| भारत और श्रीलंका की सह मेजबानी में टी-20 विश्व कप का 2026 आयोजन 7 फरवरी से आरम्भ हुआ जो आगामी 8 मार्च तक चलेगा। ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि पाकिस्तान 15 फरवरी को होनेवाले लीग मैच में भारत के खिलाफ नहीं खेलेगा। |
टेस्ट क्रिकेट का प्रारूप पांच दिनों तक खिलाड़ी के कौशल, मानसिक सहनशक्ति और धैर्य की परीक्षा लेता है। क्रिकेट के जानकार टेस्ट मैचों को पसंद करते हैं, लेकिन एक दिवसीय क्रिकेट, यानी पचास ओवर के मैच के प्रारूप ने इस खेल में अलग रंग भर दिया था। रंगीन जर्सी पहने खिलाड़ियों की तस्वीरें दुनिया भर के टेलीविजन पर दिखाई देने लगीं और प्रसारण के जरिए क्रिकेट में पैसा आने लगा।
एक दिवसीय क्रिकेट के लगातार आयोजनों के बाद भी वर्तमान में यह स्वीकार करने से किसी को कोई परहेज नहीं होना चाहिए कि निर्विवाद रूप से वर्तमान क्रिकेट युग में का सबसे बड़ा आकर्षण टी-20 का प्रारूप है। यद्यपि इसके आलोचक कहते हैं कि प्राय: इसमें खिलाड़ियों की तकनीक कला पीछे रह जाती है और मनचाहे शॉट खेलने की प्रवृत्ति इसे भाग्य और कौशल पर अधिक निर्भर बना देती है, लेकिन लगातार आलोचना का सामना करने के बाद भी यह अब क्रिकेट का सबसे लोकप्रिय प्रारूप बन कुका है।
इसे स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए कि यह प्रारूप अब क्रिकेट के विकास में सबसे मह्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस प्रारूप में दुनिया भर में खेले जानेवाले पेशेवर लीगों ने नए खिलाडियों को न केवल मंच प्रदान किया बल्कि उन्हें आर्थिक सुरक्षा के मंच पर भी समृद्ध किया। वर्ष 2007 में इसके पहले विश्व कप का आयोजन हुआ। कहना न होगा कि इस आयोजन के बाद इसकी लोकप्रियता में चार चांद लगने की शुरुआत लगातार जो हुई वो आज तक बिना किसी भी प्रकार के बाधा के जारी है। इस क्रम में भारत और श्रीलंका की सह मेजबानी में इस वर्ष टी-20 विश्व कप का आयोजन 7 फरवरी से आरम्भ हो रहा है जो 8 मार्च तक चलेगा।
यह भी सच है कि एशियाई देशों के आपसी कटु राजनीतिक सम्बंधों के कारण वर्तमान खेल परिदृश्य में ऐसी कोई भी वैश्विक अथवा एशियाई टूर्नामेंट आयोजित नहीं हुई है जो मुख्य्त: राजनीतिक विवाद से ग्रस्त नहीं रही हो। क्रिकेट खेलनेवाले राष्ट्रों के आपसी जटिल राजनीतिक सम्बंधों ने इस खेल की चमक फीकी करने में कोई कसर नहीं छोड़ती है। यह भी एक सच है कि अधिकतर एशियाई देशों यथा भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश के बीच त्रिकोणीय परिस्थिति जनक विषम राजनीतिक सम्बंध ही इस खेल को अधिकांश विवादाग्रस्त बना देती है।
इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है। आईपीएल से बांग्लादेश के खिलाड़ी के निष्कासन के बाद बांग्लादेश ने आंखे तरेरी तो आश्चर्यजनक रूप से बहुत जल्दी पाकिस्तान भी उनके खेमे में खुलकर आ गई है। दरअसल पाकिस्तान को कोई ऐसा बहाना चाहिए था जिससे उसे भारत के खिलाफ खेलना न पड़े। हाथ न मिलाना और नकवी के हाथों से विजेता ट्रॉफी न लेना इसके मूलभूत कारणों में हो सकता है। पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी भी अपने बोर्ड के पक्ष में हैं। भारत सरकार को तो कोई आपत्ति नहीं है। हमारे निर्भीक खिलाड़ी पूरी तरह किसी भी देश का सामना करने के लिए तैयार हैं।

इन देशों में पाकिस्तान भी शामिल है। अब पाकिस्तान अंतिम समय तक निर्णय बदल ले तो कोई आश्चर्य नहीं क्योंकि इन मैचों से आयोजक क्रिकेट बोर्ड की आर्थिक स्वास्थ पर भी असर होता है। अब देखना यह है कि आईसीसी और दूसरा क्या कदम उठाता है? बांग्लादेश को तो औकात बता दिया गया है। अब पाकिस्तान की बारी है। उसे भी बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। एक तो आईसीसी पहले उनकी यह शर्त मानकर चल रही है कि उनके और भारत के बीच खेले जानेवाले मैच तीसरे स्थान पर आयोजित किए जाएं।
अब उनका यह निर्णय कि वो इस विश्व कप में 15 फरवरी को होनेवाले लीग मैच में भारत के खिलाफ नहीं खेलेगी। यह स्वागत योग्य नहीं है और क्रिकेट जैसे खेल के लिए शुभ संकेत भी है। राजनीतिक कटु सम्बंध के एवज में अपने देश के नागरिकों के जान गंवाने की भावना से आहत हमारे खिलाड़ियों ने भले ही हाथ न मिलाए हों मगर बल्ले और गेंद के संघर्ष से नहीं डरते हैं। यह बात आईसीसी अच्छी तरह जानती है। वो अगर पाकिस्तान को बैन कर दे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
-राजीव रोहित

