अक्सर हम RSS या ‘संघ’ के बारे में सुनते हैं, लेकिन क्या हम वास्तव में इसके इतिहास, कार्यशैली और उद्देश्य को गहराई से जानते हैं? आइए आज जानते हैं दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन के बारे में कुछ विशेष बातें…..
1. स्थापना और इतिहास (Foundation):
संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने 27 सितंबर 1925 (विजयादशमी) के दिन नागपुर में की थी। उद्देश्य स्पष्ट था – हिंदू समाज को संगठित करना और भारत को परम वैभव पर ले जाना।
2. क्या है ‘शाखा’? (The Shakha):
संघ की कार्यप्रणाली का आधार ‘शाखा’ है। यह किसी खेल के मैदान में प्रतिदिन एक घंटे का मिलन है।
शारीरिक: खेल, योग और व्यायाम (स्वस्थ शरीर के लिए)।
बौद्धिक: देश-दुनिया की चर्चा, गीत और सुभाषित (मानसिक विकास के लिए)।
प्रार्थना: “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे” के साथ भारत माता की वंदना।
3. उद्देश्य: व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण (Objective):
RSS का मानना है कि महान राष्ट्र का निर्माण इमारतों से नहीं, बल्कि चरित्रवान नागरिकों से होता है। संघ का मुख्य कार्य “व्यक्ति निर्माण” (Character Building) है। एक अनुशासित और देशभक्त नागरिक ही देश की सेवा कर सकता है।
4. सेवा कार्य (Social Service):
चाहे प्राकृतिक आपदा हो (बाढ़, भूकंप) या महामारी (जैसे COVID-19), स्वयंसेवक (Swayamsevaks) सबसे पहले मदद के लिए पहुँचते हैं।
सेवा भारती: देशभर में हजारों सेवा प्रकल्प (स्कूल, अस्पताल, स्वावलंबन केंद्र) चलाती है।
वनवासी और पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य पहुँचाना संघ की प्राथमिकता है।
5. प्रमुख शब्दावली:
स्वयंसेवक: वह जो अपनी इच्छा से राष्ट्र की सेवा करे।
सरसंघचालक: संघ के सर्वोच्च मार्गदर्शक (वर्तमान में डॉ. मोहन भागवत जी)।
गणवेश: संघ की पहचान (सफेद शर्ट, भूरी पैंट, काली टोपी)।
6. संगठन की विशालता:
आज संघ से प्रेरित कई संगठन समाज के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जैसे – विद्यार्थी परिषद (ABVP), विश्व हिंदू परिषद (VHP), मजदूर संघ (BMS), विद्या भारती (शिक्षा), आदि।
निष्कर्ष:
RSS अनुशासन, समर्पण और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक है। यह भारत की संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हुए आधुनिक भारत के निर्माण में अपना योगदान दे रहा है।
“संगठन में ही शक्ति है।”

