कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट, पानी से भी सस्ता हुआ तेल

  • अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार अगले तीन सप्ताह मे होगा खत्म
  • अमेरिका में कच्ते तेल की कीमत पानी से भी सस्ती
  • तेल की खपत कम होने से लगातार गिर रहे दाम
  • भारत में तेल की कीमत में बड़ी राहत नहीं  
कभी अपनी कीमतो को लेकर आसमान छूने वाला तेल आज कोरोना वायरस की वजह से जमीन पर आ गया है। कोरोना वायरस के बाद से लगातार कच्चे तेल के दामों में गिरावट देखने को मिल रही है। भारत सहित पूरी दुनिया में लगातार तेल के दाम में गिरावट देखी जा रही है। अमेरिका में कच्चे तेल का दाम बोतल के पानी से भी कम हो गया है। कोरोना वायरस की वजह से विश्व के करीब 200 से अधिक देशों में लॉक डाउन लगा हुआ है कोरोना वायरस की वजह से लोग अपने घरों में बंद है और सड़के पूरी तरह से खाली है। वहीं हर क्षेत्र के उद्योग भी पूरी तरह से ढप्प पड़े है जिससे तेल की खपत बिल्कुल ही कम हो गयी है। तेल की लगातार कम होती खपत से उसके दामों में लगातार गिरावट जारी है। अगर अमेरिका की बात करें तो यहां कच्चे तेल की कीमत 77 पैसे प्रति लीटर हो गयी है जो एक पानी के बोतल से भी कम है।
अमेरिका कच्चे तेल को स्टोर कर के रखता है लेकिन तेल की मांग में आयी कमी के बाद अब अमेरिका का भंडार करीब भरने की स्थिति में पहुंच चुका है। अमेरिका के पास अब और स्टोर करने की क्षमता नही है इसलिए अमेरिका चाहता है कि कुछ तेल खत्म किया जाये जिससे लगातार तेल की कीमतें गिरती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक अगले तीन सप्ताह में भंडार पूरी तरह से फुल हो जायेगा इसलिए भंडार को खाली करने की जरुरत है। कोरोना वायरस से जूझ रहे बारी देश भी कम कीमत के बाद भी कच्चे तेल को खरीदने के लिए तैयार नहीं है।
अमेरिका सहित पूरे विश्व में तेल की कीमते लगातार गिरती जा रही है लेकिन बावजूद इसके भारत में कीमतो में ज्यादा कमी नहीं देखने को मिलने वाली है। मार्च महीने में भी कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिली थी लेकिन भारत में तेल कीमतों में मात्र कुछ रुपये की कमी देखने को मिली थी। वही इस गिरावट के बाद भी 1 अप्रैल को पेट्रोल का बेस प्राइज 27.96 था जिसमें सरकार की तरफ से 22.98 पैसे एक्साइज ड्यूटी लगायी गयी फिर 3.55 रुपया डीलर का कमीशन जोड़ा गया फिर 14.79 वैट जोड़ा गया जिसके बाद आम जनता के लिए पेट्रोल की कीमत 69.28 पहुंच गयी। कच्चे तेल की कीमतों में कितनी भी गिरावट आ जाये लेकिन भारत में जितना टैक्स तेल पर लगता है उससे यह पता चलता है कि आम जनता को कभी भी 50 रुपये के नीचे तेल नहीं उपलब्ध हो पायेगा। 
कच्ते तेल का उत्पादन लगातार जारी है जबकि दुनिया के बाकी देश खपत कम होने की वजह से तेल की खरीददारी पर रोक ला चुके है ऐसे में लगातार तेल की कीमतें गिरती जा रही है। उत्पादनकर्ता देश बाकी देशों से यह मांग कर रहे है कि वह तेल खरीदना जारी रखें जबकि खपत कम होने की वजह से बाकी देश अभी तेल पर पैसे नहीं खर्च करना चाहते है क्योंकि ज्यादातर देश कोरोना वायरस की वजह से लगातार मेडिकल क्षेत्र में पैसा खर्च लगा रहे है ऐसे में उनके लिए तेल से ज्याादा लोगों के स्वास्थ्य पर सोचना ज्यादा जरुरी है।

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