अमेरिका के रिसर्च पेपर प्यू ने दुनियाभर की आबादी का सर्वे किया और एक रिपोर्ट दी है, जिसमें उनका कहना है कि,आने वाले दिनोंमें सभी धर्मोंकी आबादी बढ़ेगी, लेकिन हिंदू आबादी घटेगी!
यह आंकड़े कई सालों की जनसंख्या दर देखने के बाद निकाले गए हैं!
रिपोर्ट कहती है कि 2050 तक ईसाई सबसे ज्यादा संख्या में रहने वाले हैं, लेकिन 2070 तक मुसलमान आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा हो जायेगी! इसका कारण है, अधिक जन्म दर। 1992 में भारत में प्रत्येक हिन्दू महिला 03/03 बच्चों को जन्म देती थी, जबकि मुसलमान महिला 04/04 बच्चों को जन्म दे रही थी!
उस समय से 2021 तक के आंकड़े रिसर्च में दिए गए हैं। समय के साथ जागरूकता बढ़ी है, इस कारण से हिन्दू, मुस्लिम में ही बच्चे पैदा करने की दर कम हुई है, लेकिन हिंदुओं में यह अधिक कम हो गई!
2021के अनुसार प्रत्येक हिंदू महिला अब सिर्फ और सिर्फ 01.9 बच्चे (लगभग 02) पैदा करती है,मतलब ‘हम दो, हमारे दो’ के नारे से भी पिछले पायदान पर आकर हिंदू खड़ा हो गया है!
यह 01.9 (लगभग 02) का औसत लाने में भी पिछड़े समाज का अहम योगदान है!
अगड़ी जातियों में यह संख्या और भी ज्यादा कम है। दुर्भाग्य यह है कि पिछड़ा समाज इकोसिस्टम के मकड़जाल में फंसकर खुद की हिन्दू पहचान पर गर्व नही करता! खैर,प्रत्येक मुस्लिम महिला 05.7 बच्चें पैदा करती है
यह अंतर बहुत बड़ा है,अगर प्रति हजार महिलाओं में यह अंतर देखेंगे,तो 1000 मुस्लिम महिलाएं 1000 हिंदू महिलाओं के मुकाबले 700 बच्चे अधिक पैदा करती हैं, और याद रखिये जनसंख्या की वृद्धि दर लगभग चक्रवृद्धि होती है, जो पैदा हुए हैं वें भी फिर संतान उत्पत्ति करते हैं!

आप अभी भी थोड़े से जागरूक होकर अपने अपने आसपास देखेंगे, तो आप समझ जायेंगे कि आपके आसपास ही पिछले 10/20 सालों में कितना ज्यादा डेमोग्राफी चेंज हो गया है!
केवल पैसे कमाने और भोग विलास में मग्न हिन्दू समुदाय को यह समझना पड़ेगा, अगर उनकी आने वाली वंशावली में लोग सीमित संख्या में रह जायेंगे, तो जो अधिक संख्या में होंगे, वें ही शासन करेंगे और वें आपकी कमाई गई धन दौलत का उपभोग करेंगे!
अपने अपने काम धंधे के बीच केवल बढ़ती आबादी (जनसंख्या) ही नहीं, बल्कि आप जनसंख्या में आ रहे, धार्मिक अंतर पर भी ध्यान दीजिए! ये जो बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों की बड़ी संख्या में घुसपैठ भारत में हुई है! ये वाली आबादी बच्चे पैदा करने में भारतीय मुस्लिम महिलाओं से बहुत ज्यादा आगे है!
सरकारी आंकड़ा भी है कि, आजादी के बाद से अब तक की स्थिति को देखेंगे, तो भारत की आबादी में हिंदू की हिस्सेदारी 07% घटी है, और मुसलमानों की हिस्सेदारी 43.15 % बढ़ी है!
यह गम्भीर और विचारणीय विषय है, अपने परिचित लोगों में इस पर भी एक चर्चा जरूर कीजिए!
कम से कम 03 बच्चें तो होने ही चाहिये।
सिकंदर रावल
