हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी दिव्यांग कल्याणकारी संस्था में एकात्मिक संस्कार वर्ग का आयोजन किया गया है। इस संस्कार वर्ग का उद्घाटन महादजी शिंदे, नगर संघ चालक दत्ताजी अंबुलकर एवं हरिभक्त परायण बाळा महाराज गव्हाणे के हाथों संपन्न हुआ।
संस्कार वर्ग का यह 26वां वर्ष है और इस संस्कार वर्ग में दिव्यांग कल्याणकारी संस्था के लगभग 150 बच्चे तथा आसपास के विभिन्न विद्यालयों के लगभग 150 सामान्य विद्यार्थी, इस प्रकार कुल 300 बच्चों का यह संस्कार वर्ग लगभग 15 दिनों तक संस्था के मैदान में आयोजित किया जाएगा।

दत्ताजी अंबुलकर ने अपने भाषण में बच्चों को ध्रुव बालक की कथा सुनाई तथा हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय अब्दुल कलाम की कुछ स्मृतियां और प्रसंग भी बताए। उन्होंने कहा कि केवल बचपन में अच्छे संस्कार मिलने के कारण ही इन दोनों महान व्यक्तियों ने समाज में अपना अडिग स्थान बनाया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से नियमित रूप से संस्कार वर्ग में सहभागी होने का आवाहन किया।
उद्घाटन कार्यक्रम के अध्यक्ष वानवडी के हरिभक्त परायण बाळा महाराज गव्हाणे ने संस्कारों का महत्व स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि समाज में अच्छे कार्य करने वाले लोग कम होते हैं, परंतु ऐसे संस्कार वर्गों के माध्यम से अधिक से अधिक अच्छे नागरिक और अच्छे इंसान तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने इस संस्कार वर्ग से अधिकाधिक श्रेष्ठ नागरिक निर्माण होने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता की प्रतिमा का पूजन करके हुई। इसके पश्चात दिव्यांग कल्याण
कारी संस्था की बालिकाओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका वंदना पराडकर ने किया। संस्कार वर्ग का प्रास्ताविक एवं अतिथियों का परिचय संस्था के कार्याध्यक्ष एडवोकेट मुरलीधर कचरे ने कराया। अतिथियों का आभार श्रीमती धनश्री बेके ने व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के साथ हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए शिक्षिका दीपाली साळुंखे, मयूरी गायकवाड, शुभांगी ढगे, दिलीप लांगी तथा रमेश कांबळे ने विशेष प्रयास किए।
मंच पर मुख्याध्यापिका शिवानी सुतार, हरिभक्त परायण सुरेश महाराज होले, संस्था के कोषाध्यक्ष प्रकाश टिळेकर तथा सह-कोषाध्यक्ष मारुती राऊत उपस्थित थे।
