| मेन्यू कार्ड खोलते ही आपकी नजर ‘एक्स्ट्रा चीज बर्गर’, ‘एक्स्ट्रा चीज पिज्जा’, ‘एक्स्ट्रा चीज सैंडविच’ जैसे आइटम्स पर पड़ती है। नाम पढ़ते ही मुंह में पानी आ जाता है और बिना ज्यादा सोचे आप ‘एक्स्ट्रा चीज’ वाला ऑप्शन चुन लेते हैं। |
इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू, हेल्थ बेनिफिट्स, किसे नहीं खाना चाहिए
चीज का स्वाद लाजवाब होता है, इसलिए इसे पिज्जा, पास्ता, बर्गर और सैंडविच जैसे कई चीजों में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि जहां कुछ लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए खाते हैं तो कुछ इसे प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा सोर्स मानकर खाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या चीज सच में सेहत के लिए फायदेमंद है?

चीज (Cheese) कैसे बनता है
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सबसे पहले दूध को हल्का गर्म किया जाता है।
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इसके बाद उसमें स्टार्टर कल्चर (लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया) मिलाया जाता है, जो दूध को हल्का खट्टा बनाता है।
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फिर दूध को जमाने के लिए रेनेट (एक एंजाइम) डाला जाता है। कुछ लोग रेनेट की जगह नींबू का रस या विनेगर भी मिलाते हैं।
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दूध जमने के बाद उसे छोटे टुकड़ों में काटा जाता है, जिससे उसमें मौजूद ‘व्हे’ यानी बचा हुआ पानी अलग हो सके।
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जो ठोस हिस्सा बचता है, वही ‘चीज’ है। इसे दबाकर आकार दिया जाता है।
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कुछ चीज को हफ्तों या महीनों तक एक ‘एज’ किया जाता है। यानी इसे कुछ दिनों तक एक निश्चित तापमान में रखा जाता है, जिससे उसका स्वाद और टेक्सचर डेवलप होता है।
चीज और पनीर दोनों ही दूध से बनते हैं, लेकिन उनकी बनाने की प्रक्रिया, स्वाद, टेक्सचर और न्यूट्रिशन प्रोफाइल में अंतर होता है।
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पनीर दूध को नींबू के रस या विनेगर की मदद से फाड़कर तैयार किया जाता है। दूध के फटने के बाद उससे पानी अलग कर दिया जाता है। जो ठोस हिस्सा बचता है, वही पनीर कहलाता है।
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इसमें फर्मेंटेशन या एजिंग की प्रक्रिया नहीं होती। इसलिए इसका स्वाद हल्का और फ्रेश रहता है।
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वहीं चीज को बनाने की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है। इसमें दूध में बैक्टीरिया या रनेट मिलाया जाता है।
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इससे फर्मेंटेशन और एजिंग की प्रक्रिया होती है। इसी वजह से चीज का स्वाद ज्यादा गाढ़ा, नमकीन होता है। ये कई अलग-अलग वैरायटी में भी मिलता है।
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न्यूट्रिशन की बात करें तो दोनों में प्रोटीन और कैल्शियम होता है। लेकिन कई तरह के चीज में फैट और सोडियम की मात्रा ज्यादा हो सकती है। इसलिए सेवन करते समय मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

संतुलित मात्रा में चीज खाने के कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं।
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इसमें हाई क्वालिटी प्रोटीन होता है, जो मांसपेशियों की मजबूती, ग्रोथ और रिपेयर में मदद करता है।
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चीज कैल्शियम और फॉस्फोरस का अच्छा सोर्स है, जिससे हड्डियां और दांत मजबूत होते हैं।
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इसमें मौजूद विटामिन B12 और अन्य B-विटामिन्स एनर्जी प्रोडक्शन और नर्वस सिस्टम के लिए जरूरी हैं।
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एज्ड चीज में प्रोबायोटिक होते हैं, जो डाइजेस्टिव और गट हेल्थ को सपोर्ट करते हैं।
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चीज में मौजूद प्रोटीन और फैट लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास देते हैं।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि चीज में फैट और सोडियम की मात्रा ज्यादा हो सकती है। इसलिए इसे संतुलित मात्रा में और हेल्दी डाइट का हिस्सा बनाकर ही खाना बेहतर है। नीचे दिए ग्राफिक से इसके हेल्थ बेनिफिट्स समझिए-
रोज सीमित मात्रा में चीज खाने से शरीर को पर्याप्त कैल्शियम और प्रोटीन मिलता है। लेकिन ज्यादा मात्रा में खाने से कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं। जैसेकि-
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पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
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वजन बढ़ सकता है।
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कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है।
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ब्लड प्रेशर प्रभावित हो सकता है।
एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए लगभग 30-40 ग्राम (करीब एक स्लाइस) चीज खाना सुरक्षित है। अगर हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर या मोटापा है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
बाजार में मिलने वाला हर चीज हेल्दी नहीं होता। कई चीज प्रोसेस्ड होते हैं। इनमें नमक और सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है। कुछ में केमिकल और प्रिजर्वेटिव भी हो सकते हैं। इसलिए बाजार से चीज खरीदते समय इंग्रीडिएंट लिस्ट जरूर देखें।
बाजार से चीज खरीदते समय उसकी क्वालिटी और न्यूट्रिशनल वैल्यू देखना बहुत जरूरी है। इसके फूड लेबल पर कुछ चीजें जरूर चेक करें।
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इंग्रीडिएंट चार्ट में दूध, स्टार्टर कल्चर, रेनेट और नमक जैसे बेसिक इंग्रीडिएंट्स देखें।
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ज्यादा लंबी चौड़ी इंग्रीडिएंट लिस्ट हो तो ध्यान से पढ़ें।
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मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट देखें।
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फूला या फटे पैकेट वाला चीज न लें।
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हमेशा भरोसेमंद ब्रांड से ही खरीदें।
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