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**** सरोजा मैती****

      स्वयंप्रभा समुज्जवला स्वतंत्रता पुकारती,

      अमर्त्य वीर पुत्र हो दृढ़ प्रतिज्ञ सोच लो

      प्रशस्त पुण्य पंथ है- बढ़े चलो बढ़े चलो।

      हिंदी साहित्य के छायावादी कवि श्री जयशंकर प्रसाद की इस कविता में हिमाद्री तुंग का सौंदर्य और ओजस्वी गुण का सुंदर वर्णन है। यह संदेश प्रसादजी की कविता में स्पष्ट रूप से ज्ञात होता है कि हिमाद्री तुंग स्वतंत्र है। स्वप्रभा और समुज्जल का प्रतीक है। हमेशा उनकी ओर आगे बढ़ चले – बढ़ चले।

      हिंदुस्तान की उन्नति पूर्ण रूप से तब होगी जब पूर्वोत्तर से लेकर पूरे भारत का विकास होगा।

      पूर्वोतर भारत से आशय भारत के सर्वाधिक पूर्व क्षेत्र से है जिसमें एक साथ जुड़ी हैैं, सात बहनें। वे हैं अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, नगालैंड, मिजोराम, मेघालय और त्रिपुरा। अब इनमें सिक्किम राज्य भी जुड़ गया है। पूर्वोत्तर भारत सांस्कृतिक दृष्टि से भारत के अन्य राज्यों से कुछ भिन्न हैं। इन राज्यों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए १९७१ में पूर्वोत्तर परिषद का गठन एक केंद्रीय संस्था के रूप में किया गया था। नार्थ ईस्टर्न डेवलपमेंट फाइनेंस कार्पोरेशन लिमिटेड का गठन १ अगस्त १९९५ में किया गया था और उत्तरपूर्वीय क्षेत्र विकास मंत्रालय का गठन सितंबर २००१ में किया गया था।

 भौगोलिक क्षेत्र

      उत्तर पूर्वी भारत की जलवायु मुख्यत: नमअर्ध उष्णकटिबंधीय है और ग्रीष्मकाल गर्म उमस भरा होता हैं तथा अत्यधिक बारिश भी होती हैं। इसके साथ ठण्ड भी पड़ जाती है। भारत के पश्चिमी तट के साथ-साथ इस क्षेत्र में भी भारतीय उप महाद्वीप के कुछ बचे हुए वर्षा वन स्थित हैं। अरुणाचल प्रदेश और अन्य राज्यों की पर्वतीय जलवायु ठंडी हिमाच्छादित सर्दियों के साथ हलकी गर्म रहती है।

      गुवाहाटी, अगरतला, शिलांग, आईजोल, इम्फाल बडे शहर माने जाते हैं।

 भाषाएं

      असमी, बंगाली, बोडो, मणिपुरी बोली जाती हैं। पूर्वोत्तर भारत के लोगों की पहचान तिब्बती बर्मी भाषाओं के अधिक प्रचलन के कारण अलग रूप से नजर आती है। आधुनिक युग के लोग अपनी मातृभाषा के साथ-साथ अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं को भी आपनाए हैं।

 इतिहास क्या बोलता है?

      पहले सभी पूर्वोत्तर क्षेत्र को असम एकत्रित राज्य में वर्गीकृत कर दिया गया था। बाद में असम में एकीकृत करने के विरोध में स्वतंत्र त्रिपुरा जैसे आंदोलन समस्त उत्तरपूर्वीय राज्यों में हुए थे। १९६०-१९७० के दशक में नगालैंड, मेघालय और मिजोराम राज्यों का गठन किया गया है। असम की राजधानी शिलांग से दिसपुर विस्थापित कर दी गई, जो अब गुवाहाटी का एक भाग है। शिलांग मेघालय की राजधानी बन गई। इन सभी राज्यों के साथ इनकी अनूठी संस्कृति और इतिहास जुड़ा है। ब्रिटिश औपचारिक अधिकारियों ने पारंपरिक अलग-अलग सीमा वाले राज्यों को अपने क्षेत्र बनाने के लिए जोड़ दिया था। जैसे उत्तरपूर्व असम, मणिपुर और त्रिपुरा उत्तरपश्चिम में बलुचिस्तान तथा उत्तर पश्चिम सीमांत प्रदेश। १९४७ में आजादी के बाद भारतीय राज्यों और राजनीतिक प्रणालियों का विस्तार एक चुनौती रहा है।

 संस्कृति

      पूर्वोत्तर भारत अपनी अनूठी संस्कृति से अपनी पहचान देता है। हस्तशिल्प, मार्शल आर्ट और प्राकृतिक सुुंदरता के लिए जाना जाता है।

 समस्याएं

      पूर्वोत्तर राज्यों में विद्रोह, बेरोजगारी, मादक पदार्थ का सेवन बडी समस्याएं हैं। मूलभूत और आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। १९९० के दशक में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत से हुए अध्ययनों के माध्यम से यह प्रकट हुआ कि विकास के मामले में यह क्षेत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में थोड़ा पीछे है।

 प्राकृतिक सौंदर्य

      सात बहनों का अनोखा खजाना उनके प्राकृतिक सौंदर्य में छिपा है। खूबसूरती बन कर प्रकृति बरसी है। पूर्वोत्तर का सौंदर्य है सिर को छूने वाले मेघ, हरी-हरी मखमली घास, आसमान छूते हिम श्रृंग, रंगबिरंगे फूल और मनोहर कलरव करती नदियां। वाह! पूर्वोतर है जन्नत!

      चीड़ से भरे नीले पहाड़ विशाल जंगल दुर्लभ वन्य पशुओं से परिपूर्ण राष्ट्रीय पार्क, बर्फ से ढंकी पहाडियां हैं। सड़क पर चलते अचानक बादलों से घिर जाने का सुखद अनुभव, धार्मिक आस्था के लिए कामख्या मंदिर का दर्शन, विश्व के सबसे बड़े नदी द्वीप माजुली का मनोहर दृश्य, आसमान से बातें करता तवांग है, और प्रसिध्द बौध्द मठ जैसे सब सुंदर स्थान हमारा स्वागत करते हैं।

      हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर को पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा देने का प्रयास करते हुए लोगों से अपील की है कि अगर वे प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेना चाहते हैं तो, पूर्वोत्तर की यात्रा करें। उन्होंने अपने दौरे का जिक्र किया और कहा कि – पूर्वोतर, दुबई सिंगापुर की तरह ही खूबसूरत है। उन्होंने इस क्षेत्र की तुलना ताजमहल से की। प्रधान मंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा है, मैं लोगों से कहता हूं, कि अगर उन्हें सिंगापुर और दुबई जाने का मन करता है, या ताजमहल देखने का, तो पूर्वोत्तर जाएं और ईश्वर का प्राकृतिक रूप देखे!

      प्रकृति का अछूत सौंदर्य और जनजातीय संस्कृति व सभ्यता की धरोहर को अगर आप मूल रूप में देखना चाहते हैं तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सैर पर निकलें। असम, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा तथा सिक्किम इन आठ राज्यों वाला यह क्षेत्र तरह-तरह के जीव जंतुओं और पेड़ पौधों के अलावा लोक संस्कृति तथा कलाओं से भरपूर हैं। सौ से अधिक जन जातियां व उपजातियां इस क्षेत्र में हैं।

      यह क्षेत्र हवाई जहाज, सड़क और रेल मार्ग से जुड़ चुका है। इन सभी राज्यों में ट्रेवल एजेन्सी की भूमिका महत्वपूर्ण है। राज्य ने इन्हें मान्यता दे रखी है। ये एजेंट्स निर्धारित दरों पर पर्यटकों के लिए रहने, खाने-पीने, वाहनों तथा परमिट का प्रबंध करते हैं और उन्हें जनजातियों के बीच भी ले जाते हैं।

 आइए सात बहनों का प्राकृतिक दर्शन करें:

    

  असम :- प्राकृतिक संपदा से भरपूर असम में बांस के जंगल, चाय बागान खूब हैं। मां कामाख्य शक्तिपीठ गुवाहाटी में नीलांचल पर्वत पर है। ब्रह्मपुत्रा नदी के बीच मयूरद्वीप में प्राचीन शिव मंदिर है। नवग्रह मंदिर, श्रीमंत शंकरदेव कला क्षेत्र, बालाजी मंदिर, सार्ड्स म्यूजियम, वशिष्ठ आश्रम, सर्राइघर पुल, मदन कामदेव आदि कई दर्शनीय स्थान हैं। संसार का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली ब्रह्मापुत्रा में ही है।

      असम का सुुंदर पहाड़ी

 स्थान हाकालांगा काजीरंगा, नेशनल पार्क में पाया जाने वाला एक सींग का गैंडा असम की धरोहर है। मानस टाइगर रिजर्व व मनेरी टाइगर रिजर्व अन्य अभयारण्य हैं। पक्षियों की कई प्रजातियां तथा दुर्लभ हालॉक नामक लंगूर यहां देखे जा सकते हैं। असम में बिहु नृत्य प्रमुख है।

      त्रिपुरा :- असम व त्रिपुरा के लोगों की जीवनशैली में कई समानताएं हैं। १९०१  में महाराज राधाकिशोर माणिक्य का बनाया शाही उज्जयंता पैलेस यहां का मुख्य आकर्षण है। जामपुई हिल को नित्य रहने वाले बरांत का स्थान कहा जाता है। सुंदर प्राकृतिक दृश्य सुहानी जलवायु बाग सूर्योदय व सूर्यास्त यहां के आकर्षण हैं। भुवनेश्वरी मंदिर, पक्षी विहार से पाहीजाला नीर महल, झील महल, हिंदू व बौध्द मूर्तियों के लिए पिलाक कमला सागर काली मंदिर, देवतामुरा की चट्टानों में खुदी मूर्तियां व दंतूर झील यहां के अन्य पर्यटन स्थल हैं।

      सूर्योदय का प्रदेश अरुणाचल :- अरुणाचल प्रदेश भारत का वह प्रदेश है जहां सब से पहले सूर्योदय होता है। प्रांत की ६०  प्रतिशत भूमि पर जंगल है। कई नदियां व नाले जलक्रीडा का निमंत्रण देते हैं। ऊंचे पर्वत, वन्य प्राणी, दुर्लभ जड़ी बूटियां व सुंदर दृश्य राज्य की धरोहर हैं। शायद यही ऐसा प्रदेश है जहां एक ही क्षेत्र में तेंदुआ और क्लाऊडेड तेंदुआ पाए जाते हैं।

      यहां के लोगों की प्राकृतिक शक्तियों में विशेष आस्था है। मेले व पर्व यहां के जनजीवन का आधार है। पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य स्थल तवांग है, जहां बहुत ठंड होती है। दिमंग बोमडिला, टिपी, मालुकपोंगा, इटानगर, दापोरिजे, आलौंग, पासीघाट, मालिनीथान, जिरोे तेजू आदि अन्य स्थान है।

      मिजोराम की सुहानी जलवायु :- मिजोराम की राजधानी आइजॉल है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य, नृत्य, त्योहार, जंगल, वन्य प्राणी, हस्तशिल्प वस्तुएं व सुहानी जलवायु सब को बहुत भाती है। चपचार कुट, मिमकुट और पालकुट यहां के मुख्य पर्व हैं। तामदिल झील, झरनों के लिए वानतांग, ट्रेकिंग के लिए फांगशुई छिमतुईपुई नदी पर मछली के शिकार हेतु सैहा व लुगंली यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। दंपा अभयारण्य फांगशुई व मुरलेन नेशनल पार्क और न्मेंगपुई अभयारण्य वन्य प्राणि पे्रमियों की पसंदीदा जगह हैं।

      मेघों का घर मेघालय :- मेघालय का अर्थ है मेघों का घर। बादलों और वर्षा के कारण यहां की जलवायु में नमी रहती है। विश्व में सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र चेरापूंजी यहंीं है। वाडर्स लेक, लेडी हाइदरी पार्क, स्वीट व एलीफेंट फाल्स गुफा यहां के मुख्य दर्शनीय स्थल है। बेंत बांस हथकरघा तथा हस्तशिल्प की वस्तुओं के उत्पादों से यहां के बाजार भरे होते हैं। मेघालय में एक विशेष बात यह है कि, सूचना तकनीकी में राज्य तेजी से विकास कर रहा है।

      पोलो सिखाने वाला मणिपुर :- दुनिया को पोलो खेल सिखाने वाला यह सुंदर राज्य है। १८९१ में एंग्लो-मणिपुरी युध्द में यह राज्य अंग्रेजों के अधीन आ गया, जिन्होंने मणिपुरियों से पोलो सीख। मणिपुरी लोग वर्षभर कोई न कोई त्यौहार मनाते रहते हैं। र्निगोला, ईद, रमजान, चाकाउना कुकी,  चिन मिजो त्यौहार, क्रिसमम तथा अन्य त्योहार हैं। गीत नृत्य इनकी जीवन शैली है। राज्य की ६७ प्रतिशत भूमि पर जंगल है। कई दुर्लभ जड़ी बूटियां यहां हैं। वन्य प्राणियों में क्लाऊडेड तेंदुआ तथा नाचने वाला हिरण यहां के जंगलों की विशेषता है। श्री गोविंदजी मंदिर, शहीद मीनार, मोईरंग, लोकतक झील, वार सीमेट्री आदि अनेक स्थल मणिपुर की घाटियों में देखे जा सकते हैं।

      अनूठी संस्कृति का धनी नगालैण्ड :-प्राकृतिक सौंदर्य और अनूठी संस्कृति का धनी प्रदेश है छोटासा नगालैण्ड। कला और शिल्प में दक्ष, संगीत और नृत्यप्रेमी तथा एक अलग प्रकार की, वेश भूषावाली सुंदर जनजातियां नगा लोगों से मिलना विचित्र अनुभव है। दीमापुर होते हुए तुहूनसांग जुनहेबोटो और फिर कोहिमा लौटे तो इस सरकुलर टुर में आप बहुत कुछ देख समझ सकते हैं। राजधानी कोहिमा सुुंदर झील स्टेशन है। वार सीमेट्री, कैथौलिक केथोड्रल, म्युजियम, मोन, माकोकचुंग फेन आदि मुख्य दर्शनीय स्थल हैं। ट्रेकिंग के लिए यहां जापकू पीक है। राज्य की १६ मुख्य जनजातियां तथा कई उपजातियां वर्ष भर कई त्यौहार मनाती नाचती और गाती हैं।

 आहार

      यहां के अधिकतर लोग मांसाहारी हैं। चावल का प्रयोग भी सभी राज्यों में खूब होता है। असम और मणिपुर का खानपान उत्तर भरत से बहुत मिलता जुलता है। यहां चावल के साथ मछली मांस और सब्जियां खाने का चलन है। त्रिपुरा में सब्जियां उबाल कर खाई जाती हैं। इनमें सूखी मछली जरूर डालते हैं। नगालैण्ड के लोग कई तरह के मांस चावलों के साथ चाव से खाते हैं।  

      अरुणाचल में सभी खानपान अलग है। अरुणाचल में सभी तरह की जनजातियों का खानपान अलग है। सब्जियों को उबाल कर केवल तेल व नमक डाल देते हैं। मांस भून कर खाते हैं।

      मेघालय के लोग मसालंों का प्रयोग करते हैं, पर इनका भोजन अधिक्तर अरुणाचल जैसा ही होता है। मिजोरम के लोगों का प्रिय व्यंजन हैं, बाई तथा मिलीजुली सब्जियां जो चावल के साथ खाई जाती हैं।

      पूर्वोतर भारत की यात्रा की यादों को संजोए रखने के लिए आप वहां से कई अनूठी चीजें ले सकते हैं। हस्तशील्प व हथकरघे पर बनी चीजें भी हैं। असम में मुंगा व पाट रेशम पर्यटकों को विशेष रूप से लुभाता है। चाय तथा बांस से बनी वस्तुएं भी बहुत बिकती हैं। नगालैण्ड की स्त्रियां कातने-बुनने और कपड़ा रंगने में दक्ष हैं। अन्य वस्त्रों के अलावा तीन टुकडों में बनने वाली शाल बहुत लोकप्रिय है। अरुणाचल प्रदेश में बेंत तथा बांस से बनी चूड़ियां लोकप्रिय हैं। यहां ज्यामितिक नमूने वाली शालें भी मिलती हैं। मणिपुर में हथकरघे पर बनी शालें, चादरें व कंबल मिलते हैं। मणिपुरी गुड़ियों का बाजार तो दूर दूर तक फैला है। विशेष कर राधा कृष्ण के रूप में बनी गुड़ियां।

      मिजोरम में पत्तों और बांस से बने वाटरफ्रूफ हैट मिलते हैं। त्रिपुरा में भी रेशम तथा बेंत और बांस से बनी चीजें बहुतायत में बिकती हैं। मेघालय में शालें, टोकरियां, बेंतों की चीजें, शहद, काली मिर्च, हलदी, अनानस और संतरे, स्थानीय फल मुख्य रूप से मिलते हैं।

      पूर्वोत्तर की सौंदर्य भरी दुनिया का मौसम, मिजाज और संस्कृति एक अलग ही नजारा पेश करते हैं। सात राज्यों के इस हरे भरे व खूबसूरत पूर्वोत्तर का सफर जीवन में एक बार तो करना ही चाहिए। पूर्वोत्तर में भारत का दर्शन होता है। वनवासी जीवन, नृत्य, संगीत, लोककलाएं व परंपराओं से रूबरू होने के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता और सरल जीवनशैली भी यहां के खास आकर्षण हैं।

 मो.: ०८८७९४१६१५०

 

 

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