समाज बंधुओं के लिए सदैव तत्पर रहूंगा– आर. एन. सिंह

Continue Reading समाज बंधुओं के लिए सदैव तत्पर रहूंगा– आर. एन. सिंह

अपने परिवार और गांव को छोड़कर मुंबई आने वाले लोगों में अधिकांश लोग उत्तर प्रदेश के ही हैं। मुंबई की चमक-दमक, यहां मिलने वाली सुविधाएं और आजीविका के साधनों से आकर्षित होकर कई लोग अपनी किस्मत आजमाने यहां आते हैं। कुछ लोगों के सपने साकार होते हैं, कुछ लोगों के नहीं, परन्तु कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिनके सपने स्वयं के साथ-साथ समाज कल्याण से भी जुड़े होते हैं। ऐसी ही एक सख्सियत हैं आर.एन. सिंह। सुरक्षा से सम्बन्धित व्यवसाय करने वाले आर.एन. सिंह सामाजिक और लोक-कल्याण के कार्यों के लिए अधिक प्रसिद्ध हैं। प्रस्तुत है इसी सन्दर्भ में उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

जैन धर्म के लिए परम पवित्र है अयोध्या

Continue Reading जैन धर्म के लिए परम पवित्र है अयोध्या

अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि भूमिपूजन के शुभ अवसर पर करोड़ों हिंदुओं के साथ जैन धर्म बंधुओं ने भी दिल खोलकर अपनी खुशी का इजहार किया। प्रभु रामचंद्र जी और अयोध्या धाम से जैन धर्म का भी पुराना नाता रहा है। जैन धर्म के लिए अयोध्या धाम एक परम पवित्र तीर्थ स्थल है।

सीएए विरोध की वास्तविकता?

Continue Reading सीएए विरोध की वास्तविकता?

भारत के अलावा दुनिया में कौन सा देश ऐसा है जो इन्हें शरण देगा? मुसलमानों के लिए तो घोषित रूप से दुनिया में 50 से अधिक देश है, जहाँ उन्हें शरण मिल जाएगी। लेकिन इन हिन्दू, सिख, बौद्ध, और जैनों के लिए तो एकमात्र भारत ही आखिरी उम्मीद है।

प्रकृति की रक्षा हमारी सुरक्षा

Continue Reading प्रकृति की रक्षा हमारी सुरक्षा

यदि हम प्रकृति (पर्यावरण) की रक्षा करेंगे तो प्रकृति भी हमारी रक्षा करेगी। धर्मों रक्षति रक्षित: अर्थात पर्यावरण प्रकृति की रक्षा ही हमारा धर्म है।

तपस्या से समर्पण की ओर

Continue Reading तपस्या से समर्पण की ओर

बिना किसी आधार या सहायता के सामाजिक समस्याओं से सरोकार एवं उनके निवारण के लिये कार्य करने वाली संस्थाओं एवं उनके कार्यकर्ताओं की जानकारी देनेवाली मालिका याने “तपस्या”। जिनके पास न पैसा है न ही नाम  परंतु समाज के लिये कुछ अच्छा कार्य कर रहे हैं, ऐसी संस्थाओं को समाज के सामने लाकर लोगों तक उनकी जानकारी पहुंचाना याने “तपस्या”।

प्राणिमात्र की सेवा

Continue Reading प्राणिमात्र की सेवा

बढ़ते तापमान, सिमटते जंगलों, सूखते जल स्रोतों तथा बढ़ते शहरीकरण के कारण आज असंख्य पक्षी आवासविहीन हो गए हैं। यहां तक कि उन्हें पेयजल भी नहीं मिल पाता, जिस कारण आकाश में उड़ते हुए पक्षी बेहोश होकर जमीन पर गिर पडते हैं। ऐसी स्थिति में पक्षियों को पेयजल उपलब्ध कराने हेतु राजस्थान में ‘अपना संस्थान’ के माध्यम से अनेक गांवों एवं शहरों में प्रेरक प्रयास हुए हैं।

भारतमाला परियोजना ‘न्यू इंडिया’ की दिशा में बढ़ते कदम

Continue Reading भारतमाला परियोजना ‘न्यू इंडिया’ की दिशा में बढ़ते कदम

भारतमाला परियोजना के अंतर्गत देश भर में अनेक नई सड़कों का जाल बिछाने की योजना है। पहले चरण में कोई 24,800 कि.मी. सड़कों के निर्माण का कार्य चल रहा है। किसी राष्ट्र का विकास उसके परिवहन नेटवर्क और उसके रखरखाव के तौर-तरीकों पर निर्भर करता है। यही बात भारत जैसे…

पी ले रे तू ओ मतवाला…

Continue Reading पी ले रे तू ओ मतवाला…

१९३२ में 'मोहब्बत के आंसू' से अपना फ़िल्मी कैरियर शुरू करने वाले सहगल साहब को बड़ी पहचान मिली १९३५ में देवदास से. शरत बाबू के उपन्यास पर बनी यह फिल्म कुंदनजी की पहली बड़ी सुपरहिट फिल्म थी. फिर तो अगले ग्यारह साल के सुपरस्टार थे, सहगल बाबू. वैसे १९३४ में ही 'पूरन भगत' और चंडीदास' से ही लोगों को लग गया था कि बन्दे में पोटेंशियल है

भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड की मिटींग में मुख्य मंत्री आदीत्यनाथ योगी

Continue Reading भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड की मिटींग में मुख्य मंत्री आदीत्यनाथ योगी

मुख्य मंत्री आदीत्यनाथ योगी

रा.स्व.संघ प्रतिनिधि सभा का प्रस्ताव भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन की आवश्यकता

Continue Reading रा.स्व.संघ प्रतिनिधि सभा का प्रस्ताव भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन की आवश्यकता

अ. भा. प्रतिनिधि सभा बहुविध ज्ञान को अर्जित करने हेतु विश्व की विभिन्न भाषाओं को सीखने की समर्थक है। लेकिन, प्रतिनिधि सभा भारत जैसे बहुभाषी देश में हमारी संस्कृति की संवाहिका, सभी भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन को परम आवश्यक मानती है।

इस्लामी धर्मग्रंथों की जानकारी

Continue Reading इस्लामी धर्मग्रंथों की जानकारी

डॉ. प्रमोद पाठक की हाल में प्रकाशित मराठी किताब ‘इस्लामी धर्मग्रंथांची ओळख’ (इस्लामी धर्मग्रंथों का परिचय) इस्लामी धर्मग्रंथों की जानकारी पाने के लिए उपयोगी प्रतीत होती है। इसमें आरंभ में ही पवित्र कुरान और हदीस (मुहम्मद पैगंबर की जीवनकथा और उनकी यादों का संकलन) में समाहित विविध विषयों का विस्तार से विवेचन, स्पष्टीकरण

स्थिर पूर्वोत्तर : सक्षम सामरिक भारत -सुनील देवधर

Continue Reading स्थिर पूर्वोत्तर : सक्षम सामरिक भारत -सुनील देवधर

मेहनत, योग्य नेतृत्व तथा सुयोग्य नीति ने त्रिपुरा में भाजपा को अभूतपूर्व विजयश्री दिलाई। सब साथ आ गए और विजय रथ निकला पड़। इसलिए असल में यह कम्युनिस्टों के शासन से आजीज त्रिपुरा की जनता की विजय है। अब देश कांग्रेस से ही नहीं, कम्युनिस्टों से भी मुक्त होना ही है। प्रस्तुत है त्रिपुरा विजय के शिल्पकार सुनील देवधर के साक्षात्कार के उल्लेखनीय अंश।

End of content

No more pages to load