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हिंदी विवेक प्रकाशित राष्ट्र सुरक्षा विशेषांक एवं सामाजिक न्याय व
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर पुस्तक का लोकार्पण समारोह
‘शत्रु अर्थात केवल पाकिस्तान और चीन यह व्याख्या अब बदल चुकी है। देश कितना सुरक्षित है यह अब आंतरिक सुरक्षा पर भी निर्भर करता है। अपने कुछ डीप एसेट्स होते हैं जिन्हें तैयार होने में २०-३० साल लगते हैं। कुछ पूर्व प्रधान मंत्रियों ने इन डीप एसेट्स से खिलवाड करने का प्रयत्न किया था।’ ये उद्गार केन्द्रीय रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के हैं जो हिंदी विवेक प्रकाशित राष्ट्र सुरक्षा विशेषांक एवं सामाजिक न्याय व राष्ट्र सुरक्षा विशेषांक के लोकार्पण समारोह के अवसर पर बोल रहे थे।
यह समारोह गुरुवार दिनांक २२ जनवरी, २०१५ को सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के साथ ही, रा.स्व.संघ के सह सरकार्यवाह कृष्णगोपाल जी, निवृत्त ले.जन. दत्तात्रय शेकटकर, सांसद गोपाल शेट्टी, हिन्दुस्थान प्रकाशन संस्था के अध्यक्ष रमेश पतंगे, विवेक समूह के प्रबंध संपादक दिलीप करंबेलकर आदि मान्यवर उपस्थित थे।
राष्ट्र सुरक्षा विशेषांक के अतिथि संपादक निवृत्त ले. जन. डॉ. दत्तात्रय शेकटकर इस अवसर पत कहा कि ‘सुरक्षा की व्याख्या बदलती जा रही है। बीसवीं सदी आर्थिक शक्ति की सदी है। इक्कीसवीं सदी जनशक्ति की सदी है। आपके पास जितना ज्ञान होगा आप उतने ही बलवान होंगे। जब तक देश की सीमाएं सुरक्षित हैं आप सुरक्षित हैं; यह बीसवीं सदी तक ठीक था। अब इस सदी में सीमा सुरक्षित हो तो राष्ट्र सुरक्षित होगा ही ऐसा नहीं है। उसके लिये आंतरिक सुरक्षा होनी आवश्यक ही है।’
रा.स्व.संघ के सहसरकार्यवाह कृष्णगोपालजी ने इस अवसर पर कहा ‘डॉ. आंबेडकर एक अलौकिक व्यक्तित्व और विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। प्रतिकूल परिस्थितियों पर मात करते हुए उनका बचपन गुजरा। इतने सालों में राजनेताओं ने वे किसी विशिष्ट वर्ग के नेता हैं, ऐसी प्रतिमा बना दी है। वे भले ही किसी विशिष्ट वर्ग से संबंध रखते हों, परंतु वे सामाजिक नेता हैं।’
कार्यक्रम में रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के द्वारा कुछ ऐसे लोगों का सम्मान किया गया, जिन्होंने हिंदी विवेक को समय-समय पर सहायता की है। संदीप आसोलकर, रिजवान आडतिया, रज्जुभाई श्रॉफ, प्रमोद चितारी एवं बाबा सिंह का इस अवसर पर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के अवसर पर हिंदी विवेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमोल पेडणेकर द्वारा हिंदी विवेक की अभी तक की यात्रा और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम का सूत्र संचालन हिंदी विवेक की कार्यकारी संपादक पल्लवी अनवेकर ने किया।
 

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