चिकित्सा-शिक्षा में गुणवत्ता की कमी

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अपने बच्चों को हरहाल में मेडिकल और आर्इटी कॉलेजों में प्रवेश की यह महत्वाकांक्षा रखने वाले पालक यही तरीका अपनाते हैं। देश के सरकारी कॉलेजों की एक साल की शुल्क महज 4 लाख है, जबकि निजी विश्व-विद्यालय और महाविद्यालयों में यही शुल्क 64 लाख है। यही धांधली एनआरआर्इ और अल्पसंख्यक कोटे के छात्रों के साथ बरती जा रही है। एमडी में प्रवेश के लिए निजी संस्थानों में जो प्रबंधन के अधिकार क्षेत्र और अनुदान आधारित सीटें हैं, उनमें प्रवेश शुल्क की राशि 2 करोड़ से 5 करोड़ है। बावजूद सामान्य प्रतिभाशाली छात्र के लिए एमएमबीबीएस परीक्षा कठिन बनी हुर्इ है।

इतिहास के पाठ्यक्रम में परिवर्तन क्यों आवश्यक

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एक ओर यहूदियों पर किए गए बर्बर अत्याचार के कारण आज जर्मनी में हिटलर का कोई नामलेवा भी नहीं बचा है, पूरा यूरोप एवं अमेरिका ही यहूदियों पर अतीत में हुए अत्याचार के लिए प्रायश्चित-बोध से भरा रहता है, वहीं दूसरी ओर भारत में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्हें गोरी, गज़नी, ख़िलजी, तैमूर जैसे आतताइयों-आक्रांताओं पर गर्व है, उन्हें उनके नाम पर अपने बच्चों के नाम रखने में कोई गुरेज़ नहीं।

क्या भारत को भी हम विदेशी नज़रिए से ही समझेंगें?

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जामिया से पढ़ी और यूपीएससी में टॉप करने वाली श्रुति शर्मा खुलेआम कह रही हैं कि - ''आर्य आक्रमणकारी थे।'' जब तक हम केवल अकूत पैसे और पावर के कारण आईएएस/आईपीएस एवं अन्य सरकारी बाबुओं को सिर-माथे बिठाते रहेंगें, ये ऐसे ही अनाप-शनाप वक्तव्य जारी करते रहेंगें। दुर्भाग्यपूर्ण है कि…

तलवार की जगह स्थान ले लिया कलम ने

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वीर सावरकर कितने दूरदर्शी थे इसकी मिसाल उनकी इस बात से ही लगाई जा सकती है कि उनका कहना था की "मुझे मुसलमानों से डर नहीं लगता, अंग्रेजों से तो कतई डर नहीं लगता, मुझे डर लगता है तो हिन्दुत्व से नफरत करनेवाले हिंदुओं से ही"। और, वीर सावरकर की…

हमारे ऋषियों ने वेदों को कैसे सुरक्षित रखा ?

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जाने वेदों में रत्ती भर भी मिलावट क्यों नहीं हो सकी ? जब कोई सनातनी ये बताने की कोशिश करता हैं की हमारे ज्यादातर ग्रंथों में मिलावट की गई है तो वो वेदों पर भी ऊँगली उठाते हैं की अगर सभी में मिलावट की गई है तो वेदों में भी…

राजनैतिक स्वच्छता और शुचिता

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उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की वापसी के बाद पहले बजट सत्र से पूर्व नये विधायकों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया । यह प्रशिक्षण पिछले सभी सत्रों से अलग, ऐतिहासिक और उपलब्धियों भरा रहा। उप्र की विधानसभा अब पूरी तरह से ई विधान वाली हो गयी है यानि…

शिक्षा का केन्द्र बिन्दु शिक्षक

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भारत में शिक्षा की मौलिक अवधारणा है कि शिक्षा मानव की अन्तर्निहित शक्तियों का प्रकटीकरण है, न कि केवल छात्र के मस्तिष्क में कुछ जानकारियों को ठूँसा जाना। हमारी मान्यता है कि हमारे अन्दर जो परम चैतन्य विद्यमान है, उसी परमसत्य की अनुभूति और अभिव्यक्ति शिक्षा प्रणाली का मूल उद्देश्य…

कॉलेजों के नामांकन में चौथे स्थान पर पहुंचा बिहार

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उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकन के मामले में बिहार देश में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। यह उसकी बड़ी छलांग मानी जा रही है। नामांकन बढ़ने की वजह से शैक्षणिक सत्र 2020-21 में बिहार के सकल नामांकन अनुपात (जीआइआर) में रिकॉर्ड पांच फीसदी का इजाफा हुआ है। जीआइआर बढ़ाने…

जे.एन.यू. की बौद्धिक संस्कृति

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जब एक संवाददाता ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की चार दशक की उपलब्धियों के बारे में प्रश्न पूछा, तो वहाँ के रेक्टर का प्रमुख उत्तर था कि अब तक सिविल सर्विस में इतने छात्र वहाँ से चुने गए। दूसरी कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि वे गिना नहीं पाए जो समाचार में स्थान…

भारत विरोधी इतिहासकार रोमिला थापर

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ये रोमिला थापर है इतिहास लेखन का काम करती है. ये और इसके जैसे तमाम इतिहास लेखकों के ऊपर कोई सेंसर बोर्ड नहीं है, ये जो चाहे लिख सकते हैं, और हम तथा हमारे बच्चे इनके लिखे हुए विकृत और असत्य लेखों को दिमाग की बत्ती बंद करके पढ़ते रहते…

दिव्यांग बच्चों को चाहिए सहायता-डॉ. वीरेन्द्र कुमार

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दिव्यांग बच्चों को सहायता की आवश्यकता - डॉ. वीरेन्द्र कुमार, सामाजिक न्याय मंत्री दिव्यांग बच्चों को सहानुभूति की नहीं अपितु स्नेह, अपनत्व एवं सहायता की आवश्यकता है। दिव्यांग बच्चों को सहयोग प्रदान करना दिव्य एवं पुण्य का कार्य है। संस्था द्वारा दिव्यांग छात्रों के लिए किये जा रहे कार्य सराहनीय…

सारा संसार लोभ श्रृंखलाओं में फंस गया है

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एक बार विदुर जी संसार भ्रमण करके धृतराष्ट्र के पास पहुँचे तो धृतराष्ट्र ने कहा, "विदुर जी ! सारा संसार घूम कर आये हो आप, कहिये कहाँ-कहाँ पर क्या देखा आपने?" विदुर जी बोले, "राजन् ! कितने आश्चर्य की बात देखी है मैंने। सारा संसार लोभ श्रृंखलाओं में फंस गया…

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