हिंदुत्व : धर्म की अवधारणा, सत्य एवं भ्रांति

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हिंदुत्व का दूसरा नाम सनातन संस्कृति या सनातन धर्म है। सनातन का अभिप्राय ही यह है कि जो काल की कसौटी पर सदैव खरा उतरे, जो कभी पुराना न पड़े, जिसमें काल-प्रवाह में आया असत्य प्रक्षालित होकर तलछट में पहुँचता जाय और सत्य सतत प्रवहमान रहे। फिर यह भ्रांति कब,…

अद्धभुत, अकल्पनीय अभियांत्रिकी से दमकता नया भारत

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बहुत पुरानी बात नही है जब सरहद पर मीटरों के फासले दिनों में तय हो पाते थे,आज किलोमीटरों का सफल मिनिटों में पूरा हो रहा है।इंच इंच रास्ता संघर्ष को आमंत्रित करता था अब मीलों की सुरंग भारत की संप्रभुता,सम्मान और सक्षमता की कहानी बयां कर रहीं है।यह नया भारत है। अपनी सीमाओं की चौकसी में खड़ा हर दुश्मन की आंख में आंख डालकर चुनौती को स्वीकार करने।यह भारत की अद्धभुत इंजीनियरिंग का नया अध्याय भी है जिसे देखकर पूरी दुनियां चकित है।एफिल टावर ,स्टेचू ऑफ लिबर्टी की ऊंचाइयों को अब भूल जाइए।गगनचुंबी ऊंचाइयों पर अभियांत्रिकी को देखना है तो कश्मीर की वादियों में आइए,केवडिया में माँ नर्मदा के तट पर पहुँचिये,यहां नए भारत की मेधा,कौशल और इंजीनियरिंग आपको नए संकल्पों से रु- ब -रु कराते मिलेंगे।हजारों साल पहले जिस वास्तु औऱ विनिर्माण तकनीकी से हमारे पूर्वजों ने,मठ मंदिर,किलों की स्थापत्य कला से दुनियां को परिचित कराया था, कमोबेश आज 21 वी सदी में भी भारतीय इंजीनियरिंग के नायाब कौशल की अनेक ऐसी ही कहानियां लिखी जा रही है।  आज विश्व की सबसे लंबी टनल हो या सबसे ऊंची प्रतिमा या फिर सबसे ऊंचा रेल पुल सब कुछ भारत के नाम पर है।यह भारत की महान एवं विज्ञान सम्मत इंजीनियरिंग विरासत को पुनर्प्रतिष्ठित करने जैसा भी है।आज हमारी अभियांत्रिकी का सिक्का दुनियां को अचंभित कर रहा है।यह सब हो रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिन्होंने भारतीय प्रतिभा को प्रतिष्ठित करने के अतिरेक प्रयासों को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा हुआ है।3428 किलोमीटर लंबी भारत की एलएसी पर आज कोई ऐसा क्षेत्र नही बचा है जहाँ पहुँचने के लिए हमारी सेनाओं को मौसम खुलने का इंतजार करना पड़े।सब दूर सड़कों,पुलों,सुरंगों का ऐसा संजाल मोदी सरकार ने खड़ा कर लिया है, जो दुश्मन देशों को बुरी तरह खटक रहा है।यह सब आज से 10 बर्ष पहले तक असंभव सा लगता था और तथ्य यह है कि तत्कालीन सरकारों की प्राथमिकता से बाहर ही था। केंद्रीय रक्षा मंत्री एके एंटोनी ने सदन में खड़े होकर स्वीकार किया था सीमावर्ती इलाकों में आधारभूत सरंचना विकास हमारी सामरिक नीति का हिस्सा नही है।यानी सीमाओं पर विकास में कांग्रेस की कोई रुचि नही थी।नतीजतन 1997 में सयुंक्त मोर्चा सरकार के समय तबके प्रधानमंत्री श्री एचडी देवगौड़ा ने असम-अरूणाचल को जोड़ने वाले जिस "बोगीवील पुल" का भूमिपूजन किया था उसे 2014 तक ठंडे बस्ते में पटककर रखा। 5920 करोड़ की लागत वाले इस पुल को मोदी सरकार ने अपनी प्राथमिकता में लेकर रिकार्ड समय में पूरा कर दिखाया।4.94किलोमीटर का यह पुल भारत के इंजीनियरों की अदम्य औऱ अद्धभुत क्षमताओं का उदाहरण भी है। असम के डिब्रूगढ़ से अरुणाचल प्रदेश के धकोजी जिले को जोड़ने वाले इस पुल पर आपातकाल में लड़ाकू विमान तक उतारे जा सकते है।हमारे इंजीनियर्स ने इसे  कुछ इस तरह डिजाइन किया है कि भूकंप औऱ बाढ़ जैसी आपदाओं में भी यह अगले 120 बर्षों तक यूं ही खड़ा रहेगा।पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी के जन्मदिवस पर तीन साल पहले प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया था।इस पुल ने न केवल असम और अरुणाचल को जोड़ दिया बल्कि चीन की सीमा तक रसद औऱ सेना भेजना मिनिटों में संभव कर दिया है। इस डबल डेकर पुल के ऊपरी तल पर तीन लेन सड़क एवं निचले तल पर ट्रेन का ट्रेक बनाया गया है।जिन प्रतिकूल परिस्थितियों में यह पुल बॉर्डर रोड आर्गनाइजेशन के इंजीनियरों  ने  बनाया है वह भारतीय इंजीनियरिंग कौशल का अचंभित कर देना वाला पक्ष है। सीमा पर घात लगाए बैठे ड्रेगन लिए तो यह किसी सदमे से कम नही है।देश के इंजीनियर्स का यह कमाल यहीं तक सीमित नही है, बल्कि सामरिक महत्व के हर उस हिस्से में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है जो भारत की सम्प्रभुता,एकता और सीमाई अखण्डता के लिए संवेदनशील माने जाते रहे है। -लिपूलेख दर्रा सड़क से कैलाश मानसरोवर की सुगमता- 17500 फिट की ऊंचाई पर 80 किलोमीटर की यह सड़क बॉर्डर रोड आर्गनाइजेशन के इंजीनियरों के कौशल का एक  बड़ा ही महत्वपूर्ण उदाहरण है।इसके निर्माण ने चीन की सीमा पर हमारी सतत निगरानी को सुनिश्चित तो किया ही है साथ ही कैलाश मानसरोवर की दुर्गम यात्रा को भी सरल बना दिया है।2005 में इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिली थी लेकिन इसका काम आरंभ हुआ 2018 में जब कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता वाले प्रोजेक्ट में शामिल करते हुए 440 करोड़ रुपए स्वीकृत किये।2022 तक इसे पूरा किया जाना था लेकिन देश के इंजीनियर्स ने इसे समय से पहले ही बना दिया।यह सड़क धारचूला को लिपूलेख(चीन बॉर्डर)से जोड़ती है।इस परियोजना "हीरक"के चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी के अनुसार सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस मार्ग के बन जाने से तवाघाटी के पास माँगती शिविर से शुरू होकर व्यास घाटी में गूंजी और सीमा पर भारतीय भूभाग में स्थित सुरक्षा चौकियों तक के 80 किलोमीटर से अधिक के दुर्गम हिमालयी क्षेत्र तक पहुँचना आसान हो गया है।इस नए मार्ग से की जाने वाली कैलाश मानसरोवर की यात्रा का लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा भारत में है,केवल 16 फीसदी ही चीन में पड़ता है जबकि सिक्किम,काठमांडू मार्ग से जाने पर 80 फीसदी हिस्सा चीन में पड़ता था।खासबात यह भी है कि अब चीन के पांच किलोमीटर क्षेत्र को छोड़कर सम्पूर्ण यात्रा वाहनों से हो रही है।कैलाश का महत्व हिंदुओं के अलावा बौद्ध,जैन तिब्बतियों के लिए भी है।भारतीय इंजीनियरिंग ने इस यात्रा को भी अपने कौशल से सुगम्य बना दिया है। -एफिल टावर से ऊंचा रेल पुल बनकर तैयार- दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल कश्मीर के रियासी में बन कर तैयार हो गया है।ये दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज जो कि एफ़िल टॉवर से भी 35 मीटर ऊंचा है. इसकी नदी तल से ऊंचाई 359 मीटर है।कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है इसे रेलवे लाइन के माध्यम से भी सिद्ध किया जाना एक सपने जैसा था लेकिन हमारे इंजीनियर्स ने इस सपने को भी अब पूरा कर दिखाया है। इस रेल लाईन से सेना को कश्मीर घाटी तक पहुंचने में 4 से 5 घंटे की बचत होगी. इस खबर से चीन काफ़ी परेशान हो रहा है।ये ब्रिज जम्मू कश्मीर के रियासी ज़िले में बना है। भारत का चिनाब ब्रिज एफ़िल टॉवर से भी ऊंचा है। स्ट्रेटजिक महत्व के इस ब्रिज के बन जाने से अब पूरी कश्मीर घाटी देश बाक़ी हिस्सों से जुड़ गई है। ये ब्रिज जम्मू के ऊधमपुर से लेकर कश्मीर के बारामूला तक बन रही रेल लाईन यूएसबीआरएल प्रॉजेक्ट का हिस्सा है। इस रेल लाईन के बन जाने से भारतीय सेना को भारत चीन बॉर्डर तक पहुंचने में न सिर्फ़ सहूलियत होगी बल्कि चार से पांच घंटे की बचत भी होगी। इस ब्रिज को बनाने के लिए भारतीय रेलवे के इतिहास की अब तक की इस सबसे ऊंची क्रेन का इस्तेमाल किया गया है। इससे, आसमान में क्रेन के रोपवे से लटक कर जाते भारी स्टील के ब्रिज सेग्मेंट अपनी निर्धारित सटीक जगह पर रखना हमारे इंजीनियर्स की अद्धभुत क्षमताओं औऱ निपुणता का उदाहरण है। अब रेल लाईन का ये डेक आगे बढ़ेगा और चिनाब आर्च के ऊपर बन रहे पुल से जुड़ जाएगा जिसके ऊपर रेल लाईन बिछाई जाएगी.  28 हज़ार करोड रूपए के इस प्रॉजेक्ट से कश्मीर से…

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से युवा और राष्ट्र निर्माण

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 "शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं।"  -नेल्सन मंडेला  वर्तमान मैकाले शिक्षा प्रणाली बनाम गुरुकुल शिक्षा प्रणाली  संयुक्त राज्य अमेरिका के विश्वविद्यालयों में से एक ने अपनी सफलता के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सफल…

स्वामी विवेकानंद के विचार आज के परिप्रेक्ष्य मे…

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एक समूह 10, 11 और 12 सितंबर को संयुक्त राज्य अमेरिका के 40 से अधिक विश्वविद्यालयों में एक सम्मेलन का आयोजन करेगा।  विषय कहता है "वैश्विक हिंदुत्व को खत्म करना" और तस्वीर दर्शाती है कि हिंदुत्व को किसी भी तरह से जड़ से उखाड़ने की जरूरत है।  चूंकि सम्मेलन का…

जानें हिन्दी दिवस का इतिहास

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देश में सबसे अधिक हिन्दी बोलने वालों की संख्या है और उत्तर भारत के अधिकतर राज्य की यह प्रमुख भाषा है हालांकि इस भाषा का इस्तेमाल देश के उन राज्यों में भी होता है जहाँ हिन्दी भाषी नहीं है या फिर कम हैं। हिन्दी भाषा को देश के अलग अलग…

भारतेंदू हरिश्चंद्र: आधुनिक हिन्दी साहित्य के पितामह

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बरषा सिर पर आ गई हरी हुई सब भूमि बागों में झूले पड़े, रहे भ्रमण-गण झूमि करके याद कुटुंब की फिरे विदेशी लोग बिछड़े प्रीतमवालियों के सिर पर छाया सोग खोल-खोल छाता चले लोग सड़क के बीच कीचड़ में जूते फँसे जैसे अघ में नीच भारतेंदु हरिश्चंद्र को उनके साहित्य…

विश्व साक्षरता दिवस की शुरुआत कब और कैसे हुई?

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खुद के और दुनिया के विकास के लिए लोगों का पढ़ा लिखा होना बहुत जरुरी है क्योंकि अब देश सिर्फ किसान से नहीं चल सकता है बल्कि किसान के साथ साथ कलकारखानों की भी जरूरत हो चुकी है और कारखानों को सिर्फ वही लोग चला सकते हैं जो शिक्षित होंगे। कुल…

राष्ट्र के निर्माण में शिक्षा एवं शिक्षकों का योगदान

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कानपुर की एक सभा में भारत के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का एक चित्र ध्यानाकर्षण का केंद्रबिंदु बना, जिसमें वे मंच से उतरने के पश्चात सभागार में बैठे अपने शिक्षकों के चरणस्पर्श कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। यही भारत की संस्कृति और संस्कार हैं।

मैं धर्म व जाति से परे एक भारतीय हूं- दादाभाई नौरोजी

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"मैं धर्म व जाति से परे एक भारतीय हूं" यह शब्द है दादाभाई नौरोजी के जिन्होंने कहा था कि अगर एक शब्द के काम चल जाए तो दूसरे शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए उन्हें भारतीय राजनीति का पितामह भी कहा गया था। मुंबई के एक गरीब परिवार में जन्में…

मुंशी प्रेमचंद की गाय बनाम राष्ट्रीय पशु

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गौकशी के एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है कि गाय भारत की संस्कृति का अभिन्न अंग है, अतएव इसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए। न्यायालय ने जावेद नामक व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह बात कही। जावेद पर…

विज्ञान और रोजगार में संस्कृत की बड़ी भागीदारी

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आमतौर से भारत ही नहीं दुनिया में अंग्रेजी को विज्ञानऔर रोजगार की भाषा माना जाता है। किंतु अब यहमिथक व्यापक स्तर पर टूटता दिख रहा है। नई शिक्षानीति का यदि निष्पक्षता और ईमानदारी से पालन होता हैतो वह दिन दूर नहीं जब हम संस्कृत समेत अन्यभारतीय भाषाओं को पूर्ण रूप…

कोरोना वाइरस ने हमे क्या सिखाया

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भगवान महावीर के अनुयायी आचार्य महाप्रज्ञजी ने आज से कुछ वर्षो पहले हि यह भविष्यवाणी की थी कि आनेवाले समय में तीसरा महायुध्द शस्त्रो से नही बाल्कि जीवानुओं से खेला जायेगा। सचमुच विश्व की आज की परिस्थिती देखते हुए इस महामारी को तीसरा विश्वयुद्ध कहना अतिशयोक्ती नहीं है। 21वी सदी,जहां…

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