पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है बल्कि 5 आधारों पर मिलती हैं नागरिकता । इस आलेख में इसपर विस्तृत जानकारी दी गई है, तो चलिए डालते हैं इसपर एक दृष्टि।
विदेश मंत्रालय ने विगत 24 जून 2026 को 14वें ‘पासपोर्ट सेवा दिवस’ पर एक आयोजित कार्यक्रम में बताया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा का कागजात है। वहीं जुलाई 2025 में जब सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने कहा था कि आधार कार्ड कोई नागरिकता का प्रमाण नहीं है। वोटर आईडी कार्ड को भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता है। तो अब इस बात पर बहस छिड़ गई कि जब पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड भी नागरिकता के प्रमाण नहीं है तो फिर नागरिकता का क्या प्रमाण है।

गृह मंत्रालय के इंडियबन सिटीजनशिप पोर्टल पर भी साफ बताया गया है कि भारतीय नागरिकता नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अंतर्गत प्राप्त की जा सकती है। इस कानून के अनुसार नागरिकता मुख्यतः पांच आधारों पर मिल सकती है। धारा 3 के अंतर्गत जन्म से नागरिकता, धारा 4 के अंतर्गत वंशानुक्रम द्वारा नागरिकता, धारा 5 के अंतर्गत पंजीकरण द्वारा नागरिकता, धारा 6 के अंतर्गत देशीकरण यानी नेचुरलाईजेशन द्वारा नागरिकता और धारा 7 के अंतर्गत किसी भू-भाग के भारत में समावेशन के आधार पर नागरिकता।
सबसे आवश्यक बात यह समझनी है कि भारत में हर नागरिक के पास अलग से कोई एक जैसा ‘नागरिकता प्रमाण पत्र’ होना आवश्यक नहीं होता। भारत में करोड़ों लोग जन्म से भारतीय नागरिक हैं, लेकिन उनके पास अलग से ‘इंडियन सिटीजनशिप सर्टिफिकेट’ नहीं होता।
जिन लोगों ने बाद में भारत की नागरिकता ली है, उनके लिए अलग व्यवस्था होती है। यदि किसी व्यक्ति को पंजीकरण के जरिए भारतीय नागरिकता मिली है, तो उसे सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन मिलता है। यदि किसी व्यक्ति को देशीकरण यानी नेचुरलाईजेशन के जरिए नागरिकता मिली है, तो उसे सर्टिफिकेट ऑफ नेचुरलाईजेशन मिलता है। इसी तरह सीएए के अंतर्गत पात्र लोगों को नागरिकता मिलने पर भी सरकार की ओर से प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। ऐसे मामलों में यही प्रमाण पत्र नागरिकता का सटिक कागजात माना जाता है।
हालांकि जो लोग भारत में पैदा हुए हैं और जन्म से नागरिक हैं, उनके पास आम तौर पर ऐसा कोई अलग नागरिकता प्रमाण पत्र नहीं होता। ऐसे लोगों की नागरिकता सिद्ध करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता के कागजात, उनके नागरिकता से जुड़े रिकॉर्ड, स्कूल के कागजात, निवास से जुड़े रिकॉर्ड, सरकारी कागजात और आवश्यकता पड़ने पर अन्य सहायक दस्तावेज देखे जा सकते हैं। यानी जन्म से नागरिकता वाले मामलों में कोई एक दस्तावेज हर स्थिति में अंतिम प्रमाण नहीं होता बल्कि कागजातों और कानून के आधार पर पूरी स्थिति देखी जाती है।
