वरिष्ठ विचारक एवं हिंदी विवेक के लेखक डॉ. अशोक जी मोडक का 85 वर्ष की आयु में कल रात्रि मुम्बई के पवई स्थित आवास पर निधन हो गया। वे मुम्बई विद्यापीठ में राज्यशास्त्र के पूर्व प्राध्यापक व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे। डॉ. अशोक जी मोडक का अंतिम संस्कार हिंदू धर्म के अनुसार पूरे विधि विधान से शनिवार को मुम्बई में किया जाएगा। वे एक प्रसिद्ध अभ्यासक थे। उन्होंने अनेक ग्रंथ भी लिखें। रशियन भाषा पर उनका प्रभुत्व था और साथ ही अंग्रेजी, हिंदी, मराठी व अन्य भाषाओं के एक कुशल वक्ता भी थे।
‘समग्र मानवतावाद: एक पर्यायी विकास प्रतिमान’ उनका एक विशेष उल्लेखनीय ग्रंथ है। पिछले एक वर्ष से वे कैंसर के रोग से पीड़ित थे। उनके जाने के बाद उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा व बेटी भी हैं।

डॉ. अशोक राव जी की जीवन यात्रा :
1940 में जन्मे अशोकराव जी ने एमए इकोनॉमिक्स और एम.ए. पोलटिकल साइंस की से किया और पीएचडी जेएनयू से किया।
सोवियत इकोनॉमिक एआइडी टू इंडिया ये आपका पीएचडी का विषय रहा।
इस कारण से वे सोवियत रशिया के आर्थिक और राजकीय विषयों के विशेषज्ञ माने गए।
1963 से 1994 तक आपने प्राध्यापक के नाते कार्य किया।
2015 में भारत सरकार ने उन्हें नेशनल रिसर्च प्रोफेसर के पद हेतु 5 वर्ष के लिए सम्मानित किया।
प्रखर बुद्धिमत्ता के धनी, कार्यकर्ताओं की सम्भाल करनेवाले अशोकराव जी ने विविध विषयों पर अनुसंधान करते हुए 104 शोध निबंध और 40+ पुस्तके लिखी हैं।
देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विविध विश्वविद्यालयों में व्याख्यान दिए हैं।
शिक्षा क्षेत्र में निरपेक्ष भाव से कार्यरत रहते हुए अध्यापन, अनुसंधान तथा अभाविप के माध्यम से विद्यार्थी/युवा विकास में सक्रीय रहे।
गुरु घासीदास केंद्रिय विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के कुलाधिपती (चांसलर) का महत्वपूर्ण दायित्व आपने सम्भाला।
महाराष्ट्र विधान मंडल में ग्रेजुएट कांस्टीट्यूएंसी से विधायक भी आप रहे। वे कोंकण स्नातक क्षेत्र के प्रतिनिधि और श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार विजेता भी थे।
दो दिन पूर्व ही आपको चतुरंग प्रतिष्ठान इस महाराष्ट्र की सुप्रतिष्ठित संस्था का ‘जीवन गौरव पुरस्कार’ भी मिला था।
ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति व सद्गति प्रदान करें। हिंदी विवेक परिवार की ओर से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

