श्रावण मास हिंदू पंचांग का पाँचवाँ मास है और इसे भगवान शिव का विशेष प्रिय मास माना जाता है। इस मास में पूरे भारत में लाखों भक्त शिवालयों में जाकर जल, दूध, बिल्वपत्र (बेलपत्र) और अन्य सामग्री से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। इनमें बेलपत्र का विशेष महत्व है। प्रश्न यह है कि श्रावण में शिवलिंग पर बेलपत्र ही क्यों चढ़ाया जाता है?

बेलपत्र को बिल्वपत्र भी कहते हैं। यह तीन पत्तों वाला होता है और इसकी आकृति त्रिशूल जैसी मानी जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार बेलवृक्ष स्वयं भगवान शिव का रूप है। शिवपुराण में कहा गया है कि बिल्वपत्र शिव का अत्यंत प्रिय है। एक कथा के अनुसार जब समुद्र मंथन के समय हलाहल विष निकला तो भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। उस समय देवताओं ने शिव को शीतलता प्रदान करने के लिए बेलपत्र अर्पित किए थे। तब से बेलपत्र शिव को अत्यंत प्रिय हो गया।
श्रावण मास में सूर्य कर्क राशि में रहता है और प्रकृति में गर्मी तथा आर्द्रता बढ़ जाती है। इस समय शरीर और मन दोनों में अशांति की संभावना रहती है। धार्मिक दृष्टि से बेलपत्र को शीतल एवं सात्विक माना जाता है। इसे शिवलिंग पर चढ़ाने से शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त को मानसिक शांति, स्वास्थ्य तथा पापों से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में कहा गया है कि एक बेलपत्र चढ़ाने का फल हजारों कमलों के अर्पण के बराबर होता है।

बेलपत्र के तीन पत्ते त्रिगुण—सत्त्व, रज और तम—का प्रतीक हैं। इन्हें शिवलिंग पर चढ़ाकर भक्त अपने तीनों गुणों को शिव के चरणों में समर्पित कर देता है। कुछ मान्यताओं में ये तीन पत्ते ब्रह्मा, विष्णु और महेश का भी प्रतीक माने जाते हैं। इस प्रकार बेलपत्र चढ़ाना त्रिमूर्ति को एक साथ प्रणाम करने के समान है।
श्रावण मास में सोमवार का विशेष महत्व है क्योंकि सोमवार शिव का दिन है। इस दिन बेलपत्र चढ़ाने का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। स्त्रियाँ विशेष रूप से हरियाली तीज और श्रावण के सोमवारों पर बेलपत्र अर्पित करती हैं। माना जाता है कि इससे उनके परिवार में सुख-शांति रहती है और विवाहित स्त्रियों को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
आयुर्वेद की दृष्टि से भी बेलपत्र अत्यंत गुणकारी है। इसमें शीतलता, पाचन शक्ति बढ़ाने वाले और विषनाशक गुण होते हैं। शिवलिंग पर अर्पित करने के बाद भक्त प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करते हैं, जिससे शरीर को भी लाभ पहुँचता है।
इस प्रकार श्रावण मास में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण और प्रकृति के प्रति आदर का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि भगवान शिव सरल हैं और उन्हें भव्य सामग्री से अधिक सच्ची भावना और बिल्वपत्र जैसे साधारण किंतु पवित्र अर्पण से प्रसन्न किया जा सकता है। जो भक्त श्रद्धापूर्वक बेलपत्र अर्पित करते हैं, उन्हें शिव की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
