| राज ठाकरे ने ऐसा ही एक सवाल पूछा: ‘वाढवण बंदर बना, वह जरूरत थी, यह मैं समझ सकता हूं। लेकिन अब वाढवण बंदर के बगल में एयरपोर्ट भी बन रहा है। वाढवण एयरपोर्ट किसके फायदे के लिए बनाया जा रहा है? इसमें मुंबई का कार्गो पलटकर मुंबई से बाहर ले जाना, अडानी वगैरह का एंगल फेंका और साहब का काम हो गया!’ ‘ |
‘राज ठाकरे जैसे राजनेता अध्ययन के अभाव में एक बार जवाब देते समय तो लड़खड़ा जाते हैं, लेकिन सवाल पूछते वक्त ऐसा सवाल पूछते हैं कि बुद्धि भी भेद दे! अब ऐसा सवाल राज ठाकरे ने पूछा है तो उसे ट्रोलिंग या उन्हीं की शैली में (यानी ‘पाणचट कोट्या’ करके) इग्नोर करने के बजाय, जिनकी बुद्धि भेदने का उन्होंने प्रयास किया होता है, उस आम जनता के सामने तथ्य रखकर उस सवाल का निपटारा किया जाना चाहिए।
आज राज ठाकरे ने ऐसा ही एक सवाल पूछा: ‘वाढवण बंदर बना, वह जरूरत थी, यह मैं समझ सकता हूं। लेकिन अब वाढवण बंदर के बगल में एयरपोर्ट भी बन रहा है। वाढवण एयरपोर्ट किसके फायदे के लिए बनाया जा रहा है? इसमें मुंबई का कार्गो पलटकर मुंबई से बाहर ले जाना, अडानी वगैरह का एंगल फेंका और साहब का काम हो गया!’ ‘
वाढवण को एयरपोर्ट की जरूरत नहीं है’ यह लोगों को कॉन्विंस नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए अब कन्फ्यूज करने का यह आसान मोडस ऑपरेंडी है!
अच्छा! मैं बताता हूं:
1.) वाढवण बंदर पूरा होने पर यह भारत का सबसे बड़ा बंदर और दुनिया के टॉप-10 मेगा पोर्ट्स में से एक होगा। ऐसी परियोजना के लिए एयरपोर्ट लक्जरी नहीं, बल्कि अनिवार्य बुनियादी सुविधा है। मेगा पोर्ट यानी मल्टी-मोडल हब का समीकरण है। आज के दुनिया में बड़े बंदर केवल जहाजों तक सीमित नहीं रहते। बंदर, रेल, सड़क, बुलेट-ट्रेन, एयरपोर्ट का वह एक इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स हब होता है! प्रचार के लिए तो कतई नहीं जा सकते, एक बार रॉटरडैम, सिंगापुर, शंघाई जाकर देखकर आओ।

2.) इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर्स, फार्मा, मेडिकल इक्विपमेंट, डिफेंस उपकरण ऐसी कई चीजें समुद्र के रास्ते आती हैं, लेकिन आगे हवाई मार्ग से ले जानी पड़ती हैं। इसके लिए पास में एयरपोर्ट अत्यंत जरूरी होता है! मुंबई आया कार्गो वाढवण नहीं ले जाना है साहब, बल्कि वाढवण आया माल भी मुंबई नहीं ले जाना है!
3.) वैश्विक कॉर्पोरेट्स, सीईओ, तकनीकी एक्सपर्ट्स वाढवण बंदर पर आते-जाते रहेंगे। इसमें अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां, ग्लोबल इन्वेस्टर्स, तकनीकी विशेषज्ञों की आवाजाही लगातार बनी रहेगी। उनका नवी मुंबई एयरपोर्ट या मुंबई पर निर्भर रहना अव्यावहारिक है।
4.) वाढवण अरब सागर पर एक सामरिक स्थान है। नौसेना, कोस्ट गार्ड, लॉजिस्टिक सपोर्ट, आपातकालीन हरकतों के लिए एयर स्ट्रिप/एयरपोर्ट राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत है।
5.) क्रू चेंज (Crew Change) और शिपिंग ऑपरेशन्स के बारे में तुम्हें कुछ पता हो ऐसा मुझे नहीं लगता, लेकिन हर साल हजारों जहाज कर्मचारी बदलने पड़ते हैं। आज सिंगापुर इसीलिए ग्लोबल हब है। एयरपोर्ट न होने पर वाढवण ‘ट्रांजिट पोर्ट’ नहीं बन सकता।
6.) आपातकालीन और आपदा प्रबंधन
तैल रिसाव, चक्रवात, जहाज दुर्घटना, पर्यावरणीय खतरों के समय हेलीकॉप्टर, कार्गो विमान, रेस्क्यू ऑपरेशन्स के लिए पास का एयरपोर्ट जीवन-मरण का सवाल बन जाता है।
7.) महाराष्ट्र को मुंबई का बोझ कम करना नहीं है, बल्कि मुंबई को सहारा देना है। मुंबई पोर्ट और मुंबई एयरस्पेस ओवरलोड हो चुका है। मुंबई एयरपोर्ट पर आज कभी-कभी विमान उड़ान की कतार में 15वें, 20वें स्थान पर होता है! कई बार तो ATC क्लीयरेंस न होने से सभी यात्री बैठकर बोर्डिंग खत्म होने के बाद भी विमान, पायलट और यात्री अपनी जगह पर ही इंतजार करते बैठे रहते हैं।
8.) सिर्फ बंदर तक ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, एविएशन सर्विसेज, MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर, ओवरहॉल) में लाखों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन एयरपोर्ट बनने से होने वाला है। पालघर जिले के युवाओं को नौकरियां मिलेंगी, इसका तुम्हें आनंद क्यों नहीं है? कल-परसों तक राज्य के सबसे पिछड़े जिलों में से एक रहे पालघर जिले का चेहरा-मोहरा बदल रहा होगा तो तुम्हें क्या तकलीफ है साहब? इसी पिछड़ेपन के कारण इस जिले में बड़े पैमाने पर मिशनरी फल-फूल गए, उन्हें भी एयरपोर्ट नहीं चाहिए। उनकी रीति तुम अपना रहे हो, यह संयोग है या…?
9.) भविष्य के विस्तार को आज ही देखा जाता है।
ऐसी परियोजना 50-100 वर्षों का विचार करके की जाती है। तुम उसका लोड मत लो साहब। तुम सिर्फ ‘आज का’ विचार करने वाले हो। इसलिए पिछले 4 चुनावों में तुम कभी इनके पक्ष में, कभी दूसरी तरफ, कभी उम्मीदवार न देकर प्रचार तो कभी डर-मिलन – ऐसे प्रयोग करते रहे हो। 50-100 वर्षों का विषय तुम्हें नहीं समझ आएगा।
10.) इस क्षेत्र में चीन, सिंगापुर, दुबई हमसे आगे क्यों हैं? क्योंकि वहां बंदर, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, पॉलिसी सभी चीजों को एक साथ जोड़कर एक इकोसिस्टम खड़ा किया हुआ देखने को मिलता है। भारत पहली बार ऐसा पूरा इकोसिस्टम खड़ा कर रहा है! _____ साहब, समाज के काम आएगा ऐसा, सकारात्मक और चार लोग तारीफ करेंगे ऐसा एक भी उल्लेखनीय काम करने में तुम सफल नहीं हुए। जो कर रहे हैं, उन्हें करने दो! राजनीति और राष्ट्रहित में फर्क है ओ साहब।
अब? हाथ की घड़ी, मुंह पर उंगली क्यों??
– वेद कुमार

