| बिहार विधानसभा की बड़ी जीत, बड़ी अपेक्षा भी साथ लाई है, अत: जनता की इच्छा-आकांक्षा को पूर्ण करना राज्य सरकार का दायित्व है। यदि सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरती है और राज्य का विकास सुनिश्चित करती है तो सही अर्थों में बिहार भी विकसित भारत के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। |
बिहार विधानसभा चुनाव में मिले निर्णायक जनादेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की जनता अब विकास, सुशासन और समृद्धि को अपने भविष्य का आधार मानती है। यह जनादेश सरकार पर एक बड़ा दायित्व डालता है कि वह बिहार को आर्थिक रूप से शक्तिशाली, सामाजिक रूप से समावेशी और आत्मनिर्भर राज्य बनाए। उपजाऊ मिट्टी और परिश्रमी कामगारों के बाद भी बिहार आज पलायन और दुर्दशा के लिए जाना जाता है। इस स्थिति को बदलने के लिए शिक्षा, रोजगार, औद्योगिक पुनरुद्धार, डिजिटल पहल, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन उत्थान को एकीकृत करते हुए एक समग्र विकास का रोडमैप तैयार करना अनिवार्य है।
शिक्षा और कौशल विकास: भविष्य की नींव
बिहार के जनसांख्यिकीय लाभांश का पूरा लाभ उठाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास में निवेश सबसे महत्वपूर्ण है।
वर्तमान उपलब्धियां: सरकार उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को उन्नत कर रही है और सात निश्चय पार्ट-2 (र्डीींवशपीं उीशवळीं उरीव डलहशाश) के अंतर्गत छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध करा रही है। बिहार कौशल विकास मिशन के अंतर्गत आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में उद्योग-केंद्रित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

भविष्य की आवश्यकताएं
- डिजिटल शिक्षा का विस्तार: ग्रामीण क्षेत्रों में ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म और वर्चुअल क्लासरूम स्थापित करके शिक्षा की खाई को पाटना।
- अनुसंधान और नवाचार : विश्वविद्यालयों को अनुसंधान का केंद्र बनाने के लिए वित्तीय सहायता और उद्योग सहयोग को बढ़ावा देना।
- शिक्षकों का प्रशिक्षण: नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण देना।
रोजगार सृजन और पलायन पर नियंत्रण
रोजगार सृजन और पलायन पर नियंत्रण पाना बिहार के विकास की राह में सबसे बड़ी चुनौती है।
वर्तमान प्रयास: बिहार रोजगार मिशन के अंतर्गत उद्योगों को आकर्षित करने के लिए नीतियां बनाई गई हैं। खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा और आईटी जैसे श्रम-सघन उद्योगों को सब्सिडी और टैक्स लाभ दिए जा रहे हैं। मुद्रा योजना और स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
भविष्य का रोडमैप
औद्योगिक क्लस्टर विकास: जिला-वार औद्योगिक क्लस्टर विकसित करना (जैसे मुजफ्फरपुर में लीची प्रसंस्करण) ताकि स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार पैदा हो सके।
भू-उपयोग नीति में सुधार: उद्योगों के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना।
ग्रामीण उद्यमिता: ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि-आधारित उद्योगों और एमएसएमई के लिए विशेष पैकेज और प्रशिक्षण देना, जिससे पलायन पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।
औद्योगिक पुनरुद्धार: कृषि-आधारित और पारम्परिक उद्योगों का विकास
बिहार में औद्योगीकरण को गति देने के लिए नए उद्योगों को आकर्षित करने के साथ-साथ राज्य के पारम्परिक और कृषि-आधारित उद्योगों में नई जान फूंकनी होगी।
कृषि-आधारित उद्योगों पर जोर
- चीनी और इथेनॉल उद्योग: बंद पड़ी चीनी मिलों का पुनरुद्धार करना और उत्पादन क्षमता बढ़ाना। इथेनॉल उत्पादन संवर्धन नीति 2021 लागू करके गन्ना, मक्का और टूटे चावल से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना, जिससे किसानों की आय बढ़े और हरित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिले।
- खाद्य प्रसंस्करण: लीची, मखाना और आम जैसे उत्पादों के लिए कोल्ड स्टोरेज चेन और प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित करने हेतु प्रोत्साहन देना।
- उर्वरक एवं भारी उद्योग: बंद पड़े यूरिया कारखानों के पुनरुद्धार या नई उर्वरक इकाइयों की स्थापना की सम्भावनाओं पर काम करना, ताकि किसानों को समय पर यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
- पुराने औद्योगिक केंद्रों का पुनर्जीवन: डालमियानगर (रोहतास) जैसे पुराने औद्योगिक केंद्रों की पूंजीगत परिसम्पत्तियों का उपयोग करते हुए नए उद्योग पार्क, लॉजिस्टिक्स हब या एमएसएमई इकाइयां स्थापित करने के लिए विशेष पुनरुद्धार योजना लाना।

मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी: विकास की धमनियां
औद्योगिक और कृषि उत्पादों को बाजार तक तेजी से पहुंचाने के लिए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी अत्यंत आवश्यक है।
- सड़क, रेलवे और वायुमार्ग: ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता सुधारना, एक्सप्रेस-वे के निर्माण को गति देना। उद्योगों को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ना। पटना के दबाव को कम करने के लिए दरभंगा, गया और पूर्णिया जैसे हवाई अड्डों की कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाना।
- जलमार्गों का विकास: गंगा नदी पर राष्ट्रीय जलमार्ग-(छथ-1) का लाभ उठाते हुए पटना, गायघाट और मुंगेर में आधुनिक टर्मिनलों और मल्टीमॉडल हबों का तेजी से विकास करना, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आए।
डिजिटल बिहार पहल: क्रांति का उत्प्रेरक
डिजिटल बिहार पहल: सुशासन, सेवा वितरण और आर्थिक विकास को बदलने वाली सबसे महत्वाकांक्षी योजना है।
वर्तमान प्रभाव: ई-गवर्नेंस के विस्तार से भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण एवं सरकारी सेवाओं की ऑनलाइन डिलीवरी से पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार में कमी आई है तथा सरकारी कार्यालयों की कार्यक्षमता बढ़ी है।
भविष्य की आवश्यकताएं
- व्यापक डिजिटल बुनियादी ढांचा: भारत नेट परियोजना के अंतर्गत हर गांव और घर तक फाइबर-टू-होम और सार्वजनिक स्थानों पर वाई-फाई हॉटस्पॉट उपलब्ध कराना।
- डिजिटल कौशल और साक्षरता: ग्रामीण जनसंख्या और महिलाओं को डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण देना।
- नवोन्मेषी ई-गवर्नेंस: दूरदराज के क्षेत्रों में टेली-मेडिसिन और टेली-एजुकेशन को लागू करना तथा कृषि में एग्री-टेक (मौसम की भविष्यवाणी, मिट्टी की जांच) का उपयोग करना।
- डेटा आधारित नीति निर्माण: ओपन डेटा प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरकारी डेटा को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना।
पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन का उत्थान
विकास को टिकाऊ बनाने के लिए पर्यावरण और रोजगार सृजन के लिए पर्यटन को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
पर्यावरण के लिए रोडमैप
जल-जीवन-हरियाली मिशन को और मजबूती देना और हरित आवरण में वृद्धि करना।
आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा (बाढ़ और भूकंप के जोखिम को देखते हुए) तैयार करना।
हरित ऊर्जा (सौर ऊर्जा) को प्रोत्साहन देना और जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देना।
पर्यटन के लिए रोडमैप
बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत (बौद्ध, जैन, सिख सर्किट) का उपयोग करते हुए इसे वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाना।
इको-टूरिज्म (जैसे राजगीर नेचर सफारी) को बढ़ावा देना। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को गाइड और आतिथ्य सेवाओं में प्रशिक्षित करना, जिससे स्थानीय रोजगार सृजित हो सके। विरासत स्थलों के संरक्षण पर निवेश करना और राज्य स्तरीय पर्यटन प्रोत्साहन बोर्ड के माध्यम से आकर्षक मार्केटिंग करना।
बिहार की समग्र प्रगति के लिए उपरोक्त सभी छह स्तम्भों (शिक्षा, रोजगार, उद्योग, डिजिटल पहल, पर्यावरण और पर्यटन) के बीच गहरा समन्वय आवश्यक है। शिक्षा गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन तैयार करेगी, डिजिटल क्रांति सुशासन लाएगी, रोजगार पलायन रोकेगा, पर्यावरण विकास को टिकाऊ बनाएगा और पर्यटन अर्थव्यवस्था को बल देगा। सामूहिक प्रयास और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति ही एक सशक्त, समृद्ध और गौरवशाली बिहार के पुनरुत्थान की नींव रखेगी।
– धीप्रज्ञ द्विवेदी

