हिंदी विवेक
  • Login
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
हिंदी विवेक
No Result
View All Result
गाजा पर सियासत या मुस्‍लिम तुष्‍टि‍करण ?

गाजा पर सियासत या मुस्‍लिम तुष्‍टि‍करण ?

सोनिया गांधी के सवाल और भारत की संतुलित विदेश नीति

by हिंदी विवेक
in देश-विदेश
0

गाजा में जारी युद्ध और मानवीय संकट को लेकर सोनिया गांधी का एक लेख सामने आया है, जिसमें विदेश नीति के बहाने केंद्र की सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय विदेश नीति पर निशाना साधा गया है। लेख के जरिए विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि भारत अपनी पारंपरिक संतुलित नीति से हटकर इजराइल की ओर झुक गया है, जिससे पश्चिम एशिया में उसकी साख प्रभावित हुई है, किंतु ये कितना बड़ा झूठ है, इसकी जानकारी सिर्फ इसी बात से सामने आ जाती है, जोकि भारत सरकार ने समय-समय पर गाजा को लेकर अपने प्रभावी कदम उठाए हैं।

यदि भारत सरकार के आधिकारिक कदमों, संयुक्त राष्ट्र में उसके रुख और गाजा के लिए भेजी गई मानवीय सहायता का रिकॉर्ड देखा जाए तो तस्वीर कहीं अधिक मानवीय एवं संवेदनशीलता के साथ व्यापक दिखाई देती है। ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि क्या सोनिया गांधी ने पूरी तस्वीर प्रस्तुत की है या फिर उनका लेख विदेश नीति के बहाने मुस्‍लिम तुष्‍टिकरण का एक सीधा पेटर्न है जोकि समय-समय पर वे एवं उनकी पार्टी कांग्रेस साधती आई है?

सोनिया गांधी लिखती हैं, ‘संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की जून 2026 की रिपोर्ट बताती है कि इजराइल गाजा में फिलिस्तीनियों के अस्तित्व को खत्म करने के इरादे से बच्चों को निशाना बना रहा है। इतनी गंभीर रिपोर्ट आने के बाद भी मोदी सरकार चुप है।’ उनका कहना है, ‘भारत यदि अपनी पुरानी विदेश नीति पर कायम रहता तो पश्चिम एशिया में उसकी भूमिका कहीं अधिक प्रभावशाली होती।’ केंद्र की मोदी सरकार पर सोनिया गांधी ने यह भी आरोप लगाया है कि वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण भारत के फिलिस्तीन और ईरान जैसे पुराने मित्र देशों के साथ संबंध प्रभावित हुए हैं तथा पाकिस्तान को क्षेत्र में अधिक अवसर मिल रहे हैं।
Lone Voice Of Silence": Sonia Gandhi's Gaza Op-Ed Draws BJP Criticism

अब प्रश्‍न यह है कि आज जो सोनिया गांधी कह रही है, वह क्‍या सच है? विदेश नीति पर सरकार की आलोचना किसी भी लोकतंत्र में स्वाभाविक है, किंतु यह भी उतना ही आवश्यक है कि आलोचना उपलब्ध तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के साथ परखी जानी चाहिए। यह नहीं होना चाहिए कि जो मुंह में आया बोल दिया, जो मन में आया लिख दिया गया!

क्या भारत ने फिलिस्तीन से दूरी बना ली?
सोनिया गांधी के लेख से यह संदेश निकलता है कि भारत का झुकाव पूरी तरह इजराइल की ओर हो गया है, जबकि भारत सरकार के पिछले ढाई वर्षों के कदम इस धारणा की पूरी तरह पुष्टि नहीं करते। इतिहास से 7 अक्टूबर 2023 का दिन कैसे भूलाया जा सकता है। जब आतंकवादी संगठन Harakat al-Muqawama al-Islamiya (हमास) ने मौज-मस्‍ती कर रहे इजरायलियों पर अचानक हमला बोल दिया था!

हमले के बाद भारत ने आतंकवादी हमले की स्पष्ट निंदा की और इजराइल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया, जोकि अपने समय पर बिल्‍कुल सही था। पूरी तरह से न्‍याय संगत था। किंतु जब देखा की गाजा की स्‍थ‍िति बिगड़ रही है, तब यही वह भारत है जिसने समय से गाजा के नागरिकों के लिए लगातार मानवीय सहायता भेजी। संयुक्त राष्ट्र में युद्धविराम की आवश्यकता दोहराई तथा दो-राष्ट्र समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) के अपने पारंपरिक रुख को भी कायम रखा। यानी भारत ने सुरक्षा और मानवता दोनों पक्षों को समान महत्व देने का प्रयास किया।

तथ्य बताते हैं अलग कहानी यदि सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड पर नजर डालें तो अक्टूबर 2023 से नवंबर 2024 के बीच भारत ने गाजा और फिलिस्तीन के लिए लगभग 135 मीट्रिक टन मानवीय एवं चिकित्सा सहायता भेजी। यह सहायता चार चरणों में भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमानों द्वारा मिस्र के एल-अरीश एयरपोर्ट तक पहुंचाई गई। वहां से राफा बॉर्डर क्रॉसिंग के माध्यम से राहत सामग्री गाजा के नागरिकों तक पहुंचाई गई।

World Health Organization (WHO) | MOPAN

इन अभियानों में संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसी UNRWA तथा फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी सहयोग किया। यदि भारत वास्तव में फिलिस्तीन की पूरी तरह उपेक्षा कर रहा होता, तो इतने बड़े पैमाने पर लगातार राहत अभियान चलाना उसकी नीति का हिस्सा नहीं होता।
सिर्फ बयान नहीं, जमीन पर भी मदद पहुंचाई गई

भारत द्वारा भेजी गई सहायता केवल प्रतीकात्मक नहीं थी। राहत सामग्री में शामिल थे- जीवनरक्षक दवाएं, एंटी-कैंसर दवाएं, सर्जिकल उपकरण, स्वास्थ्य किट, उच्च ऊर्जा वाले बिस्कुट, टेंट, तिरपाल, स्लीपिंग बैग, सैनिटरी सामग्री, जल शोधन की गोलियां। युद्धग्रस्त क्षेत्रों में सबसे अधिक आवश्यकता इन्हीं वस्तुओं की होती है। भारत ने इन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सहायता भेजी।

भारत केवल राहत सामग्री भेजकर नहीं रुका। भारत सरकार संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) को प्रतिवर्ष 50 लाख अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता भी देती रही है। यह सहायता फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और राहत कार्यक्रमों में खर्च होती है। यह तथ्य भी भारत के उस रुख को मजबूत करता है कि वह फिलिस्तीनी नागरिकों के मानवीय हितों का समर्थन करता रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में भी भारत का स्पष्ट संदेश
यदि भारत की विदेश नीति सिर्फ इजराइल समर्थक होती, तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसका रुख अलग दिखाई देता, लेकिन हाल के वर्षों में भारत ने बार-बार कहा गया कि गाजा में तत्काल मानवीय सहायता पहुंचनी चाहिए। निर्दोष नागरिकों की मौत अस्वीकार्य है। युद्धविराम आवश्यक है। सभी बंधकों की बिना शर्त रिहाई हो। दो-राष्ट्र समाधान ही स्थायी शांति का आधार है। भारत ने फिलिस्तीन के स्वतंत्र राष्ट्र के अधिकार का समर्थन भी दोहराया, इसलिए यह कहना पूरी तरह से झूठ है कि भारत ने फिलिस्तीन के पक्ष को छोड़ दिया है।
विदेश नीति केवल भावनाओं से नहीं चलती

आखिर सोनिया गांधी ये कैसे भूल सकती हैं कि विदेश नीति का उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना भी होता है। भारत आज ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार, समुद्री मार्गों की सुरक्षा तथा खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीय नागरिकों के हितों से जुड़ा हुआ है। ऐसी स्थिति में भारत को इजराइल, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और फिलिस्तीन सभी के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने पड़ते हैं।
यही वर्तमान भारतीय विदेश नीति की सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती है। रूस-यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक एक जैसी नीति आज दिखाई देती है। जिसमें कि भारत की विदेश नीति का एक बड़ा उदाहरण रूस-यूक्रेन युद्ध में उसका संतुलित होना है। भारत ने रूस से संबंध नहीं तोड़े, लेकिन यूक्रेन को भी मानवीय सहायता भेजी।

इसी प्रकार पश्चिम एशिया में भारत ने इजराइल के साथ रक्षा सहयोग, ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह परियोजना, खाड़ी देशों के साथ ऊर्जा एवं निवेश साझेदारी तथा फिलिस्तीन को मानवीय सहायता इन सभी मोर्चों पर समानांतर काम जारी रखा। यही कारण है जो भारत की विदेश नीति‍ “मल्टी-अलाइनमेंट” के रूप में पहचानी जाती है।

फिलिस्तीन और इजराइल : दोनों के साथ सम्मानजनक संबंध
भारत के संतुलित संबंधों का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि दोनों पक्षों ने भारत को सम्मान दिया है। फरवरी 2018 में फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिलिस्तीन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन प्रदान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक 34 देशों ने सबसे उच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है। क्‍या यह बिना कुछ किए हो गया! क्‍या यह भारत के चुप रहने का परिणाम है ?

दूसरी ओर इजराइल ने भी प्रधानमंत्री मोदी को विशेष सम्मान देकर दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी को स्वीकार किया है। आप देख सकते हैं कि विश्‍व में बहुत कम देशों को दोनों पक्षों से इस प्रकार का सम्मान प्राप्त हुआ है। सोनिया गांधी ने गाजा के मानवीय संकट को प्रमुखता देते हुए जिस तरह के आरोप मोदी सरकार पर लगाए हैं, निश्चित रूप से यह असत्‍यता का गंभीर मामला है, उनके लेख में भारत द्वारा भेजी गई सहायता, संयुक्त राष्ट्र में भारत के वक्तव्य, फिलिस्तीनी शरणार्थियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता तथा दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन जैसे महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख नहीं मिलता। यही कारण है कि सरकार के समर्थकों की नजर में यह एक अधूरी तस्वीर है।

अब जो सामने से साफ दिख रहा है, वह यह है कि कांग्रेस लंबे समय से फिलिस्तीन समर्थक रुख रखती रही है और यह उसी नीति का विस्तार है। इस तरह से कांग्रेस किसी न किसी रूप में मुस्‍लिम तुष्‍टि‍करण करती हुई दिखती है।

मोदी सरकार की विदेश नीति को वैश्विक स्वीकार्यता
आज विदेशनीति से जुड़ा सबसे बड़ा तथ्‍य यह है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की विदेश नीति को वैश्विक स्तर पर व्यापक पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अनेक देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया है। भारत आज जी-20, क्वाड, ब्रिक्स, आई2यू2, खाड़ी देशों और वैश्विक दक्षिण (Global South) जैसे विभिन्न मंचों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

रूस और अमेरिका दोनों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना, ईरान और इजराइल दोनों से संवाद जारी रखना तथा फिलिस्तीन को मानवीय सहायता भेजना, वास्‍तव में ये सभी उदाहरण बताते हैं कि भारत किसी एक ध्रुव की बजाय अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप बहुस्तरीय कूटनीति पर काम कर रहा है।

विदेश नीति का मूल्यांकन तथ्यों से होना चाहिए
अब सोनिया गांधी से जाकर कोई कहे कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना आवश्यक है और विदेश नीति भी उससे अछूती नहीं है, लेकिन विदेश नीति का मूल्यांकन सिर्फ राजनीतिक आरोपों के आधार पर न हो तो बेहतर है। यह तो उसके वास्तविक परिणामों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। यदि एक ओर भारत आतंकवाद की निंदा करता है, दूसरी ओर युद्धग्रस्त गाजा के नागरिकों के लिए राहत सामग्री भेजता है, संयुक्त राष्ट्र में युद्धविराम की वकालत करता है और फिलिस्तीन के स्वतंत्र राष्ट्र के अधिकार का समर्थन भी जारी रखता है, तो यह नीति एकतरफा कैसे हो गई ?

बहस जारी रहे, लेकिन तथ्यों के साथ
गाजा को लेकर सोनिया गांधी का लेख राजनीतिक बहस को भले ही जन्‍म दे, पर उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड यह दर्शा रहे हैं कि भारत ने इजराइल के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत करने के साथ-साथ फिलिस्तीन के प्रति अपनी ऐतिहासिक प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह छोड़ा नहीं है। लगभग 135 मीट्रिक टन मानवीय सहायता, UNRWA को वित्तीय सहयोग, संयुक्त राष्ट्र में युद्धविराम और दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन तथा फिलिस्तीनी नागरिकों के प्रति निरंतर मानवीय दृष्टिकोण, इस तरह के अनेक प्रयास, ये सभी तथ्य मिलकर भारत की संतुलित कूटनीति की ओर संकेत करते हैं।

कुल मिलाकर सोनिया गांधी का लेख पूरी तरह से एक तरफा और गाजा के बहाने भारत में मुस्‍लिम तुष्‍ट‍िकरण को बढ़ावा देनेवाला ही है!, क्‍योंकि उन्‍हें बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान जैसे देशों में हिन्‍दू एवं अन्‍य गैर मुसलमानों पर हो रहे अत्‍याचार की याद नहीं आती! उन्‍हें पश्‍चिमी देशों में भारतीयों पर हो रही हिंसा से कोई लेना-देना नहीं है! उन्‍हें यदि कुछ दिखाई दे रहा है तो पूरे विश्‍व में सिर्फ गाजा में रहनेवाले मुसलमान! क्‍योंकि उम्‍मा की अवधारणा में दुनिया भर के मुसलमान एक हैं, इसलिए भारत में गाजा के मुसलमानों के लिए मुस्‍लिम कौम में आक्रोश एवं दर्द है। यहां साफ दिख रहा है कि सोनिया गांधी इसी उम्‍मा का लाभ अपने हित में लेना चाहती हैं। तभी वे मोदी सरकार की सही तस्‍वीर पेश नहीं करतीं, उल्‍टा उसे व्‍यर्थ ही साक्ष्‍य छिपाकर कटघरे में खड़ा कर रही हैं। वास्‍तव में उनकी इस सोच की जितनी निंदा की जा सकती है, वह अवश्‍य की जानी चाहिए।

– डॉ. मयंक चतुर्वेदी

Share this:

  • Share on X (Opens in new window) X
  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
  • Share on Telegram (Opens in new window) Telegram
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
Tags: #IndiaForeignPolicy #GazaConflict #SoniaGandhi #NarendraModi #Geopolitics #Diplomacy #MultiAlignment #PalestineAid #PoliticalDebate #WestAsiaForeign PolicyGaza ConflictGeopoliticsIndia Israel RelationsMulti Alignmentnarendra modiOpEdPalestine Aidsonia gandhiUNRWAकूटनीतिगाजा संकटराजनीतिक विश्लेषणविदेश नीतिसोनिया गांधी लेख

हिंदी विवेक

Next Post
धुरंधर और Citizen Vigilante मूवी वास्तविकता का चित्रण

धुरंधर और Citizen Vigilante मूवी वास्तविकता का चित्रण

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी विवेक पंजीयन : यहां आप हिंदी विवेक पत्रिका का पंजीयन शुल्क ऑनलाइन अदा कर सकते हैं..

Facebook Youtube Instagram

समाचार

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लोकसभा चुनाव

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लाइफ स्टाइल

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

ज्योतिष

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

Copyright 2024, hindivivek.com

Facebook X-twitter Instagram Youtube Whatsapp
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वाक
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer
  • Shipping Policy
  • Refund and Cancellation Policy

copyright @ hindivivek.org by Hindustan Prakashan Sanstha

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण

© 2024, Vivek Samuh - All Rights Reserved

0