केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने हाल ही में शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभाला है। यह जिम्मेदारी उन्हें कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ नेता के रूप में मिली है। उनका यह सफर विद्यार्थी राजनीति से शुरू हुआ है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) तथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) में संगठनात्मक कार्यों के माध्यम से उन्होंने अपना करियर संवारा है।

राजनीतिक और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि
प्रल्हाद जोशी का जन्म नवंबर १९६२ में कर्नाटक के एक पारंपरिक उत्तरी कर्नाटक ब्राह्मण परिवार में हुआ। उन्होंने हुबली में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, धारवाड़ स्थित कदसिद्धेश्वर कला महाविद्यालय से १९८३ में कला (B.A.) की डिग्री प्राप्त की। उनका शैक्षणिक क्षेत्र मानविकी (Humanities) रहा है, लेकिन उनका राजनीतिक अनुभव अत्यंत व्यापक है।

उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और फिर RSS से की। वे २००४ में पहली बार कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद बने और २००९, २०१४, २०१९ तथा २०२४ के चुनावों में लगातार पाँचवीं बार विजयी रहे। २०१३ से २०१६ तक वे कर्नाटक BJP के अध्यक्ष भी रहे। प्रल्हाद जोशी को BJP नेतृत्व का विश्वसनीय और अनुभवी नेता माना जाता है।
महत्वपूर्ण मंत्रालय और योगदान
प्रल्हाद जोशी ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला है। उन्होंने २०१९ से २०२४ के बीच संसदीय कार्य, कोयला और खनन मंत्रालयों का नेतृत्व किया। संसदीय कार्य मंत्री के रूप में, उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) और तिहरी तलाक विधेयक जैसे महत्वपूर्ण कानूनों को पारित कराने में अहम भूमिका निभाई।
उनके करियर का एक उल्लेखनीय अध्याय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत हुई प्रगति है। भारत ने अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में तेज़ी से प्रगति की है और जोशी के कार्यकाल में देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक बना है। २०३० तक ५०० गिगावॉट (GW) अपारंपरिक ऊर्जा क्षमता हासिल करने की दिशा में भारत सरकार के प्रयास जारी हैं।
२०२६ तक, भारत इस लक्ष्य के आधे से अधिक रास्ते पर पहुँच चुका था। जोशी ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी प्रमुख पहलों को गति दी। उन्होंने अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया, विशेष रूप से २०२८ तक घरेलू सौर सेल उत्पादन हासिल करने का लक्ष्य रखा। जनवरी २०२५ तक, भारत ने १३० GW सौर ऊर्जा क्षमता हासिल कर ली थी, जो २०१४ में मात्र २.८ GW थी – यानी कई गुना वृद्धि।

शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार
जुलाई २०२६ में, पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में इस्तीफा देने के बाद, प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। कार्यभार संभालते ही उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न योजनाओं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) २०२० के कार्यान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने पूर्व मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यों की सराहना करते हुए शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए सुधार कर रही है और अगले वर्ष तकनीक-आधारित परीक्षाएँ शुरू की जाएँगी।
प्रल्हाद जोशी का अनुभव, संगठनात्मक कौशल और विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों का नेतृत्व करने की क्षमता – ये सब उन्हें शिक्षा मंत्रालय के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए सक्षम बनाते हैं। आने वाले समय में उनकी कार्यशैली और शिक्षा क्षेत्र में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहेगा।
– मुकेश गुप्ता

