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29 सितंबर 2026: विश्व हृदय दिवस

29 सितंबर 2026: विश्व हृदय दिवस

आधुनिक जीवनशैली के आघात से हृदय की रक्षा जरूरी

by हिंदी विवेक
in स्वास्थ्य
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हृदय केवल शरीर का एक अंग नहीं, जीवन की धड़कन है। जब तक दिल धड़कता है, तब तक जीवन में उम्मीद, संवेदना, प्रेम और कर्म की संभावनाएं बनी रहती हैं। लेकिन विडंबना यह है कि आधुनिक सभ्यता ने जीवन को सुविधाजनक तो बनाया है, पर स्वस्थ और संतुलित बनाने में हम पीछे छूटते जा रहे हैं। हमारी तेज रफ्तार जिंदगी, तनाव, अनियमित दिनचर्या, खान-पान की बदलती आदतें, शारीरिक निष्क्रियता और निरंतर बढ़ती मानसिक बेचैनी हृदय पर ऐसा दबाव डाल रही हैं, जिसका परिणाम हृदय रोगों के बढ़ते खतरे के रूप में सामने आ रहा है।

हर वर्ष 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। विश्व हृदय महासंघ के अनुसार हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोग दुनिया में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण हैं और प्रतिवर्ष लगभग 2 करोड़ लोगों की मृत्यु इन रोगों से होती है। वर्ष 2026 के विश्व हृदय दिवस का संदेश है— “हृदय रोग कई बार सामने दिखाई नहीं देता, इसलिए उसके संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
मैंने अपने पूर्व के आलेख ‘भारतीय दिल खतरे में’ और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े अन्य लेखों में बार-बार इस चिंता को व्यक्त किया है कि भारतीय समाज में बदलती जीवनशैली हमारे दिल के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। आज यह चिंता और अधिक प्रासंगिक हो गई है।

हमारे आसपास ऐसे अनेक युवा दिखाई देते हैं जो कम उम्र में ही उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। प्रश्न केवल यह नहीं कि हृदय रोग क्यों बढ़ रहे हैं, प्रश्न यह भी है कि हमने अपनी जीवनशैली को हृदय के विरुद्ध क्यों बना दिया है?

आज सुविधा ने श्रम को कम कर दिया है। घंटों बैठकर काम करना, मोबाइल और कंप्यूटर पर लगातार सक्रिय रहना, पैदल चलने की आदत का कम होना, देर रात तक जागना और सुबह की प्राकृतिक लय से दूर होना शरीर की जैविक व्यवस्था को प्रभावित करता है।
दूसरी ओर स्वाद और सुविधा के नाम पर अत्यधिक नमक, चीनी, वसा और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू, मोटापा, उच्च रक्तचाप, बढ़ी हुई रक्तशर्करा और रक्त में वसा को हृदय रोग के प्रमुख जोखिम कारकों में गिनता है।

What Causes Heart Disease? | SouthCoast Health

लेकिन हृदय का संकट केवल भोजन और व्यायाम का संकट नहीं है। यह मन का संकट भी है। तनाव, प्रतिस्पर्धा, असंतोष, क्रोध, ईर्ष्या, चिंता और हर समय आगे निकलने की बेचैनी व्यक्ति के भीतर निरंतर मानसिक दबाव पैदा करती है। भौतिक उपलब्धियां बढ़ती जाती हैं, लेकिन मानसिक शांति घटती जाती है। हमने मकानों को बड़ा किया, लेकिन मन को छोटा कर लिया; साधन बढ़ाए, लेकिन संतोष कम कर दिया। यही आधुनिक जीवन की सबसे बड़ी विडंबना है।

इसलिए हृदय की चिकित्सा केवल अस्पताल में नहीं, जीवनशैली में भी खोजनी होगी। सुबह की सैर, नियमित व्यायाम, योग, प्राणायाम, ध्यान, पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और नशे से पूर्ण दूरी हृदय की सुरक्षा के सामान्य लेकिन अत्यंत प्रभावी उपाय हैं। भोजन में प्राकृतिक एवं पौष्टिक पदार्थों, फल-सब्जियों और साबुत अनाज को स्थान देना तथा अत्यधिक नमक, चीनी और संतृप्त वसा को सीमित करना जरूरी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जीवनशैली में ऐसे बदलाव तथा उच्च रक्तचाप, मधुमेह और रक्त में बढ़े वसा का समय रहते उपचार हृदयाघात और स्ट्रोक के जोखिम को कम कर सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है— समय रहते जांच। हृदय रोग कई बार अचानक सामने आता हुआ दिखाई देता है, जबकि उसके जोखिम कारक वर्षों से शरीर में विकसित हो रहे होते हैं। रक्तचाप, रक्तशर्करा, कोलेस्ट्रॉल, वजन और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार अन्य जांचों को उम्र और जोखिम के अनुरूप नियमित रूप से कराना चाहिए। सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, असामान्य पसीना, चक्कर या दर्द का हाथ, कंधे, पीठ अथवा जबड़े तक जाना जैसे संकेतों को सामान्य थकान मानकर टालना खतरनाक हो सकता है। हृदयाघात में समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है; शीघ्र चिकित्सा सहायता जीवन बचाने में निर्णायक हो सकती है।

यहां चिकित्सा विज्ञान के सामने भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। आज जब हृदय रोग समाज के इतने बड़े हिस्से को प्रभावित कर रहे हैं, तब हमें और अधिक सुलभ, सस्ती, शीघ्र पहचान करने वाली और प्रभावी स्वास्थ्य-तकनीकों की आवश्यकता है। ऐसी जांच-पद्धतियां विकसित हों जो प्रारंभिक अवस्था में हृदय संबंधी जोखिमों की पहचान कर सकें।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल स्वास्थ्य, दूरस्थ चिकित्सा, पहनने योग्य स्वास्थ्य उपकरणों और आधुनिक निदान तकनीकों का उपयोग आम नागरिक तक पहुंचना चाहिए। चिकित्सा अनुसंधान का लक्ष्य केवल जटिल हृदय रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि रोग पैदा होने से पहले उसके खतरे को पहचानना भी होना चाहिए।

Cardiovascular disease its Symptoms, Risk Factors and Treatment | Sprint Medical

सरकारों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। हृदय स्वास्थ्य को केवल अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सकों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत बनाकर रक्तचाप, मधुमेह और हृदय जोखिम की नियमित जांच को व्यापक बनाया जाना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में शारीरिक गतिविधि एवं पौष्टिक भोजन को प्रोत्साहन मिले। शहरों में पैदल चलने और साइकिल चलाने के सुरक्षित मार्ग बढ़ें।

तंबाकू नियंत्रण, स्वस्थ खाद्य विकल्पों को बढ़ावा, अत्यधिक नमक एवं अस्वास्थ्यकर वसा को कम करने के प्रयास और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण को हृदय स्वास्थ्य की व्यापक नीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी जनस्वास्थ्य नीतियों, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और जोखिम कारकों के नियंत्रण को हृदय रोगों की रोकथाम का महत्वपूर्ण आधार मानता है।

इसके साथ ही सरकारों को ‘हार्ट हेल्थ इंडिया अभियान’ जैसे व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रमों पर विचार करना चाहिए, जिसमें गांव से महानगर तक निःशुल्क या सस्ती हृदय-जांच, रक्तचाप एवं मधुमेह स्क्रीनिंग, जीवनशैली परामर्श, आपातकालीन हृदय उपचार की जानकारी और पुनर्वास सेवाओं को जोड़ा जा सके। कंपनियों और संस्थानों में भी कर्मचारियों के लिए ‘हेल्दी हार्ट’ कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं। सामाजिक संस्थाएं, विद्यालय, धार्मिक संगठन और मीडिया मिलकर इसे जन-आंदोलन का रूप दे सकते हैं।

दरअसल, हृदय की रक्षा केवल डॉक्टर की जिम्मेदारी नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है। परिवार अपने भोजन और दिनचर्या को बदल सकता है, विद्यालय बच्चों में स्वस्थ आदतें विकसित कर सकते हैं, कार्यालय शारीरिक सक्रियता के अवसर दे सकते हैं और सरकार ऐसी नीतियां बना सकती है जो स्वस्थ विकल्पों को आसान एवं सुलभ बनाएं।

विश्व हृदय दिवस केवल एक दिन की औपचारिक जागरूकता का अवसर न बने। यह हमें अपने जीवन की दिशा पर पुनर्विचार करने का अवसर दे। हमें यह समझना होगा कि हृदय को स्वस्थ रखने के लिए किसी चमत्कार की प्रतीक्षा नहीं करनी है; छोटे-छोटे सही निर्णय ही बड़े परिणाम देते हैं। आज आधा घंटा चलना, आज भोजन में संयम रखना, आज तनाव को कम करना, आज धूम्रपान को छोड़ना, आज अपनी जांच कराना— ये छोटे कदम कल किसी बड़े संकट को रोक सकते हैं।

हृदय की धड़कन हमें हर क्षण एक संदेश देती है— जीवन अनमोल है, इसे असंतुलित जीवनशैली के हवाले मत करो। आधुनिकता अपनाएं, लेकिन प्रकृति से संबंध न तोड़ें; सुविधाएं लें, लेकिन श्रम को जीवन से बाहर न करें; सफलता पाएं, लेकिन स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं।

विश्व हृदय दिवस पर संकल्प यही हो— दिल को केवल धड़कने नहीं, स्वस्थ, शांत और प्रसन्न रहने दें। क्योंकि स्वस्थ हृदय ही स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज की आधारशिला है।

– ललित गर्ग

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