हिंदी विवेक
  • Login
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
हिंदी विवेक
No Result
View All Result
दुनियाभर में बढ़ रही कुशल भारतीय युवाओं की मांग

दुनियाभर में बढ़ रही कुशल भारतीय युवाओं की मांग

युवा शक्ति बनाएगी भारत को पुनः विश्वगुरु

by हिंदी विवेक
in देश-विदेश, शिक्षा
0

विश्व में भारत को आज एक युवा देश के रूप में जाना जा रहा है और कई विकसित देश आज भारत से कुशल युवाओं की मांग करते हुए दिखाई दे रहे हैं क्योंकि इन देशों में जन्म दर न्यूनतम स्तर तक पहुंच गई है, जबकि यहां के नागरिकों की औसत आयु तेजी से बढ़ रही है और इन देशों में कार्यशील नागरिकों की संख्या तेजी से घट रही है तथा यह देश प्रौढ़ देशों की श्रेणी में शामिल होते जा रहे हैं।

इसके विपरीत भारत की लगभग 68 प्रतिशत जनसंख्या 15 से 64 आयु वर्ग की हैं एवं 26 प्रतिशत जनसंख्या 10 से 24 आयु वर्ग में शामिल हैं। भारत की 50 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या (लगभग 60 करोड़ से अधिक) 25 वर्ष से कम आयु की है, जबकि 65 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है।
वर्तमान में भारतीय नागरिकों की औसत आयु 28.4 वर्ष है और इसके चलते ही आज भारत को विश्व के सबसे युवा देशों में गिना जा रहा है और भारत आज जनसांख्यिकी लाभांश की श्रेणी में शामिल हो गया है।

 

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की परिभाषा के अनुसार जनसांख्यिकी लाभांश “आर्थिक विकास की वह क्षमता है जो जनसंख्या की आयु संरचना में परिवर्तन के परिणामस्वरूप उत्पन्न हो सकती है, मुख्यतः तब जब कार्यशील आयु वर्ष (15 से 64) की जनसंख्या में हिस्सेदारी गैर कार्यशील आयु वर्ग (14 वर्ष और उससे कम तथा 65 वर्ष और उससे अधिक) की जनसंख्या हिस्सेदारी से अधिक हो।” एक अनुमान के अनुसार भारत में वर्ष 2030 तक कार्यशील आयु वर्ग के नागरिकों की संख्या 104 करोड़ होगी। इस प्रकार भारत का निर्भरता अनुपात वर्ष 2030 तक इसके इतिहास के न्यूनतम स्तर 31.2 प्रतिशत पर होगा।
आगामी दशक में वैश्विक कार्यबल में लगभग 24.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ भारत विश्व में मानव संसाधन का सबसे बड़ा प्रदाता बना रहेगा। भारत ने वर्ष 2005-06 में जनसांख्यिकी लाभांश अवसर खिड़की में प्रवेश कर लिया था एवं वर्ष 2055-56 तक इसी स्थिति में बना रहेगा। भारत में एक गतिशील युवा जनसंख्या मौजूद है जो यदि पर्याप्त रूप से शिक्षित, कुशल, स्वस्थ और रोजगार सम्पन्न हो तो न केवल भारत बल्कि विश्व के कई अन्य देशों में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालने में सक्षम है।

National Youth Policy—Will it help India reap the promised demographic dividend?

अभी हाल ही में दिल्ली के जंतर मंतर स्थल पर युवाओं ने कुछ विषयों को लेकर आंदोलन छेड़ा था, इन युवाओं में कुछ युवा हमारी सनातन संस्कृति द्वारा पोषित संस्कारों से एक तरह से भटकते हुए दिखाई दिए क्योंकि इन युवाओं ने देश के प्रबुद्ध वर्ग के विरुद्ध जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया, वह किसी भी रूप में भारतीय सनातन संस्कृति के संस्कारों के अनुरूप नहीं थी।

यह हम सभी के लिए चिंता का विषय होना चाहिए कि हमारे देश का युवावर्ग (भले ही बहुत कम संख्या में हो) आज किस दिशा की ओर बढ़ चला है। जब भारत आज पूरे विश्व का नेतृत्व करने की ओर बढ़ चला हो और भारतीय युवाओं की मांग वैश्विक स्तर पर कई विकसित देशों में भी बढ़ रही हो, ऐसे समय में देश में अराजकता का माहौल पैदा करना किसी भी प्रकार से सूझबूझ भरी सोच तो नहीं कही जा सकती है।

कुछ शताब्दी पूर्व पुर्तगाली, डच, अंग्रेज आदि भारत की खोज करने के लिए आगे बढ़े थे। उस खंडकाल में भारत लगभग पूरे विश्व को कपड़ा, मसाले, स्टील एवं अन्य कई खाद्य पदार्थों को उपलब्ध करा रहा था। इन पदार्थों के भारी मात्रा में निर्यात के चलते ही भारत को “सोने की चिड़िया” कहा जाता था क्योंकि भारत से विभिन्न पदार्थों के निर्यात के एवज में भुगतान स्वर्ण मुद्राओं में होता था और पूरे विश्व का सोना भारी मात्रा में भारत में जमा हो गया था, परंतु लगभग सकड़ों वर्ष की पराधीनता के चलते भारत को सोने की चिड़िया से एक अति गरीब देश बना दिया गया। तब लगभग 45 लाख करोड़ डॉलर की लूट तो अंग्रेजों ने की थी, जबकि अरब के देशों से आए आक्रांताओं ने भारत को कितना लूटा था, इसका तो कोई हिसाब ही नहीं है।

वर्ष 1947 में स्वाधीनता प्राप्ति के पश्चात भी भारत में आर्थिक नीतियां कुछ इस प्रकार की बनी कि देश में आर्थिक विकास दर लगभग 5 प्रतिशत के अंदर ही बनी रही और भारत लगातार एक गरीब देश बना रहा, परंतु वर्ष 1991 में आर्थिक एवं वित्तीय क्षेत्र में लागू किए गए आर्थिक सुधार कार्यक्रम के चलते एवं वर्ष 2014 के पश्चात देश में तेजी से चलाए गए आर्थिक सुधारों के चलते भारत एक बार पुनः वैश्विक स्तर पर बड़े देशों के बीच सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है और आज भारत की विश्व के सकल घरेलू उत्पाद में भागीदारी, क्रमिक आधार (इनक्रीमेंटल) पर, 16 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है। इस संदर्भ में आगामी कुछ समय में ही भारत, चीन को पीछे छोड़कर विश्व में प्रथम स्थान पर पहुंचने की स्थिति में पहुंच गया है।

Will The Youth Of Today Finally Put India Back On The Map?

भारत आज जनसांख्यिकी लाभांश अवसर खिड़की में पहुंच चुका है एवं भारत से आज प्रतिवर्ष 7 लाख से अधिक नागरिक अन्य देशों में जाकर बस रहे हैं क्योंकि अन्य देशों में इन नागरिकों को रोजगार एवं अपने व्यवसाय में वृद्धि करने के पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं। कई भारतीय कम्पनियों ने अपने व्यवसाय कार्यालय अन्य देशों में स्थापित कर लिए हैं एवं इन देशों में अपने व्यवसाय को बढ़ा रहे हैं, अतः भारत से अपने परिवार के सदस्यों को इन देशों में भेज रहे हैं।

आज विभिन्न देशों में निवास कर रहे भारतीय मूल के नागरिकों की संख्या लगभग 4 करोड़ के आसपास पहुंच गई है। भारतीय मूल के नागरिक इन देशों में मेहनत करते हैं और वहां इन्हें सनातन संस्कृति का वाहक भी कहा जा सकता है क्योंकि वे उस देश को अपनी कर्मभूमि के रूप से स्वीकार करते हैं तथा पूरे मनोयोग से उस देश की सेवा में रत हो जाते हैं और भारतीय मूल के नागरिक इन देशों में अपने लिए एक विशेष स्थान बना लेते है।

अमेरिका में भारतीय मूल के नागरिकों की वार्षिक औसत आय 1.20 लाख अमेरिकी डॉलर से ऊपर है, जबकि स्थानीय नागरिकों की वार्षिक औसत आय 60,000 अमेरिकी डॉलर है। विशेष रूप से स्वास्थ्य (डॉक्टर एवं नर्स), इंजिनीयर, वैज्ञानिक, रिसर्च एवं प्रशासन जैसे क्षेत्रों में भारतीयों की अत्यधिक मांग बन गई है। इन देशों में निवासरत भारतीय मूल में नागरिक अपनी बचत की राशि को भारत में भेजते हैं जिससे भारत को विदेशी मुद्रा की कमी महसूस नहीं होती है और भारत का विदेशी मुद्रा भंडार आज 73,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया है।
पिछले वर्ष विभिन्न देशों में निवासरत भारतीय मूल के नागरिकों ने भारत में 14,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि भारत में भेजी थी, जो पूरे विश्व में किसी भी देश में भेजी जाने वाली विदेशी मुद्रा की राशि में सबसे अधिक है। सिलिकोन वेल्ली से लेकर यूरोपीयन देशों तक भारतीय नागरिकों का महत्वपूर्ण प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

जापान, इजराईल, वियतनाम, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा एवं यूरोपीयन देश (फ्रान्स, जर्मनी, आदि) आज कुशल भारतीय कारीगरों की मांग लगातार कर रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2030 तक इन देशों में 5 करोड़ से अधिक कुशल कारीगरों की कमी होने वाली है। अतः कुछ देशों ने तो इस सम्बंध में अपनी संसद में प्रस्ताव पेश किए हैं एवं भारत से कुशल कारीगरों की औपचारिक मांग की है।

भारत सरकार ने भी भारत के युवाओं में कौशल विकसित करने के उद्देश्य से कई प्रकार की योजनाएं- यथा प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, उड़ान, संकल्प, प्रशिक्षु अधिनियम 1961 के अंतर्गत प्रशिक्षता प्रशिक्षण, महिलाओं के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रधानमंत्री कौशल केंद्र, कौशल ऋण योजना, भारतीय कौशल संस्थान की स्थापना- प्रारम्भ की हैं। इतने कार्यक्रम प्रारम्भ करने के उपरांत भी हाल ही में जारी एक प्रतिवेदन के अनुसार भारत में आज लगभग 8 करोड़ युवा न तो कहीं अध्ययनरत हैं और न ही अपने कौशल को विकसित कर रहे हैं।

अतः भारत सरकार इस संदर्भ में अतिरिक्त प्रयास कर रही है ताकि भारतीय प्रतिभा की मांग को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाई जा सके एवं इन देशों में भारतीय कुशल कारीगरों को स्थापित किया जा सके।

भारत आज प्रतिवर्ष 25 लाख से अधिक कुशल कारीगर तैयार कर रहा है। भारत आज कुशल कारीगरों की आपूर्ति के क्षेत्र में एक वैश्विक इंजिन बन गया है। विभिन्न देशों के साथ भारत द्वारा सम्पन्न किये जा रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के माध्यम से भी भारत की ओर से यह प्रयास किया जाता है कि भारत से कुशल कारीगरों को इन देशों में बसाने के लिए इन देशों की सरकारों द्वारा विशेष सहायता (वीजा प्रदान करने के सम्बंध में नियमों को आसान बनाना) उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

भारत ने हाल ही में जर्मनी, फ्रान्स, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया एवं जापान के साथ प्रवास एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते सम्पन्न किये हैं ताकि भारतीय मूल के कुशल कारीगरों को इन देशों में आवश्यकता पड़ने पर कानूनी सहायता उपलब्ध हो सके। भारतीय कुशल कारीगरों की इन देशों में पर्याप्त मांग बन रही है। साथ ही भारत इन देशों के साथ परस्पर मान्यता समझौते भी सम्पन्न कर रहा है ताकि भारतीय युवाओं को इन देशों में किसी प्रकार की अतिरिक्त शिक्षा ग्रहण करने की आवश्यकता नहीं पड़े और भारतीय शिक्षा को इन देशों में समान मान्यता प्रदान की जाय।

भारत उक्त देशों के साथ सम्पूर्णता समझौता भी सम्पन्न करने का प्रयास कर रहा है। कुछ देश भारतीयों को प्रदान किए जाने वाले वेतन में से सोशल सिक्यरिटी के नाम पर भारी भरकम राशि काट लेते हैं, जो उन्हें कभी वापिस ही नहीं मिलती है। उक्त समझौता इस प्रकार के नियमों को भारतीयों पर लागू करने से इन देशों को रोकता है। एक अनुमान के अनुसार अकेले ब्रिटेन में भारतीयों को प्रतिवर्ष 48 करोड़ डॉलर की राशि की बचत होगी।

आज भारत अपने युवा वर्ग को अन्य देशों में भेजकर यह अपेक्षा भी करता है कि इन देशों में वे नई तकनीकी सीखकर भारत में वापिस आकर अपने व्यवसाय प्रारम्भ करें ताकि भारत में ही रोजगार के अतिरिक्त अवसर निर्मित किए जा सकें एवं भारत से विभिन्न उत्पादों के निर्यात को बढ़ाया जा सके। इस प्रकार आज भारतीय युवा, भारत के लिए अमूल्य सम्पत्ति है। अतः उक्त वर्णित परिस्थितियों के बीच भारत के युवा वर्ग को यह सोचना होगा कि वे पूरे विश्व में बड़े देशों के बीच सबसे तेज़ गति से आगे बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था को किस प्रकार अपना सहयोग प्रदान कर सकते हैं एवं विभिन्न देशों में लगातार बढ़ रही भारतीय कुशल कारीगरों की मांग की आपूर्ति में किस प्रकार अपना योगदान देकर अपने लिए रोजगार प्राप्त कर सकते हैं ताकि भारत को एक बार पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित किया जा सके।

– प्रहलाद सबनानी

Share this:

  • Share on X (Opens in new window) X
  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
  • Share on Telegram (Opens in new window) Telegram
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp

हिंदी विवेक

Next Post
काला धन का साम्राज्य और बेबस होती एजेंसियां

काला धन का साम्राज्य और बेबस होती एजेंसियां

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी विवेक पंजीयन : यहां आप हिंदी विवेक पत्रिका का पंजीयन शुल्क ऑनलाइन अदा कर सकते हैं..

Facebook Youtube Instagram

समाचार

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लोकसभा चुनाव

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लाइफ स्टाइल

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

ज्योतिष

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

Copyright 2024, hindivivek.com

Facebook X-twitter Instagram Youtube Whatsapp
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वाक
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer
  • Shipping Policy
  • Refund and Cancellation Policy

copyright @ hindivivek.org by Hindustan Prakashan Sanstha

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण

© 2024, Vivek Samuh - All Rights Reserved

0