धर्मांतरण, अलगाववाद, नशा, अपराध, खेती-किसानी, उद्योग-व्यवसाय, रोजगार, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था, सुरक्षा आदि से जुड़े ज्वलंत समस्याओं का समाधान कौन सी राजनीतिक पार्टी कर सकती है, इसका सोच-विचार कर ही पंजाब के मतदाताओं को अपना निर्णय लेना चाहिए।
पंजाब के राजनीतिक गलियारों में 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट सुनाई देने लगी है। राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने नैरेटिव गढ़ने और लोगों को अपने पक्ष में लामबंद करने की तैयारी में हैं, परंतु इस बार पंजाब के लोगों के सामने प्रश्न केवल यह नहीं होगा कि अगली सरकार किसकी बनेगी? असली प्रश्न यह होगा कि पंजाब को अगले दशक में किस दिशा की ओर ले जाया जाएगा?
पंजाब अब सिर्फ चुनावी वादों, भावनात्मक मुद्दों और राजनीतिक नारों से संतुष्ट होने वाला नहीं है। लोग पिछले वादों की प्रगति रिपोर्ट, सरकारों के काम का हिसाब और भविष्य के लिए स्पष्ट रोडमैप मांग रहे हैं।

पिछले समय में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने पंजाब के लोगों को अलग-अलग नैरेटिव दिए हैं। किसी ने बदलाव, किसी ने पंजाबी स्वाभिमान, किसी ने पंथक भावनाओं, किसी ने कल्याणकारी योजनाओं और किसी ने विरोध की राजनीति को अपना केंद्र बनाया, पर लोग अब यह पूछने के लिए मजबूर हैं कि इन नैरेटिवों ने पंजाब की जमीनी वास्तविकता को कितना बदला? 2027 के चुनाव में यह मुकाबला केवल पार्टियों के बीच नहीं बल्कि विभिन्न विकास मॉडलों के बीच भी होगा। पंजाब के लोगों को यह तय करना होगा कि उन्हें ऐसी राजनीति चाहिए जो हर समस्या को चुनावी मुद्दा बनाए या ऐसी राजनीति जो समस्या की जड़ तक जाकर स्थाई समाधान दे।
पंजाब की वास्तविक चुनौतियां
पंजाब की मुख्य चुनौतियां किसी से छिपी नहीं हैं- अलगाववादी खालिस्तानी गतिविधियां और पंजाब की सुरक्षा, नशा, गैंगस्टरवाद, बेरोजगारी, युवाओं का विदेशों की ओर पलायन, कृषि संकट, पानी का गिरता स्तर, औद्योगिक पिछड़ापन, पंजाब की वित्तीय स्थिति, सीमावर्ती सुरक्षा, पर्यावरण, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती तथा सामाजिक ताने-बाने की रक्षा। प्रश्न अब यह नहीं कि समस्याएं क्या हैं, हर पंजाबी इन्हें जानता है। प्रश्न है- समाधान कौन देगा, कितने समय में देगा और उत्तरदायित्व कौन लेगा?
पंजाब सीमावर्ती राज्य है। ड्रोन के माध्यम से नशे और हथियारों की तस्करी, आपराधिक नेटवर्क और विदेशी हैंडलरों से जुड़ी गतिविधियों को केवल कानून-व्यवस्था का मामला मानना गलती होगी, यह राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ मामला है।
पंजाब भाजपा का स्पष्ट मत है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक शांति के मामले में कोई राजनीतिक समझौता नहीं किया जाना चाहिए। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों, बीएसएफ, एनआईए, गुप्त तंत्र और पंजाब पुलिस के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर आपराधिक नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचना समय की आवश्यकता है।
नशा: केवल अपराध नहीं, पीढ़ी बचाने की लड़ाई
पंजाब में 65 प्रतिशत युवा नशे से प्रभावित हो चुके हैं। घरों के घर ध्वस्त हो चुके हैं और हो रहे हैं। लड़के ही नहीं बल्कि लड़कियां और बच्चे भी इससे अछूते नहीं हैं। पंजाब का नशा केवल एक सामाजिक बुराई नहीं है। इसके पीछे तस्करी, अपराध, पैसे और युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने वाला एक संगठित नेटवर्क काम करता है। इस नेटवर्क से कुछ राजनेता और पुलिस अधिकारियों की सांठगांठ के आरोप हैं। उच्च न्यायालय द्वारा नशे के सौदागरों से सम्बंधित मामलों को सही तरीके से हैंडल न करने के लिए पंजाब पुलिस को कई बार फटकार भी लगाई जा चुकी है।
धर्म परिवर्तन: संवाद और जागरूकता की आवश्यकता
पंजाब के सामाजिक ताने-बाने में धर्म और आस्था की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। धर्म परिवर्तन के मुद्दे को अनदेखा नहीं किया जा सकता है क्योंकि पंजाब की बड़ी सिख जनसंख्या में धर्म परिवर्तन को लेकर चिंता बढ़ी है और विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में इस सम्बंध में चर्चा तेज हुई है।
अलगाववादी खालिस्तानी गतिविधियां और पंजाब की सुरक्षा
पंजाब की धरती ने हिंसा और आतंकवाद का दर्द पहले भी सहा है। बेशक पंजाब में आज खालिस्तान के पक्ष में किसी तरह का कोई उल्लेखनीय सार्वजनिक अभियान नहीं है, फिर भी पंजाब और भारत को अस्थिर करने के लिए विदेशी धरती से चल रही अलगाववादी और खालिस्तान समर्थक हिंसक गतिविधियों, भारत विरोधी प्रचार तथा हथियारों और नशे की तस्करी से जुड़े नेटवर्कों को गम्भीरता से देखने की आवश्यकता है।
किसान, पानी और पंजाब की अर्थव्यवस्था
पंजाब की खेती अब पहले जैसी लाभकारी नहीं रही। किसान कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। खेती को बचाना केवल किसान को बचाना नहीं बल्कि पंजाब की अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता को बचाना है। पानी का संकट पंजाब के भविष्य के लिए सबसे गम्भीर चुनौतियों में से एक है। इसी तरह पंजाब की वित्तीय स्थिति भी गम्भीर बनी हुई है। आज पंजाब पर लगभग 5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। हर दूसरे महीने सरकार द्वारा अपने खर्च चलाने के लिए कर्ज लिया जा रहा है। हर समस्या का समाधान और अधिक कर्ज लेना नहीं हो सकता, किंतु असली समस्या यह भी है कि पंजाब में नशा और खराब कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण कोई भी कारोबारी या उद्योगपति पूंजी निवेश के लिए तैयार नहीं है। इसलिए हमें पहले यहां पूंजी निवेश के लिए माहौल अनुकूल बनाना होगा।
पंजाब की वर्तमान सरकार और विकास का प्रश्न
इस समय पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। सरकार द्वारा विकास और उपलब्धियों के बड़े दावे किए जा रहे हैं और विज्ञापनों के माध्यम से उन्हें व्यापक रूप से प्रचारित किया जा रहा है, परंतु विपक्ष का दावा है कि विज्ञापनों में दिखाया जा रहा विकास जमीनी वास्तविकता से कोसों दूर है। यहां सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। रेत खनन से 20 हजार करोड़ रुपये की आय प्राप्त करने की बात कही गई थी, किंतु वहां एक हजार करोड़ रुपये की भी आय न होना कई प्रश्न पैदा करता है कि पैसा किसकी जेब में जा रहा है?
भाजपा: क्या बेहतर विकल्प?
इस संदर्भ में प्रश्न स्वाभाविक है कि पंजाब को बेहतर विकल्प कौन-सा मिल सकता है? पंजाब में अकाली दल के विखंडित होने से इसकी राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है और पार्टी के भीतर अब तक भी चुनौतियां हैं। वहीं पंजाब कांग्रेस में आंतरिक मतभेद और गुटबाजी लगातार सामने आ रही है। ऐसे राजनीतिक माहौल में भाजपा पंजाब के लिए एक बेहतर राजनीतिक विकल्प के रूप में स्वयं को प्रस्तुत कर सकती है। भाजपा के लिए यह केवल चुनाव जीतने का नहीं बल्कि विश्वास जीतने का प्रश्न है। पंजाब में भाजपा की स्वीकार्यता उसकी राष्ट्रीय स्तर की सरकार के काम, विकास नीतियों, सुरक्षा के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण और पंजाब के मुद्दों पर लगातार आवाज उठाने से जुड़ी हुई है।
भाजपा को पंजाब में अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता और अधिक बढ़ाने के लिए पंजाबी समाज के हर वर्ग के साथ संवाद मजबूत करना होगा। किसान, व्यापारी, उद्योगपति, युवा, महिलाएं, मजदूर, सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग, धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं- हर वर्ग की बात सुननी और उसे नीति में स्थान देना होगा। पंजाब भाजपा के लिए आशाएं भी बड़ी हैं। लोग केवल विरोध की आवाज नहीं बल्कि समाधान की आवाज सुनना चाहते हैं। केवल सरकार की कमियां गिनाना पर्याप्त नहीं है, यह बताना भी पड़ेगा कि भाजपा सत्ता में आकर क्या करेगी, कैसे करेगी और कितने समय में करेगी।
यही वह बिंदु है जहां पंजाब भाजपा को अपना पंजाब विजन 2027 एक स्पष्ट, मापने योग्य और समयबद्ध कार्ययोजना के रूप में लोगों के सामने रखना चाहिए। 2027 के चुनाव को केवल सरकार बदलने का चुनाव बनाना पंजाब के साथ न्याय नहीं होगा। यह पंजाब की दिशा बदलने का चुनाव होना चाहिए।
पंजाब को क्या चाहिए?
पंजाब को ऐसी राजनीति चाहिए जो-
– नशे के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए और युवाओं के लिए अवसर पैदा करे।
– गैंगस्टरवाद और आपराधिक नेटवर्कों पर सख्त कार्रवाई करे।
– धर्म और विरासत की रक्षा करे, परंतु समाज में अलगाववाद को पनपने का अवसर न दे।
– अलगाववादी हिंसा और विदेशी हस्तक्षेप का डटकर मुकाबला करे।
– किसान को सम्मान और स्थाई आय दे।
– पानी बचाए और खेती को टिकाऊ बनाए।
– उद्योग और निवेश लाए।
– युवाओं को पंजाब में ही अवसर दे।
– पंजाब की वित्तीय स्थिति को मजबूत करे।
– सीमावर्ती जिलों को विकास के केंद्र बनाए।
– और सबसे बढ़कर- जवाबदेह, पारदर्शी और परिणाम-केंद्रित शासन दे।
प्रो. सरचंद सिंह ख्याला

