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मदर टेरेसा द्वारा स्थापित ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ से 280 नवजात शिशुओं के लापता होने की सनसनीखेज खबर कुछ दिनों पूर्व सामने आई थी। रांची में इस संस्था के द्वारा संचालित ‘निर्मल हृदय’ संस्था से हुई बच्चों की बिक्री के तार देशव्यापी मानव तस्करी से जुडे होने का अनुमान लगाया जा रहा है। बच्चों की बिक्री केवल झारखंड में ही नहीं अपितु उत्तर प्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल के साथ अन्य राज्यों में भी होने की सम्भावना है। 2015 से 2018 के बीच ‘निर्मल हृदय’ में 450 कुंवारी गर्भवती लडकियों को दाखिल किया गया था। उनमें से केवल 170 बच्चों को ही बाल अधिकार आयोग के सामने प्रस्तुत किया गया। बाकी 280 बच्चे लापता हैं। इस मामले की पुलिस जांच के दौरान ‘मिशनरी ऑफ चैरिटी’ की नन ने यह स्वीकर किया कि वे बच्चों को बेचती थीं। इस कार्य के पीछे बडा रैकेट होने की सम्भावना जताई जा रही है। हिंदू धर्म की किसी भी आध्यात्मिक संस्था के गलत कार्यों का दिन-रात प्रचार-प्रसार करनेवाली मीडिया इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है।

ईसाई मिशनरियों तथा चर्च के द्वारा चलाई जाने वाली संस्थाओं का यह कोई पहला मामला नहीं है। ऐसी घटनाएं पहले भी कई बार हुई हैं परंतु उनको दबा दिया गया। इन पर खुल कर चर्चा बहुत कम ही हुई है। छोटे बच्चों पर होने वाले लैंगिक अत्याचार, नन के साथ होनेवाले बलात्कार, फादर तथा नन के बीच के शारीरिक सम्बंध, चर्च की सम्पत्ति में हुआ भ्रष्टाचार आदि घटनाएं आए दिन घटित हो रही हैं।  नैसर्गिक आकर्षणों का दमन करना ईसाई धर्म का कार्यक्रम रहा है। नैसर्गिक आकर्षण तथा धर्म के नाम पर किए जाने वाले उसके दमन के विरोधाभास में फंसकर फादर और नन का मन विकृत होना स्वाभाविक है। साथ ही धर्म के तत्वज्ञान को समझकर आंतरिक शोध करने की जगह वे धर्म विस्तार की ओर अधिक उत्साहित रहते हैं। अत: इस प्रकार की विकृतियां सामने आएंगी ही। ये विकृत कार्य केवल भारत के रांची में हीं नहीं वरन सर्वोच्च ईसाई धर्मपीठ ‘व्हेटिकन’ में भी विभिन्न रूपों में होते हैं। दक्षिण अमेरिका में गरीबों के लिए लडने वाले ‘पोप फ्रांसिस’ के इस पद पर आसीन होने के कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। उन्होंने 2013 में ‘व्हेटिकन’ में होने वाले अपराधों की जांच के लिए एक समिति की स्थापना की। इस जांच से कई गलत लेनदेन, भ्रष्टाचार तथा गैरकानूनी व्यवहारों की धक्कादायक खबरें सामने आईं। दो इटालियन पत्रकारों ने यह खबरें सामने लाईं, क्योंकि ‘व्हेटिकन’ से ऐसी खबरें बाहर नहीं निकलती। उन्हें वहीं दबा दिया जाता है। आयोग के द्वारा किए गए हिसाब में 10 करोड डॉलत की हेराफेरी का मामला सामने आया। ‘व्हेटिकन बैंक’ में पोप जॉन पॉल के नाम पर एक डेड अकाउंड में एक लाख बीस हजार डॉलर हैं। कार्डिनल टार्सिचिओ बर्टोन ने अपंग बच्चों के लिए मिले दो लाख डॉलर की तथा कार्डिनल जॉन पेल ने पांच लाख डॉलर की हेराफेरी की।

साम, दाम, दंड, भेद की नीति के आधार पर पोप का साम्राज्यवाद फैला। भारत में भी वह उसी नीति के आधार पर फैल रहा है। विदेशी पैसों के बल पर, छल-कपट और लोगों को बहला फुसलाकर धर्मांतरण करने के आरोपों को चर्च झुठला नहीं सकते। भारत में भी चर्च और उनके समुदायों के गैरकानूनी कार्यों की भरमार है। तमिलनाडु में चर्च ऑफ साउथ इंडिया के बिशप दोराई पर 4 करोड 25 लाख रुपयों का उपयोग व्यक्तिगत कार्यों के लिए करने का आरोप है। सफेदपोशों की बच्चों पर लैंगिक अत्याचार, नन-सिस्टर के साथ अनैतिक सम्बंध, सम्पत्ति का दुरुपयोग जैसी कई काली कहानियां हैं। पिछले कुछ वर्षों में हजारों बच्चे इन कामांध धर्मोपदेशकों के शिकार हुए हैं। इस प्रकार के कार्य सामने आने पर उसकी खबरें समाज तक न पहुंचने यह सावधानी चर्च जरूर रखते हैं।

चर्च दुनिया को सही राह पर चलने की दिशा देने वाला तथा येशू के मार्ग पर चलकर मुक्ति प्राप्त करने का तत्वज्ञान है, यह बता कर समाज में जो आभास निर्माण किया जाता है वह भी इस तरह के प्रकरों के कारण टूट जाता है। फिर प्रश्न यह उठता है कि मदर टेरेसा जैसे बडे-बडे संतों का नाम लेकर चलने वाला यह आंदोलन गरीब पिछडे वर्ग को सही राह दिखाता है या उसका केवल आभास निर्माण करके ईसाई धर्म का जैसा चाहे वैसा प्रचार करता है।  अध्यात्म की मार्केटिंग करने के लिए मदर टेरेसा जैसी व्यक्ति एक ब्रांड बन जाती है। संतों की विचारधारा स्वीकारने, उस पर चिंतन करने के स्थान पर उनकी चापलूसी शुरू हो जाती है। चर्च के द्वारा किए गए गैरकानूनी कार्य जब सामने आते है तो तथाकथित सेक्यूलर लोग उपासना के अधिकार तथा ईसाई संतों के त्याग पर भाषण देने लगते हैं।

भारत में चर्च हमेशा ही किसी न किसी कारण पिनपिनाते ही रहते हैं। ‘हमारे साथ छल किया जाता है’, इस ऐक ही मुद्दे को लेकर वे राजनीति करते रहते हैं। प्रभू के छोटे-छोटे बच्चों पर चर्च में दुष्कर्म किया गया, नवजात शिशुओं की बिक्री की गई फिर भी शायद प्रभु के राज में उनको क्षमा मिल जाए। क्योंकि उनके धर्म में वैसी व्यवस्था है। ऐसे कुछ उदाहरण भी हमारे सामने हैं। उनके द्वारा किए गए घृणित अपराध के लिए उन्हें माफी न देकर भारतीय कानून के अनुसार जो दंड निर्धारित किया गया है, वही मिलना आवश्यक है।

 

 

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