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ग्रीन पटाखे फोड़ें; प्रदूषण फैलाना छोड़ें

ग्रीन पटाखे फोड़ें; प्रदूषण फैलाना छोड़ें

by हिंदी विवेक
in पर्यावरण, सामाजिक
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“ग्रीन पटाखे फोड़ें; प्रदूषण फैलाना छोड़ें”— यह केवल एक नारा नहीं है, बल्कि आज के समय में पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक ज़िम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए त्योहार मनाने का संदेश है। भारत में दिवाली, शादियों, नववर्ष और अन्य उत्सवों पर पटाखों की परंपरा बहुत पुरानी है। पटाखों की चमक और आवाज़ में लोग खुशी व्यक्त करते हैं, पर इसी खुशी की कीमत अक्सर बढ़ते वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट के रूप में चुकानी पड़ती है। ऐसे में ग्रीन पटाखे एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आए हैं, जो परंपरा और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है।

ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे हैं जिन्हें वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के नागपुर अवस्थित राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान ने कम प्रदूषण वाली तकनीक से विकसित किया है। इन पटाखों को बनाने का उद्देश्य यह है कि त्योहार की रौनक भी बनी रहे, लेकिन हवा में जहरीले धुएँ और धूल के कण कम फैलें।

ये पटाखे दिखने और आवाज़ में आम पटाखों जैसे ही होते हैं, लेकिन इनकी रासायनिक बनावट अलग होती है। इनमें सल्फर, पोटैशियम नाइट्रेट, एल्युमिनियम और अन्य प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों की मात्रा कम रखी जाती है। नियमों के अनुसार इनमें लिथियम, आर्सेनिक, लेड और मरकरी जैसे गंभीर रूप से हानिकारक रसायनों का उपयोग नहीं किया जाता है।

पर्यावरण फ़ोटो और इमेज | Canva

पारंपरिक पटाखे जलने पर हवा में पी एम 2.5 और पी एम 10 जैसे सूक्ष्म कण छोड़ते हैं। ये कण इतने बारीक होते हैं कि साँस के ज़रिए शरीर के अंदर तक पहुँच सकते हैं। इनसे खाँसी, साँस लेने में तकलीफ, आँखों में जलन, अस्थमा और हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

इसके विपरीत ग्रीन पटाखों में कणिका प्रदूषण लगभग 30 से 35 प्रतिशत कम होता है। कुछ श्रेणियों में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसों का उत्सर्जन भी कम होता है। इससे हवा की गुणवत्ता पर पड़ने वाला असर अपेक्षाकृत कम होता है।

ग्रीन पटाखे मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में उपलब्ध हैं। पहली श्रेणी वाले सेफ वाटर रिलीजर कहलाते हैं। ये पटाखे जलने पर जलवाष्प छोड़ते हैं। यह जलवाष्प धूल के कणों को हवा में दूर तक फैलने से रोकती है और उन्हें नीचे बैठने में मदद करती है। इस तरह आसपास की हवा कुछ समय के लिए कम दूषित रहती है। इनमें पोटैशियम नाइट्रेट और सल्फर का उपयोग नहीं होता या बहुत कम होता है।

The oxymoron of 'green firecrackers': This Diwali, your lungs will still  pay the price

दूसरी श्रेणी वाले सेफ थर्माइट क्रैकर कहलाते हैं। इनमें संशोधित थर्माइट मिश्रण का उपयोग किया जाता है, जिससे सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसों का उत्सर्जन कम होता है। इनकी आवाज और राख भी पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम होती है।

तीसरी श्रेणी वाले वाले ग्रीन पटाखों में एल्युमिनियम का उपयोग न्यूनतम रखा जाता है और चमक बनाए रखने के लिए आंशिक रूप से मैग्नीशियम का उपयोग किया जाता है। इन्हें सफल कहा जाता है। ऐसे पटाखों से कम धात्विक कण और धूल निकलती है।

गौरतलब है कि दीपावली सहित हमारे अधिकांश त्योहारों का समय प्रायः सर्दियों की शुरुआत से जुड़ा होता है, जब हवा की गति धीमी हो जाती है। ऐसे में पटाखों का धुआँ हवा में लंबे समय तक रुका रहता है और स्मॉग की समस्या गहराती है। बड़े शहरों में, जहां वाहनों, उद्योगों और निर्माण कार्यों से पहले से प्रदूषण होता है, पटाखों का धुआँ स्थिति को और बिगाड़ देता है।

इस बढ़े हुए प्रदूषण से बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और साँस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोग अधिक प्रभावित होते हैं। पटाखों की तेज़ आवाज़ से पालतू और आवारा जानवर भी बेहद घबरा जाते हैं। वे डरकर भागते हैं, छिपते हैं और कई बार चोटिल हो जाते हैं। ग्रीन पटाखे ध्वनि और वायु प्रदूषण को सीमित करने में मदद करते हैं।

यहां यह जानकारी देना भी जरूरी है कि बाजारों में कुछ साधारण पटाखों को भी ग्रीन पटाखा बताकर बेचा जाता है। इसलिए खरीदते समय सावधानी जरूरी है। असली ग्रीन पटाखों के पैकेट पर सीएसआईआर नीरी का ग्रीन लोगो और क्यूआर कोड होता है। इस क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन करके पटाखे की असलियत और प्रमाणन की जानकारी देखी जा सकती है। ‘सीएसआईआर नीरी ग्रीन क्यूआर कोड ऐप’ से भी यह जांच की जा सकती है।

याद रहे कि त्योहार हमें खुशियां बांटने और रिश्ते जोड़ने का अवसर देते हैं, लेकिन यह खुशी तभी सार्थक है जब वह किसी की सेहत या पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाये। इसलिए जहां संभव हो, पटाखों से परहेज़ करें और यदि पटाखे जलाना जरूरी हो, तो केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे चुनें। “ग्रीन पटाखे फोड़ें; प्रदूषण फैलाना छोड़ें” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा, स्वस्थ जीवन और हरा- भरा भविष्य बनाने का संकल्प है।

– सुभाष चंद्र लखेड़ा

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