भारत सौर उर्जा में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। प्रश्न यह उठता है कि क्या उत्पादन के अनुसार सौर उर्जा का वितरण होता है। आवश्यकता से अधिक उत्पादन और उसके अनुसार वितरण नहीं होने से उर्जा को संग्रहित कब और कैसे करते हैं, डालते हैं इस पर एक दृष्टि।
क्या आपने कभी सोचा है कि जिस धूप से बचने के लिए हम गर्मियों में छाता ढूंढ़ते हैं, वही धूप आज भारत की ऊर्जा शक्ति का एक प्रमुख आधार बन चुकी है? जी हां, आपने सही सुना। अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत ने वर्ष 2025 में अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बनने का गौरव प्राप्त किया है।
सौर उर्जा का कितना उत्पादन होता है
आधिकारिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार आज भारत की कुल सौर ऊर्जा क्षमता 157.05 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। यह बिजली किन स्रोतों से प्राप्त हो रही है, आइए इसे सरलता से समझते हैं।
बड़े सोलर पार्क: मरुस्थलों और मैदानों में फैले बड़े प्लांट से सबसे ज्यादा 118.79 गीगावाट बिजली मिल रही है।
छतों पर लगे पैनल: हमारे और आपके घरों-कार्यालयों की छतों से ग्रिड को 27.88 गीगावाट बिजली मिल रही है।
हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स: धूप और हवा के मिले-जुले प्रोजेक्ट्स से 4.06 गीगावाट का योगदान है।
ऑफ-ग्रिड सोलर: दूर-दराज के क्षेत्रों और खेतों में बिना तारों से सीधे 6.31 गीगावाट बिजली पैदा हो रही है।

जितनी बिजली का उत्पादन होता है, क्या उसी अनुपात में उसका वितरण भी हो पाता है? उत्तर है- अभी नहीं, लेकिन हम उस दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। जरा सोचिए, आपने घर में बहुत सारा स्वादिष्ट खाना बना लिया, लेकिन यदि उसे अतिथियों की थाली तक सही समय पर परोसा ही न जाए तो उस खाने का क्या लाभ? सौर ऊर्जा के साथ भी यही चुनौती है। इसके पीछे का कारण बहुत ही व्यावहारिक है। सूरज देव केवल दिन में चमकते हैं। यानी बिजली का उत्पादन दोपहर में सबसे ज्यादा होता है, लेकिन हम और आप बिजली का सबसे ज्यादा प्रयोग शाम-रात को करते हैं- जब ऑफिस से घर लौटते हैं, तब टीवी चलाते हैं, एसी या हीटर ऑन करते हैं।
अब दोपहर की बनी बिजली को शाम तक सुरक्षित कर रखना और उसे देश के कोने-कोने में पहुंचाना एक टेढ़ी खीर है। इस कारण कई बार बिजली का उत्पादन होने के बाद भी ग्रिड उसे पूरी तरह सम्भाल नहीं पाता। इसी कारण राजस्थान में मार्च से अगस्त 2025 के बीच लगभग 4 जीडब्ल्यू बिजली बर्बाद हो गई, जिससे लगभग 230-250 करोड़ की हानि हुई।

समस्या का समाधान क्या है?
वितरण के लिए क्या आवश्यक पैरामीटर है, जो सौर उर्जा का संचयन वितरण के लिए कर सके?
वैज्ञानिक और इंजीनियर दिन-रात ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जो इस धूप की बिजली को कैद करके रख सके। इसके लिए कुछ बहुत आवश्यक पैरामीटर्स और सिस्टम काम करते हैं।
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम: जैसे हमारे मोबाइल की बैटरी दिनभर चलती है, वैसे ही अब ग्रिड के स्तर पर बहुत बड़ी-बड़ी बैटरियां लगाई जा रही हैं। ये दोपहर की बिजली को संग्रहित कर लेती हैं और रात को जब आपको आवश्यकता होती है, तब सप्लाई करती है।
नेट मीटरिंग: यह आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा पैरामीटर है। यदि आपने अपने घर पर सोलर पैनल लगाया है तो दिन में बनी बिजली आप सरकारी ग्रिड को बेच सकते हैं। रात को जब आप ग्रिड से बिजली लेंगे तो वह आपकी बेची गई बिजली के बदले एडजस्ट हो जाएगी।
साथ ही इंटर स्टेट ट्रांसमीटर लाईन का जाल बिछाना भी आवश्यक है ताकि राजस्थान में बनी बिजली बिहार या ओडिशा तक पहुंच सके। यह काम चल रहा है, लेकिन अभी पूरा नहीं हुआ। सौर ऊर्जा संग्रहित करने के लिए पैनल किस प्रकार काम करता है?
सोलर पैनल छोटे-छोटे ‘सिलिकॉन’ के टुकड़ों से बनते हैं, जिन्हें हम फोटोवोल्टिक सेल्स कहते हैं। जब सूरज की किरणें इस पैनल पर गिरती हैं तो सिलिकॉन के अंदर सोए हुए छोटे-छोटे इलेक्ट्रॉन जाग जाते हैं और ऊर्जा पाकर तेजी से भागने लगते हैं। विज्ञान का सीधा नियम है, इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह ही विद्युत धारा कहलाता है। इस तरह बिना किसी धुएं के, बिना किसी आवाज के, सीधे सूरज की रोशनी बिजली के तारों में करंट के रूप मे दौड़ने लगती है।
फिर इंवर्टर इस डीसी को ऐसी, जिस करंट से हमारे घर के पंखे, फ्रिज और लाइट चलते हैं, में बदलता है और फिर हम इसका प्रयोग कर पाते हैं।
हमने देखा कि किस प्रकार पिछले कुछ सालों में भारत के सौर ऊर्जा उत्पादन में एक जादुई बदलाव आया है। सरकार की ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना और पीएम कुसुम’ जैसी योजनाओं ने इस तकनीक को सीधे आम आदमी की छत तक पहुंचा दिया है। आज गांव की चौपाल से लेकर बड़े शहरों की बहुमंजिला भवनों की छतों पर नीले-काले रंग के सोलर पैनल चमकते हुए दिख जाते हैं।
2030 तक भारत का लक्ष्य है 500 ॠथ ीशपशुरलश्रश शपशीसू का उत्पादन करना और हम उस रास्ते पर तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन यह केवल सरकार के भरोसे नहीं चलेगा। असली बदलाव तब आएगा जब आप और हम भी इस यात्रा का हिस्सा बनेंगे। हमारी हर छत, हमारा हर बचाया हुआ यूनिट इस देश के उज्जवल भविष्य की नींव है।
वैदेही द्विवेदी

