जब कलाकार देश के पक्ष में डटकर खड़ा होता है… तब बॉलीवुड के कुछ लोगों को उसी से सबसे ज़्यादा डर लगता है!
डॉन 3 के विवाद के बाद रणवीर सिंह के इर्द-गिर्द जो माहौल बनाया गया, उसने एक बात फिर साबित कर दी कि बॉलीवुड में आज भी कुछ “fixed camps” और “elite circles” हैं, जिन्हें अपने दायरे से बाहर का सुपरस्टार बर्दाश्त नहीं होता।
और रणवीर सिंह बिल्कुल वैसा ही बनता जा रहा है! 👇🏻
क्योंकि वह अब सिर्फ एक उत्कृष्ट कलाकार नहीं रहा है…
वह अब बड़े देशभक्त दर्शक वर्ग की आवाज़ बन रहा है।
खासतौर पर “धुरंधर” और “धुरंधर 2” के बाद रणवीर ने जो देशसमर्थक, राष्ट्राभिमानी और unapologetic (बिना माफी माँगे) देशभक्त कलाकार की भूमिका निभाई है… वह कुछ तथाकथित “pseudo intellectual Bollywood groups” (भांड) को साफ तौर पर खटकती दिखती है।
जब कई कलाकार जानबूझकर राष्ट्रवाद पर बोलने से बचते हैं, तब रणवीर ने अपनी फिल्मों और सार्वजनिक भूमिकाओं के ज़रिए देश, सेना, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव का समर्थन किया है। और यहीं पर कई लोगों के पेट में दर्द हो गया!
क्योंकि आज के ज़माने में “न्यूट्रल” रहना सेफ है। तथाकथित सेक्युलर होना और हिंदू विरोधी भूमिका निभाना यानी इनके पसंदीदा विषय, लेकिन देश के लिए साफ़ खड़ा होना एक साहस का काम है।
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“धुरंधर” में रणवीर ने जो आक्रामक, राष्ट्रवादी और पाकिस्तानी तथा दाऊद इब्राहिम विरोधी अवतार दिखाया, वह इन पाकिस्तान प्रेमी लोगों के सिर में घुस गया। सिंगल स्क्रीन से लेकर मल्टीप्लेक्स तक और हर सोशल मीडिया पर जो उसका प्रभाव दिखा, वह इन पाकिस्तान प्रेमी लोगों की नज़र में खूब खल रहा है।
पर असली आग तो “धुरंधर 2” के बाद लगी: क्योंकि उस फिल्म के बाद रणवीर सिर्फ कलाकार नहीं रहा। वह “देश के लिए बोलने वाला मास आइकॉन” बनने लगा। और बॉलीवुड के कुछ भांड circles को यही बात बर्दाश्त नहीं होती।
क्योंकि दशकों-नुदशकों कुछ लोगों ने देशविरोधी, हिंदू विरोधी नैरेटिव सेट करने की कोशिश की है — किसे प्रमोट करना है, किसे साइलेंस करना है, किसे इंटेलेक्चुअल कहना है और किसे प्रॉब्लेमैटिक ठहराना है।
आज रणवीर उस सारे टेम्पलेट के बाहर जा चुका है। इसी वजह से अचानक उस पर प्रेशर टैक्टिक्स, लॉबिंग और संस्थाओं के इस्तेमाल की चर्चाएँ शुरू हो गईं। कुछ रिपोर्ट्स में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज़ (FWICE) का नाम सामने आया और आम दर्शकों के मन में सवाल पैदा हुआ —
“कलाकारों पर दबाव डालने के लिए संस्थाओं का इस्तेमाल करना उचित है क्या?”
• फरहान अख्तर और उसके सर्कल पर पहले से एक आरोप लगता आ रहा है —
कि वे अपनी विचारधारा से न मिलने वाले या अपनी अलग मास फॉलोइंग बनाने वाले कलाकारों से असहज हो जाते हैं। और रणवीर आज उस दायरे से बाहर का सबसे बड़ा स्टार बनता जा रहा है।
क्योंकि उसके पास है —
✔️ मास अपील
✔️ बेफिक्र एनर्जी
✔️ देशभक्त इमेज
✔️ युवाओं से कनेक्ट
✔️ देसी स्क्रीन प्रेजेंस
तुकाराम महाराज ने कहा है —
“सत्य असत्याशी मन केले ग्वाही ।
मानियले नाही बहुमता ॥”
(सत्य और असत्य की गवाही मन ने दी है। बहुमत की बात नहीं माननी चाहिए।)
आज रणवीर यही दिखा रहा है।
वह लॉबी के अनुमोदन पर नहीं जीता…
वह जनता के प्यार पर खड़ा है।
और एक अभंग और भी सटीक लगता है —
“भले तरी देऊ कासेची लंगोटी ।
नाठाळाच्या माथी हाणू काठी ॥”
(चाहे ऊनी लंगोटी ही क्यों न देनी पड़े, लेकिन नटखट के सिर में डंडा मारूँगा।)
जो कलाकार को दबाव में लाने की कोशिश करते हैं, उन्हें जनता अब सोशल मीडिया पर खुलकर जवाब दे रही है। क्योंकि ज़माना बदल गया है। पहले PR आर्टिकल्स चलते थे, आज पब्लिक परसेप्शन चलता है। पहले कैंप्स सुपरस्टार तय करते थे, आज जनता तय करती है।
और इसलिए रणवीर सिंह के खिलाफ पैदा किया जाने वाला हर विवाद उल्टा उसे और भी बड़ा बना रहा है। क्योंकि लोगों को अब स्क्रिप्टेड सोफिस्टिकेशन नहीं चाहिए… उन्हें फायर चाहिए। अटिट्यूड चाहिए। देश के लिए खड़ा रहने वाला स्टार चाहिए।
अभिनंदन रणवीर सिंह! 🔥
