माँ… यह शब्द सुनते ही प्रेम, ममता, वात्सल्य, त्याग और निःस्वार्थ समर्पण की अनगिनत भावनाएँ मन में उमड़ने लगती हैं। हमारे जीवन के प्रत्येक पड़ाव पर हमें सहारा देने वाली, हमारी खुशियों में अपनी खुशी तलाशने वाली और हमारे दुःख में अपना दुःख भुला देने वाली माँ के ऋण से मुक्त होना किसी के लिए भी संभव नहीं है। हालाँकि उसके इस ऋण के प्रति कृतज्ञता का भाव रखते हुए उसके प्रति अपना सम्मान और आभार व्यक्त करने का प्रयास हम अवश्य कर सकते हैं। इसी भावना का एक अत्यंत हृदयस्पर्शी और संस्कारमूल्यों को संजोने वाला अनूठा स्वरूप है, ‘चार क्षण माँ की गोद में’ यह विशेष कार्यक्रम!
NEway भारत फाउंडेशन के संस्थापक दयानंद सावंत ने अपनी माँ के जन्मदिन के अवसर पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इस आयोजन ने उपस्थित लोगों को केवल मनोरंजन का आनंद ही नहीं दिया, बल्कि माँ के रिश्ते और मातृत्व के महत्व पर नए सिरे से विचार करने की प्रेरणा भी दी। माँ को समर्पित संगीत एवं गीतों की प्रस्तुति, मातृत्व के भावविश्व को स्पर्श करने वाले गीत और लगभग 51 माताओं का सिंधु नदी के पवित्र जल से चरण प्रक्षालन एवं पूजन जैसे भावपूर्ण उपक्रमों ने इस कार्यक्रम को एक विशिष्ट ऊँचाई प्रदान की।

समाज के विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियाँ, मित्रगण और मातृशक्ति बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में सहभागी हुए। भारतीय संस्कृति में नदियों को जीवनदायिनी और पवित्र माना गया है। सिंधु नदी ने भारतीय जीवन को केवल जल ही नहीं दिया, बल्कि हमारी संस्कृति और सभ्यता के प्रवाह को भी समृद्ध किया है। ऐसी पवित्र सिंधु नदी के जल से माताओं के चरण धोकर उनका पूजन करना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि मातृत्व के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करने का एक प्रतीकात्मक प्रयास था।

आज के समय में हम अनेक प्रकार के दिवस मनाते हैं। विभिन्न रिश्तों के लिए विशेष दिन निर्धारित किए जाते हैं। उपहारों, शुभकामनाओं और संदेशों का आदान-प्रदान होता है, लेकिन माँ के चरणों में बैठकर उसके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का यह उपक्रम इन सबसे अलग था क्योंकि यहाँ केवल शब्दों के माध्यम से माँ का गौरवगान नहीं किया गया, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से अपनी भावनाओं और सम्मान को अभिव्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में प्रस्तुत संगीत और गीतों ने संपूर्ण वातावरण को मातृप्रेम के भावविश्व में रंग दिया। माँ की ममता का स्मरण कराने वाले भावपूर्ण गीत सुप्रसिद्ध गायिका सुप्रिया कदम, संपदा कदम और असमिया पार्श्वगायिका अनंदिता पॉल की सुरमई स्वरों में संगीतमय प्रस्तुतियाँ, माँ के त्याग और समर्पण का एहसास कराने वाले सूत्रसंचालक शिवराम राजापुरकर के मार्मिक एवं प्रभावशाली शब्द तथा मातृत्व के विभिन्न पहलुओं को उजागर करने वाले उपस्थित मान्यवरों के वक्तव्य और मंगला गौरी के महिलाओं ने प्रस्तुत किए हुए सांस्कृतिक मधुर संगीत एवं नृत्य ने उपस्थित लोगों की स्मृतियों को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
माँ पर आधारित गीतों ने सभी को अपने बचपन की यादों में पहुँचा दिया। माँ की गोद में मिलने वाली सुरक्षा, उसके हाथों से मिला निवाला, बीमारी के समय सिर पर फिरता उसका ममतामय हाथ और जीवन के प्रत्येक मोड़ पर मिलने वाला उसका आशीर्वाद… इन अनेक स्मृतियों ने वातावरण को भावुक बना दिया। इस प्रकार मातृत्व पर आधारित गीत-संगीत और कानों के माध्यम से सीधे हृदय तक पहुँचने वाले सूत्रसंचालन के मार्मिक शब्द केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहे बल्कि भावनाओं, संस्कारों और संस्कृति को जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बन गए।

भारतीय संस्कृति में माँ को केवल परिवार के एक सदस्य के रूप में नहीं देखा गया है, बल्कि उसे देवत्व का स्थान प्रदान किया गया है। ‘मातृदेवो भव’ हमारी संस्कृति की जीवनदृष्टि को अभिव्यक्त करने वाला एक महत्वपूर्ण मंत्र है। माँ केवल संतान को जन्म ही नहीं देती, बल्कि उसे जीवन जीने की दिशा भी देती है। सही और गलत के बीच का अंतर समझाती है, संकटों का सामना करने का साहस देती है तथा परिवार, समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध जागृत करती है। इसलिए माँ का सम्मान करना केवल एक व्यक्ति का सम्मान करना नहीं, बल्कि एक समृद्ध संस्कार परंपरा का गौरव करना है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य के पास अनेक कार्यों के लिए समय है, लेकिन जिस माँ ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण हमारी खुशियों और हमारे भविष्य के लिए समर्पित कर दिया, उससे मन की दो बातें करने के लिए भी कई बार हमारे पास समय नहीं होता। माँ का फोन आने पर ‘बाद में बात करता हूँ’ कहकर उसे इंतजार करवाने वाले बच्चे आज हमारे आसपास दिखाई देते हैं। ऐसे समय में ‘चार क्षण माँ की गोद में’ इस कार्यक्रम का नाम अत्यंत अर्थपूर्ण प्रतीत होता है।
माँ की गोद केवल बचपन में विश्राम और सुरक्षा पाने का स्थान नहीं है, बल्कि वह जीवनभर हमारे मन को बिना किसी अपेक्षा के सहारा देने वाला सुरक्षित आश्रय है। दुनिया कितनी भी बदल जाए, परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हो जाएँ, माँ के प्रेम में हमें हमेशा अपनापन, स्वीकार्यता और आत्मीयता का अनुभव मिलता है।

NEway भारत फाउंडेशन के संस्थापक दयानंद सावंत ने अपनी माँ के जन्मदिन को इस कार्यक्रम के आयोजन का निमित्त बनाया, यह विशेष रूप से सराहनीय है। अपनी माँ का जन्मदिन मनाना व्यक्तिगत आनंद का विषय है, लेकिन उस आनंद को सामाजिक स्वरूप प्रदान करते हुए अनेक माताओं को एक साथ लाना, उनके सम्मान का समारोह आयोजित करना और समाज के विभिन्न वर्गों को मातृत्व की एक समान भावना से जोड़ना निश्चित रूप से एक व्यापक एवं प्रेरणादायी विचार है।
इस आयोजन में NEway भारत फाउंडेशन के संस्थापक दयानंद सावंत के साथ उनके मित्रों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस कारण यह कार्यक्रम किसी एक परिवार तक सीमित न रहकर समाज के सामूहिक भावविश्व का हिस्सा बन गया। विशेष बात यह रही कि कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिष्ठित व्यक्तियों से लेकर सामान्य सहभागी तक, प्रत्येक के मन में एक अलग ही भाव जागृत हुआ। हम यहाँ केवल कार्यक्रम देखने नहीं आए हैं, बल्कि माँ के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने की एक नई प्रेरणा लेकर जा रहे हैं, ऐसी भावना अनेक लोगों की बातचीत में दिखाई दी।
किसी कार्यक्रम की वास्तविक सफलता उसकी भव्यता या उसमें उपस्थित लोगों की संख्या में नहीं होती, बल्कि इस बात में होती है कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद लोगों के मन में कौन-सा विचार और कौन-सी भावना अंकुरित होती है। इस कसौटी पर ‘चार क्षण माँ की गोद में’ यह आयोजन निश्चित रूप से महत्वपूर्ण और सार्थक सिद्ध होता है।
NEway भारत फाउंडेशन के संस्थापक दयानंद सावंत और उनके मित्रों द्वारा आयोजित यह उपक्रम केवल एक कार्यक्रम बनकर नहीं रहा, बल्कि मातृत्व का गौरव करने वाला, कृतज्ञता का संस्कार जागृत करने वाला और समाज के भावनात्मक रिश्तों को अधिक मजबूत बनाने वाला एक सुंदर प्रयास सिद्ध हुआ है।
‘चार क्षण माँ की गोद में’ नाम से शुरू हुआ यह भावनात्मक सफर प्रत्येक व्यक्ति के मन में एक महत्वपूर्ण संदेश छोड़ जाता है…. माँ के लिए केवल चार क्षण निकालना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने जीवन के प्रत्येक क्षण में उसके प्रेम, त्याग और आशीर्वाद के प्रति कृतज्ञता का भाव बनाए रखना ही सच्चे अर्थों में मातृत्व का सम्मान है!

