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5 राज्यों का चुनाव

5 राज्यों का चुनाव

by हिंदी विवेक
in मई 2026, राजनीति
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5 राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम केवल क्षेत्रीय सरकारों का निर्धारण नहीं करेंगे बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की धुरी को भी नई दिशा देंगे। ये परिणाम सत्तारूढ़ गठबंधन की जन-स्वीकार्यता और विपक्ष की पैठ का वास्तविक दर्पण होंगे। क्षेत्रीय दलों का उदय या पतन 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधनों की मेजबानी तय करेगा। ये चुनाव आगामी राष्ट्रीय चुनाव के स्वर, सहयोग और रणनीतियों का खाका भी पेश करेंगे।

इस बार पांच राज्यों के चुनाव न केवल राज्यों की सत्ता तय करेंगे बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशा भी निर्धारित करेंगे। भारत निर्वाचन आयोग ने 15 मार्च 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावों की घोषणा की। जिसमें कुल 824 सीटों पर मतदान हो रहा है। लगभग 17.4 करोड़ मतदाता इस लोकतांत्रिक उत्सव का अंग बन रहे हैं।

देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण है क्योंकि असम और पुडुचेरी में एनडीए की सरकार है, केरल में वाममोर्चा की, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की, तमिलनाडु में डीएमके की। इस नाते एक तरह से भाजपा के लिए यह दक्षिण और पूर्व भारत में विस्तार का सुनहरा अवसर भी है।

असम: एनडीए की मजबूत पकड़, विपक्ष बिखरा हुआ
असम की राजनीति में इस बार भिड़ंत एनडीए और कांग्रेस- नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच है। मुख्य मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने पिछले 5 वर्षों में स्वयं को मजबूती से स्थापित किया है। ऐसे में भाजपा से ज्यादा उनकी अपनी साख दांव पर लगी है।

Himanta Biswa Sarma to take over as next Assam chief minister| India News

सीएए, डीलिमिटेशन और विकास जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा में रहे हैं। चुनाव पूर्व सर्वे बता रहे हैं कि भाजपा और उसके सहयोगी लगातार तीसरी बार सत्ता में आ सकते हैं। कुछ सर्वे तो एनडीए को 85 से 95 सीट तक दे रहे हैं, जबकि 126 सीट वाली असम विधानसभा में बहुमत के लिए मात्र 64 सीट चाहिए। असम में 9 अप्रैल को 85.9% का रिकॉर्ड मतदान हुआ है। सामान्य तौर पर माना जाता है कि अधिक मतदान सत्ता विरोधी लहर को दिखाता है, परंतु चुनाव पूर्व सर्वे की मानें तो ये उत्साह एनडीए के पक्ष में झुका है। महिलाओं, ग्रामीण क्षेत्रों और आदिवासी बेल्ट में भाजपा की पकड़ मजबूत दिखाई दे रही है। कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी और नेतृत्व का अभाव उसे पीछे धकेल रहा है।

केरल: सत्ता विरोधी लहर बनाम वामपंथ की पकड़
केरल में मुकाबला वामपंथ (एलडीएफ) बनाम यूडीएफ (कांग्रेस) के बीच है। मुख्य मंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ सरकार 10 वर्ष से सत्ता में है। इस बार केरल में भी 78 प्रतिशत मतदान हुआ, जो अपने आप में रिकॉर्ड है। चुनाव पूर्व सर्वे सत्ता विरोधी लहर की ओर संकेत कर रहे हैं। यूडीएफ (कांग्रेस) को थोड़ी बढ़त मिल सकती है, पर अंतर कम है। ये ऐसा राज्य है जहां भाजपा के पास खोने के लिए कुछ नहीं है।

Kerala CM Pinarayi Vijayan congratulated PM Modi on a stellar victory | Elections News - The Indian Express

2016 में भाजपा केरल में केवल एक विधानसभा सीट जीती थी, पर 2021 में वो सीट भी चली गई, परंतु इस बार सर्वे 5 से 8 सीट दे रहे हैं। बड़ी बात ये है कि सर्वे में वोट प्रतिशत पिछली बार से दोगुना होता हुआ दिखाई दे रहा है, जो बड़ी उपलब्धि है। कुल मिलाकर कहें तो केरल इस बार फोटो फिनिश की स्थिति में है। जहां विजेता कोई हो, पर भाजपा का आधार मजबूत होगा।

पुडुचेरी: छोटा राज्य, बड़ा संकेत
पुडुचेरी का चुनाव भले ही छोटा हो, पर इसके राजनीतिक संकेत बड़े होते हैं। यहां एन. रंगास्वामी के नेतृत्व में एनडीए सरकार है। 89.74% का रिकॉर्ड मतदान यह बताता है कि जनता में राजनीतिक जागरूकता बढ़ी है। चुनाव पूर्व सर्वे में एनडीए को यहां बढ़त मिलती दिख रही है, विशेषकर भाजपा के समर्थन के कारण। पुडुचेरी में एनडीए की वापसी लगभग तय मानी जा रही है, जो दक्षिण भारत में भाजपा के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त होगी।

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री 74 वर्ष के हो गए - द हिंदू

तमिलनाडु: बदलाव की हवा या स्टालिन का जादू?
तमिलनाडु का चुनाव इस बार सबसे दिलचस्प है। एक ओर एम. के. स्टालिन की डीएमके सरकार है, तो दूसरी ओर एनडीए गठबंधन (एआईएडीएमके + भाजपा) चुनौती दे रहा है। यहां मुकाबला टक्कर का दिखाई दे रहा है। सबसे दिलचस्प है थलापति विजय के टीवीके की एंट्री। पहली बार चुनाव में उतरने के कारण उनके पिछले कोई आंकड़े नहीं हैं, परंतु उनकी आखिरी फिल्म जननायकन को रिलीज ना होने देने के कारण युवा वोटरों में उनके लिए सहानुभूति है।

स्टालिन ने कहा, 'तमिलनाडु में हिन्दी के लिए कोई जगह ना थी, ना है, ना रहेगी' - BBC News हिंदी

कुछ चुनाव पूर्व सर्वे एनडीए की बढ़त दिखा रहे हैं तो कुछ डीएमके को। ऐसे में 234 सीट में 118 का मैजिकल आंकड़ा पाना आसान नहीं होगा। 23 अप्रैल को मतदान के दौरान स्विंग वोट चुनाव को पूरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। स्विंग वोट के अलावा चुनाव में जीत इस पर निर्भर करेगी कि थलापति विजय की टीवीके पार्टी विपक्ष के वोट काटती है या एनडीए के विरोधियों के। साथ ही ये चुनाव भाजपा का आधार तमिलनाडु में मजबूत कर सकता है।

पश्चिम बंगाल: ममता बनाम भाजपा-प्रतिष्ठा की लड़ाई
पश्चिम बंगाल में मुकाबला सीधा है- ममता बनर्जी की टीएमसी बनाम भाजपा। 2011 से सत्ता में बनी ममता बनर्जी ने 2021 में प्लास्टर वाली टांग के लिए ‘खेला होबे’ का नारा देकर खूब सहानुभूति बटोरी थी, किंतु इस बार खेला होबे 2.0 कितना काम करेगा, इस पर सभी की दृष्टि टिकी हुई हैं।

Murshidabad violence: West Bengal CM Mamata Banerjee appeals for peace amid rising tensions | India News - The Times of India
सर्वे बताते हैं कि टीएमसी को 140-160 सीटें मिल सकती हैं, जबकि भाजपा 130-150 के बीच रह सकती है। यह अंतर बहुत कम है, जिससे चुनाव कांटे का बन गया है। जमीनी स्तर पर दक्षिण बंगाल में टीएमसी मजबूत है, जबकि उत्तर बंगाल में भाजपा का प्रभाव बढ़ा है। जबकि एसआईआर, हिंसा, विकास, हिंदुत्व और मुस्लिम वोट बैंक चुनाव के परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। यदि टीएमसी अपनी बढ़त बनाए रखती है तो ममता बनर्जी की स्थिति मजबूत होगी, किंतु यदि सीटें घटती हैं तो भाजपा भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार कर लेगी।

समग्र राजनीतिक विश्लेषण: 2029 की झलक

लगातार होता रिकॉर्ड मतदान संकेत दे रहा है कि जनता राजनीतिक रूप से अधिक जागरूक और सक्रिय हो चुकी है। ऐसे में ये चुनाव 2029 लोकसभा के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत करने वाले हैं। इस बार तीन प्रश्नों के उत्तर महत्वपूर्ण हैं-
1. क्या भाजपा दक्षिण और पश्चिम बंगाल में आधार मजबूर करेगी?
2. क्या कांग्रेस केरल में वापसी कर पाएगी?
3. क्या क्षेत्रीय दल का आधार बचेगा या खिसकेगा?
इसके उत्तरों का एक हिस्सा 9 अप्रैल को वोटिंग मशीनों में बंद हो चुका है, जबकि 23 और 29 अप्रैल को तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की जनता भी राजनैतिक पार्टियों के भाग्य का निर्णय कर देगी। अंतिम परिणाम 4 मई 2026 को आएंगे, पर इतना साफ है कि परिणामों से 2029 लोकसभा चुनाव की तस्वीर साफ हो जाएगी।

-मनीष शर्मा

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Tags: असम चुनाव 2026केरल चुनाव 2026तमिलनाडु चुनाव 2026पश्चिम बंगाल चुनाव 2026पुडुचेरी चुनाव 2026विधानसभा चुनाव 2026

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