हिंदी विवेक
  • Login
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
हिंदी विवेक
No Result
View All Result
कांग्रेस-विपक्ष के खेमे में कट्टरपंथी और अलगाववादी शक्तियाँ

कांग्रेस-विपक्ष के खेमे में कट्टरपंथी और अलगाववादी शक्तियाँ

भविष्य में सतर्कता की एक गहरी दस्तक

by हिंदी विवेक
in राजनीति
0

हाल ही संपन्न पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों में संपूर्ण भारत के लिये सतर्कता की एक गहरी दस्तक मिली है। यह दस्तक सभी कट्टरपंथियों, अलगाववादी और सनातन विरोधी शक्तियों की एकजुट होकर अपने समर्थक मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की है। इसमें एक चिंता की बात यह भी है कि इन शक्तियों ने काँग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है। इसकी झलक इन पाँचों राज्यों में काँग्रेस, तृणमूल-कांग्रेस सहित इन दलों के विजयी उम्मीदवारों और केरल में सत्तारूढ़ होने जा रहे गठबंधन से स्पष्ट समझा जा सकता है।

इन पाँचों राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम अनुमान के अनुरूप हैं। असम, प. बंगाल और पांडिचेरी में भाजपा और केरल में काँग्रेस गठबंधन सत्तारुढ़ होगा, जबकि तमिलनाडु के मतदाताओं ने एक नये राजनैतिक दल को अपना समर्थन दिया। यह इन परिणामों का एक पक्ष है। दूसरा पक्ष भारत की सभी राष्ट्रवादी शक्तियों के माथे पर चिंता की एक लकीर खींच रहा है। इन परिणामों ने भविष्य के भारत के लिये एक डरावनी दस्तक दी है। यह दस्तक कट्टरपंथी मुस्लिम शक्तियों और अलगाववादियों की एकजुट होकर अपने समर्थक मतदाताओं को एकजुट करने की है।

Mamata Banerjee may take Bengal fight to Supreme Court over rigging allegations - India Today

इसे समझने के लिये इन पाँचों राज्यों का सामाजिक और सांस्कृतिक स्वरूप देखें। भाव भाषा और जीवन शैली की दृष्टि से केरल, तमिलनाड और प. बंगाल-असम में कोई एकरूपता नहीं है, लेकिन सभी राज्यों में मुस्लिम कट्टरपंथियों और अलगाववादी वोटों के ध्रुवीकरण दिशा एक ही रही है। इसमें दूसरी चिंताजनक बात यह है कि इन्होंने काँग्रेस जैसे एक बड़े दल में अपनी गहरी पैठ बना ली है। अब यह सत्ता प्राप्त करने के लिये काँग्रेस की अपनी ललक रही हो अथवा कट्टरपंथियों की अपनी कूटनीति कि अब काँग्रेस के नीति निर्णयों में कट्टरपंथ का समर्थन स्पष्ट दीख रहा है। काँग्रेस ने केरल में जिन दलों के साथ अपना गठबंधन बनाया अथवा असम एवं प. बंगाल में जिस प्रकार अपने उम्मीदवारों का चयन किया उसमें काँग्रेस की नीति स्पष्ट झलक रही है।

 

काँग्रेस के नेतृत्व में केरल की सत्ता संभालने जा रहे “यूडीएफ” गठबंधन में इंडियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस (जोसेफ), केरल कांग्रेस (जैकब), क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी प्रमुख सदस्य हैं। इस गठबंधन की सहयोगी इंडियन मुस्लिम लीग तो अपने कट्टरपंथ और शरीयत कानून का खुला समर्थन करने जानी जाती है, जबकि क्राँतिकारी समाजवादी पार्टी कम्युनिस्ट विचारधारा पर काम करती है।

Rahul Gandhi Wants KC Venugopal As Kerala CM, Meets Him Privately: Sources

वहीं केरल काँग्रेस (जौसेफ) और केरल काँग्रेस (जेकब) का भी अपना इतिहास है। इनमें से एक सीरियाई ईसाई और नायर समाज का संगठन माना जाता है और दूसरी की गणना लेफ्ट के समीप होती है।

केरल विधानसभा में इस बार 34 मुस्लिम विधायक चुनाव जीते हैं। इनमें मुस्लिम लीग के 22 और काँग्रेस टिकिट पर आठ हैं। अब केरल में सत्ता संभालने जा रहे यूडीएफ की नीति क्या होगी यह इस गठबंधन में शामिल दलों की रीति नीति और विधायकों से ही स्पष्ट हो रहा है।

TVK founder C. Joseph Vijay takes oath as Tamil Nadu Chief Minister | DD  News On Air

यदि केरल से असम की दूरी देखें तो यह लगभग साढ़े तीन हजार किलोमीटर है। इन दोनों राज्यों में भाव, भाषा, जीवन शैली और साँस्कृतिक मूल्यों में भी कोई तालमेल नहीं है, लेकिन कट्टरपंथी मतदाता के ध्रुवीकरण की जो लहर केरल में रही बिल्कुल वही लहर असम में भी देखने को मिली। असम विधानसभा में इसबार विपक्ष के कुल 24 विधायक पहुँचे हैं। 24 में से 22 विधायक मुस्लिम हैं। कांग्रेस के टिकिट पर कुल 19 विधायक चुनाव जीते, इनमें मुस्लिम विधायकों की संख्या 18 है।

कट्टरपंथी मतदाता का यही धुर्वीकरण प. बंगाल और तमिलनाडू में भी देखा गया। प. बंगाल में काँग्रेस टिकिट पर कुल 2 विधायक जीते, इनमें एक मुस्लिम है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने कुल 80 सीटे जीती, इनमें मुस्लिम विधायकों की संख्या 31 है।

इन राज्यों में मुस्लिम वोटों के इस ध्रुवीकरण के दो लक्ष्य थे, एक भाजपा को रोकना और दूसरा विधानसभा अपनी सदस्य संख्या की वृद्धि करना। यदि कट्टरपंथियों का उद्देश्य केवल भाजपा को रोकना होता तो वे असम और पश्चिम बंगाल में काँग्रेस के गैर मुस्लिम उम्मीदवारों का भी समर्थन कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनकी प्राथमिकता में मुस्लिम उम्मीदवार ही रहे इसलिये मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रकने वाले हुँमायू कबीर ने दोनों विधान सभा क्षेत्रों से विजय प्राप्त की। यदि कट्टरपंथियों का उद्देश्य केवल भाजपा को रोकना होता तो वे इन दोनों सीटों पर भी काँग्रेस उम्मीदवार को ही वोट देते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

यहाँ काँग्रेस की बजाय हुँमायू कबीर को पसंद किया।
इन पांच राज्यों में वोटों के इस ध्रुवीकरण में केवल मुस्लिम कट्टरपंथी अकेले नहीं हैं। इसमें अलगाववादी, मार्क्सवादियों और माओवादियों का भी गठजोड़ रहा है। यद्यपि वैचारिक दृष्टि से इन दोनों समूहों के लक्ष्य और धारा में कोई मेल नहीं हैं। दुनियाँ के अन्य देशों में इन दोनों धाराओं के बीच कोई तालमेल नहीं है, लेकिन भारत में इन दोनों के बीच अद्भुत गठजोड़ है। यह गठजोड़ केवल राजनैतिक दृष्टि से ही नहीं है, ये सामाजिक और बौद्धिक मंचों पर दोनों एकसाथ दिखाई देते हैं। दिल्ली के जेएनयू में होने वाले कार्यक्रम इसका उदाहरण है।

Humayun Kabir: बंगाल में BJP के साथ डील के आरोप वाले वीडियो पर विवादों का बवंडर, हुमायूं कबीर का क्या है जवाब? - west bengal assembly election 2026 humayun kabir reaction sting

इन दोनों समूहों का पूरे देश में अपना नेटवर्क है। इन समूहों की एक विशेषता यह भी है कि वे सार्वजनिक चर्चा के लिये विशेष “नैरेटिव” सेट करने में भी सिद्धहस्त होते हैं। अपने अभियान और रणनीति से लोगों का ध्यान हटाने के लिये कुछ ऐसे “नैरेटिव” उछालते हैं जिससे जन सामान्य इन्हीं नैरेटिव में उलझ जाए और वे अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहें।
इन पाँच राज्यों में संपन्न विधानसभा चुनाव परिणाम में हिन्दू वोटों के ध्रुवीकरण का नैरेटिव उछाला गया।

यह ठीक है कि हिन्दु मतदाताओं का एक बड़ा भाग भारतीय जनता पार्टी को ओर झुका, लेकिन वह हिन्दु वोटों का ध्रुवीकरण नहीं था। पश्चिम बंगाल में लगभग 70 प्रतिशत हिन्दु मतदाता हैं, लेकिन भाजपा को लगभग 45 प्रतिशत वोट मिले। इसका अर्थ है कि लगभग 25 प्रतिशत हिन्दु वोट काँग्रेस, तृणमूल-कांग्रेस तथा अन्य दलों को भी मिले। यह स्थिति केवल पश्चिम बंगाल या असम की नहीं है। केरल, तमिलनाड और पुड्डुचेरी भी यही स्थिति रही। इन सभी प्राँतों में काँग्रेस समर्थक हिन्दु मतदाताओं ने काँग्रेस के मुस्लिम उम्मीदवारों को भी वोट दिया।

यह काँग्रेस के विजयी मुस्लिम उम्मीदवारों को मिले कुल वोटों और उस विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतों की कुल संख्या से स्पष्ट हो जाता है, लेकिन मुस्लिम मतों का विभाजन कहीं नहीं हुआ। कट्टरपंथी मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण से लोगों का ध्यान हटाने के लिये हिन्दु मतों के ध्रुवीकरण का नैरेटिव उछाल दिया गया। सोशल मीडिया और मीडिया के अधिकांश नेटवर्क पर यही नैरेटिव चला।

अब इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि असम से लेकर केरल तक मुस्लिम मतदाताओं का इस ध्रुवीकरण की राजनीति का प्रभाव देश के अन्य राज्यों पर भी पड़ेगा। विशेषकर उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में इन्हें काँग्रेस का सशक्त कंधा मिल गया है। हालाँकि काँग्रेस की राजनीति में मुस्लिम तुष्टिकरण सदैव प्राथमिकता पर रहा है, लेकिन अब काँग्रेस और कुछ विपक्षी दलों की राजनीति केवल तुष्टिकरण तक सीमित नहीं रहेगी।

वह कट्टरपंथ को संरक्षण देने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ेगी।
भारत के इतिहास की कुछ घटनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि कट्टरपंथी एक एक कदम आगे बढ़ते हैं और अंत में अपनी पसंद के निर्णय भी कराते हैं। 1857 की क्राँति के बाद भारत के कट्टरपंथियों ने अंग्रेजों को अपनी वफादारी दिखाई और काँग्रेस पर दबाव बनाया। यह कट्टरपंथियों के दबाव का ही तो परिणाम था कि काँग्रेस बात तो रामराज्य की करती थी, लेकिन खिलाफत आँदोलन खलीफा राज के लिये किया था।

स्वतंत्रता से पहले बंगाल के अधिकांश मुसलमान काँग्रेस के विरुद्ध और मुस्लिम लीग के साथ थे, लेकिन भारत विभाजन के बाद शेष बचे बंगाल में सभी मुसलमान काँग्रेस के झंडे तले आ गये। यदि काँग्रेस का पतन हुआ तो वे लेफ्ट समर्थक हो गये। लेफ्ट के पतन के बाद तृणमूल-कांग्रेस के बैनर पर सक्रिय हुये और अब पुनः काँग्रेस के माध्यम से अपनी राजनीति करना चाहते हैं।

आरंभिक काल में भले वे कुछ कहें, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य भारत राष्ट्र का सांस्कृतिक और सामाजिक रूपान्तरण करना है। इन चुनाव परिणामों के बाद केरल और तमिलनाडू के प्रशासन में कट्टरपंथियों का प्रभाव बढ़ेगा और इसका प्रभाव देश के अन्य प्रांतों में भी पड़ने की स्पष्ट आशंका दिखाई दे रही है।
लव जिहाद और लैंड जिहाद के रूप में कट्टरपंथ का अभियान देशभर में चल रहा है। अब ऐसी घटनाओं में और वृद्धि होने की आशंका बढ़ गई है तथा ऐसे तत्वों के समर्थन में काँग्रेस सहित कुछ राजनैतिक दलों द्वारा खुलकर समर्थन करने की आशंका भी बढ़ गई है। इसके लिये समस्त देश वासियों को सावधान और जागरूक रहने की आवश्यकता है।

– रमेश शर्मा

Share this:

  • Share on X (Opens in new window) X
  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
  • Share on Telegram (Opens in new window) Telegram
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp

हिंदी विवेक

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी विवेक पंजीयन : यहां आप हिंदी विवेक पत्रिका का पंजीयन शुल्क ऑनलाइन अदा कर सकते हैं..

Facebook Youtube Instagram

समाचार

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लोकसभा चुनाव

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लाइफ स्टाइल

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

ज्योतिष

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

Copyright 2024, hindivivek.com

Facebook X-twitter Instagram Youtube Whatsapp
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वाक
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer
  • Shipping Policy
  • Refund and Cancellation Policy

copyright @ hindivivek.org by Hindustan Prakashan Sanstha

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण

© 2024, Vivek Samuh - All Rights Reserved

0