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‘देश की चौतरफा प्रगति तथा भौतिक और सामाजिक विकास केवल पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय और भारतीय संस्कृति पर आधारित विचारों से ही संभव है। ’ उक्त विचार केंद्रीय सड़क परिवहन व नौवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी ने २८ जून को ‘विवेक संवाद’ और ‘मुंबई स्कूल ऑफ इकोनामिक्स एंड पब्लिक पॉलिसी’ के संयुक्त तत्वावधान में मुंबई में आयोजित ‘टेक अ बिग लीप – बैंकिंग इंडस्ट्रीज गवर्नमेंट’ में रखे। मंच पर भाजयुमो की राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद पूनम महाजन, जेंकोवल स्ट्रैटजिक सर्विस के अध्यक्ष दीपक घैसास, मुंबई विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख प्रो. नीरज हातेकर, आर्चीज बिजनेस सोल्युशंस के संजय ढवलीकर, ‘साप्ताहिक विवेक’ के प्रबंध सम्पादक और राज्य विश्वकोश मंडल के अध्यक्ष दिलीप करंबेलकर और ‘हिंदी विवेक’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमोल पेडणेकर उपस्थित थे।

श्री गडकरी ने कहा कि, ‘देश की प्रगति और विकास का विचार करते समय हमारे लिए राष्ट्रवाद सर्वोपरि है। राष्ट्र हमारी आत्मा है। सुशासन और विकास, ये दोनों चीजें हमारी सरकार की नीतियों में महत्वपूर्ण हैं। ’
देश की आर्थिक परिस्थिति पर श्री गडकरी ने कहा कि, ‘अपने देश की अर्थव्यवस्था पर विचार करें तो दिखाई देता है कि हमारा आयात सर्वाधिक है। इस समय आयात पर ८०० बिलियन डॉलर खर्च होते हैं। हम गहन विचार कर रहे हैं कि यह आयात पर आधारित अर्थव्यवस्था किस तरह निर्यातोन्मुख हो सके। इस दृष्टि से हम प्लानिंग भी कर रहे हैं। इसके लिए हमारी सरकार ने १४०० कानूनों में सुधार किया तथा १५० नए कानून भी बनाए। हम उद्योग-व्यवसाय के अनुकूल वातावरण निर्माण करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। ’

उन्होंने कहा कि,‘विज्ञान-इंजीनियरिंग, नया व्यवसाय शुरू करने समेत सभी बातें ज्ञान का मूल हैं। हमारे पास उपलब्ध इस ज्ञान के भंडार को संपत्ति में कैसे बदला जाए, इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। दुनिया भर में हर क्षेत्र में भारतीय प्रतिभाओं का डंका बज रहा है। चिकित्सा सेवा और सूचना प्रौद्योगिकी में हर जगह भारतीय आगे हैं। परंतु इन क्षेत्रों में और सुधार की आवश्यकता है। इसमें योग्य सुधार हेतु कानून पर अमल होना जरूरी है ताकि अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके। देश, समाज, कृषि आदि क्षेत्र के लिए क्या आवश्यक है, इस पर विचार करना आवश्यक है। ‘साप्ताहिक विवेक‘ जैसी संस्था भविष्य को ध्यान में रखते हुए विचारधारा पर आधारित नीति तैयार कर रही है, इसके लिए ‘टेक अ बिग लीप‘ जैसे कार्यक्रम आयोजित करने का प्रयत्न कर रही है जो कि अत्यंत सराहनीय है। ‘

 

भारतीय जनता युवा मोर्चा की अध्यक्ष और सांसद पूनम महाजन ने कहा कि, ‘ मुंबई इस देश की आर्थिक राजधानी है। पर मुंबई में अनेक समस्याएं हैं। यहां उद्योग-व्यवसाय से संबंधित अनेक प्रश्न हैं, जिनका समाधान किया जाना चाहिए। दुनिया के अन्य बड़े शहरों जैसे कि सिंगापुर, दुबई, शंघाई जैसे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक केंद्रों की तरह मुंबई में बड़े आर्बिट्रेशन सेंटर होने चाहिए। हम इस दिशा में प्रयत्न कर रहे हैं। मुंबई में इसके लिए मूलभूत सुविधाएं होनी चाहिए, इस पर अमल भी किया जा रहा है। इस माध्यम से हमारी सरकार के सहयोग आर्बिट्रेशन सेंटर शुरू किया जा रहा है। अभी इस आर्बिट्रेशन सेंटर की संकल्पना और योजना तैयार करके उसके अध्यक्ष जयंत सिन्हा के अलावा अमिताभ बच्चन, चंदा कोचर जैसे महानुभावों की सहभागिता में एक समिति की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से देश के पहले पहले अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सेवा केंद्र का गठन किया गया है। अगले १८ महीनों में हम मुंबई में आर्बिट्रेशन सेंटर का काम शुरू कर रहे हैं। उसी के साथ ही इस केंद्र का काम बड़े पैमाने पर शुरू करने के लिए बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में जगह देख ली गई है। जल्दी ही यह केंद्र शुरू कर दिया जाएगा। ’

‘जेंकोवल स्टै्रटजिक सर्विसेज’ के अध्यक्ष दीपक घैसास ने बैंकिंग क्षेत्र की जानकारी देते हुए कहा कि, ‘बैंकिंग व्यवसाय में इस समय सभी कार्य ऑटोमेशन मोड द्वारा होता है। कंप्यूटराइजेशन और नवीन तकनीकों के माध्यम से बैंकिंग की पुरानी संकल्पना समाप्त हो चुकी है। अब बैंकों में डिजिटल बैंक इक्विटी के निर्माण की आवश्यकता है। भविष्य में क्रेडिट कार्ड बंद करके आदमी के शरीर में एक चिप लगा दिया जाएगा, जिसके द्वारा बैंकिंग के सारे कार्य किए जाएंगे। भारत में इस समय मुख्य अड़चन कैश विनिमय की है; परंतु अब उसमें भी धीरे-धीरे कमी आ रही है।

उक्त अवसर पर मुंबई विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख नीरज हातेकर ने कहा कि, ‘ मुंबई विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग ने देश की आर्थिक योजनाओं और नीतियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कल्पना से आगे बढ़ कर, खेल के सारे नियमों को बदलते हुए नव उद्यमियों की नई पीढ़ी उभर कर सामने आए, यही हमारा उद्देश्य है। इन नव उद्यमियों का मार्गदर्शन किए जाने की आवश्यकता है। असफल होने पर उनकी सहायता किए जाने की भी आवश्यकता है। ’

‘विवेक समूह‘ के प्रबंध सम्पादक और राज्य विश्वकोश मंडल के अध्यक्ष दिलीप करंबेलकर ने कहा कि, ‘सामर्थ्यशाली अर्थव्यवस्था के लिए उत्तम एंटरप्रिनरशिप की आवश्यकता है। उसका फायदा व्यवसाय, कर्ज, जमापूंजी आदि के माध्यम से बैंक और सरकार को होगा। रोजगार के लिए उत्तम अवसरों के लिए व्यवसाय-उद्योगों के विकास की आवश्यकता है। इसके लिए बैंकिंग क्षेत्र और सरकार को नव उद्योगों को वढ़ाने के लिए मित्रवत कार्य करने की आवश्यकता है।

हमारी परियोजना का उद्देश्य है कि उद्यमियों को नई तकनीकों की जानकारी दी जाए। उसके लिए हमने मुंबई विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित किया है। आगे भी हम इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करते रहेंगे। ‘ ‘आर्चीज बिजनेस सोल्युशंस’ के संजय ढवलीकर ने कहा कि, ‘राष्ट्र के निर्माण हेतु संपत्ति का निर्माण होना आवश्यक है। इसके लिए उद्योग-धंधों को स्थापित करने की आवश्यकता है। वर्तमान सरकार ने इस दिशा में अनेक उत्तम निर्णय लिए हैं। कर्मचारी, भ्रष्टाचार पर रोक, जीएसटी, मुद्रा, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया के माध्यम से अनेक संकल्पनाएं स्थापित की गईं। ‘स्किल इंडिया’ जैसा उपक्रम स्थापित किया गया। परंतु इस क्षेत्र में और अधिक कार्य किए जाने हेतु शोध समिति स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। अंत में सभी मान्यवरों के हाथों ‘टेक अ बिग लीप‘ विशेषांक का विमोचन किया गया।

कार्यक्रम का सूत्रसंचालन हिंदी विवेक की कार्यकारी सम्पादक सौ. पल्लवी अनवेकर ने किया।

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