्वाइन’ करने की सलाह देते हैं जबकि  ज्यादातर मामलों में हम अपनी जीवन शैली में बदलाव करके शरीर फिट रख सकते हैं।

मंकीपॉक्स चिंता का विषय

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कोरोना के बाद मंकीपॉक्स एक बड़ी महामारी के तौर पर दुनिया भर में अपने पैर पसार रहा है। यद्यपि भारत में उसका कोई सक्रिय मामला नहीं मिला है लेकिन व्यापक स्तर पर तैयारी किए जाने की आवश्यकता है क्योंकि इस समय यह बीमारी जिन देशों में तेजी से फैल रही है उन देशों के साथ भारत के मजबूत सम्बंध हैं और लोगों की आवाजाही भी लगातार होती रहती है।

बरसात में होने वाली इन 5 बीमारियां

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पपीता के पत्ता का जूस प्लेटलेट्स बढ़ाने में मददगार है दरअसल,पपीते के पत्ते के जूस में पपैन और काइमोपैपेन जैसे एंजाइम्स होते हैं, जो पाचन में सहायता करते हैं, सूजन और अन्य पाचन विकारों को रोकती है। इसके अलावा पपीते के पत्तों में विटामिन ए, सी, ई, के, बी और कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम और आयरन जैसे खनिज तत्व भी होते हैं जो कि इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और संक्रामक बीमारियों से बचाते हैं।

नाद योग शब्द ब्रह्मा की साधना

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योग संस्कृत की युज् धातु से बना है इसका अर्थ है,  मिलना,जोड़ना । व्यक्ति की चेतना का ब्रह्मांड की चेतना से जोड़ना, आत्मा का परमात्मा से मिलन ,मन और शरीर का सामंजस्य ,मनुष्य का प्रकृति के साथ जुड़ना आदि।योग परिपूर्ण सामंजस्य की अवस्था का द्योतक है ।  अंतिम परिणाम मुक्ति, निर्वाण, कैवल्य, मोक्ष या परम पद के रूप में देखा जाता है। योग को मन और शरीर के बीच सामंजस्य स्थापित करने या स्वस्थ जीवन यापन की कला एवं विज्ञान कहा जा सकता है। 

कोरोना के बाद मंकीपॉक्स का खतरा

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अभी दुनिया कोविड-19 के कहर से पूरी तरह उबरी नहीं है, इसी बीच कई देशों में मंकीपॉक्स के प्रकोप की घटनाएं प्रकाश में आ रही हैं। विशेष बात यह है कि उन देशों में इससे पहले मंकीपॉक्स संक्रमण की उपस्थिति नहीं थी।  दिनांक 13 मई, 2022 से विश्व स्वास्थ्य संगठन…

कहानी वैक्सीन के जन्मदाता की

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2019 की शुरुआत में पूरी दुनिया एक नयी बीमारी कोविड-19 की चपेट में आ गयी थी। साल के उत्तरार्ध में लगभग हर बड़े देश और दवाओं पर अनुसंधान करने वाली कम्पनी को उपचार के तौर पर बस एक ही विकल्प दिखाई दे रहा था। सबको पता था कि इस बीमारी…

कौन जिम्मेदार है महिलाओं के अनचाहे गर्भधारण के लिए

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कोरोना महामारी ने दुनिया को कई तरह से प्रभावित किया है। घर, परिवार, समाज, नौकरी से लगाकर आपसी संबंध भी कोरोना की भेंट चढ़े! इस एक कहर से पूरी दुनिया सामाजिक और आर्थिक रूप से संक्रमित हुई। लेकिन, इसका सबसे ज्यादा असर किसी पर हुआ, तो वह हैं महिलाएं। इतिहास…

भारत बन रहा है दुनिया का फार्मेसी हब

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पिछले 8 वर्षों के दौरान भारत के ड्रग्स एवं फार्मा उत्पाद के निर्यात में 103 प्रतिशत की आकर्षक वृद्धि दर अर्जित की गई है। ड्रग्स एवं फार्मा उत्पाद के निर्यात वर्ष 2013-14 में 90,414 करोड़ रुपए के रहे थे जो 2021-22 में बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गए…

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