विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। यह हमारे दैनिक जीवन की हर सुविधा, हर समाधान और हर प्रगति में समाहित है। एआई इम्पैक्ट समिट में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने सम्बोधन में तकनीकी को लेकर भारत की इस प्रतिबद्धता को जोर देकर दोहराया है।
प्रत्येक युग में तकनीक ने मनुष्य के श्रम को कम किया, समय की बचत की और जीवन को अधिक सुगम-व्यवस्थित बनाया है। आज हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के युग में प्रवेश कर चुके हैं, जहां मशीनें केवल आदेश का पालन ही नहीं कर रहीं बल्कि अपने अपार डाटा संग्रह और पूर्व के दिशा-निर्देशों के आधार पर सीख और निर्णय भी ले रही हैं। ऐसे समय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (28 फरवरी) हमें यह सोचने का अवसर देता है कि तकनीकी विज्ञान ने हमारे दैनिक जीवन को कितना सरल बनाया है और आने वाले भविष्य में इसकी भूमिका कितनी व्यापक होने वाली है। तकनीकी विज्ञान का सबसे प्रत्यक्ष योगदान हमारे दैनिक जीवन की सुविधाओं में दिखाई देता है।

सुबह उठते ही मोबाइल फोन के अलार्म से दिन की शुरुआत होती है। ऑनलाइन बैंकिंग से लेन-देन कुछ सेकंड में हो जाता है। डिजिटल भुगतान प्रणाली, विशेषकर भारत में विकसित यूपीआई प्लेटफॉर्म ने नकदी पर निर्भरता कम कर दी है। वित्त मंत्रालय ने हाल ही में एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी की है। सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों में यूपीआई सबसे पसंदीदा लेन-देन माध्यम बनकर उभरा है। 57 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि वे लेन-देन में यूपीआई का उपयोग करते हैं। वहीं, रेलवे टिकट बुकिंग से लेकर अस्पताल की अपॉइंटमेंट तक सब कुछ ऑनलाइन सम्भव हो गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में स्मार्ट क्लास, वर्चुअल लर्निंग और डिजिटल पुस्तकालयों ने ज्ञान को सार्वभौमिक बनाया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी विज्ञान का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। आधुनिक डायग्नोस्टिक मशीनें, रोबोटिक सर्जरी और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड ने चिकित्सा सेवाओं को अधिक सटीक और सुलभ बनाया है। भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना और डिजिटल हेल्थ मिशन तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को आम नागरिक तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने देशभर में 79.91 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट्स बनाकर एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त की है।

इसी प्रकार कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक, सटीक सिंचाई प्रणाली और जैव-प्रौद्योगिकी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई है। उद्योगों में ऑटोमेशन और रोबोटिक्स ने उत्पादन को तेज और गुणवत्तापूर्ण बनाया है। कृषि में प्रौद्योगिकी का उपयोग कीटनाशक, उर्वरक और उन्नत बीज का उपयोग जैसे कृषि सम्बंधी विभिन्न पहलुओं में किया जा रहा है। भारत सरकार ने तकनीकी विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्वीकार किया है। डिजिटल इंडिया अभियान ने सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया है। मेक इन इंडिया ने विनिर्माण क्षेत्र को सशक्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। स्टार्टअप इंडिया और अटल इनोवेशन मिशन जैसी पहलें इस क्षेत्र में बड़े बदलाव लेकर आई हैं, जिनका उद्देश्य देश में नवाचार एवं उद्यमिता की संस्कृति को प्रोत्साहित करना है।
भविष्य में तकनीकी विज्ञान की उपयोगिता और भी बढ़ेगी। इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 5जी और क्वांटम कम्प्यूटिंग जैसी तकनीकें उद्योग, रक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएंगी। स्मार्ट सिटी परियोजनाएं शहरी जीवन को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाएंगी। जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी वैज्ञानिक अनुसंधान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वही, भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियां बताती हैं कि तकनीकी विज्ञान में निरंतर विकास मानव जीवन की सुगमता के साथ-साथ राष्ट्रीय गौरव और आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी है।
अब तकनीकी विकास की बात की जा रही है तो यहां भारत की मेजबानी में आयोजित की जा रही इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उल्लेख आवश्यक हो जाता है। इस समागम में 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों के अलावा 500 से ज्यादा ग्लोबल एआई लीडर्स ने भाग लेकर मानवता के विकास के लिए एआई की भूमिका का खाका तैयार किया है। यह ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला प्रमुख वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन है, जो समावेशी और विकास-केंद्रित एआई में भारत की नेतृत्व भूमिका को प्रदर्शित करता है।

यह समिट भारतीय मूल्यों पर आधारित है, विशेष रूप से सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय के आदर्श पर। वास्तव में यह समिट इसलिए अहम है क्योंकि अब एआई सिर्फ ऐप्स तक सीमित नहीं रहा। स्वास्थ्य, खेती, शिक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी इसका असर दिख रहा है। सम्मेलन में एआई के आर्थिक असर से लेकर नियम और नवाचार के बीच संतुलन कैसे बने, इस पर भी विचार किया गया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता डेटा का विश्लेषण कर भविष्यवाणी करने, निर्णय लेने और जटिल समस्याओं का समाधान सुझाने में सक्षम है।
तकनीकी विकास के साथ कुछ चुनौतियां भी आती हैं। डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, रोजगार के स्वरूप में बदलाव और डिजिटल विभाजन जैसे प्रश्न हमारे सामने खड़े हैं। एआई और ऑटोमेशन कुछ पारम्परिक नौकरियों को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन साथ ही नए कौशल और नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। इसलिए आवश्यक है कि हम तकनीक को अपनाने के साथ-साथ मानव मूल्यों और नैतिकता को भी प्राथमिकता दें।
विज्ञान का उद्देश्य केवल मशीन बनाना नहीं बल्कि मानव जीवन को बेहतर बनाना है। तकनीकी विज्ञान ने हमारे जीवन को सरल, तेज और अधिक जुड़ा हुआ बना दिया है। भविष्य में इसकी उपयोगिता और भी व्यापक होगी, विशेषकर एआई के माध्यम से। यदि हम अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास पर निरंतर ध्यान दें तो भारत न केवल तकनीकी उपभोक्ता बल्कि तकनीकी नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर सकता है।
–डॉ. रविंद्र सिंह भड़वाल


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